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PICS: यह हैं देश के सब से अमीर,सबसे भव्य और सब से प्रतिष्ठित गणपति

Bhaskar.com | Sep 15, 2013, 00:30 IST

  • भारत त्योहारों का देश कहा जाता है। यहां सभी धर्म के लोग अलग-अलग उत्सव मनाते हैं। इनमें सबसे सब से खास है गणेश उत्सव। गणेश उत्सव यूं तो देश भर में मनाया जाता है लेकिन इस की सब से ज्यादा धूम नजर आती है महाराष्ट्र में। यहां मनाया जाने वाला गणेश उत्सव पूरे विश्व से गणेश भक्तों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। गणेश उत्सव के दौरान भक्तों का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए गणेश मंडल करोड़ों रुपये खर्च करते हैं।
    आज हम आप के सामने लेकर आए हैं महाराष्ट्र के 10 सबसे सबसे अमीर, सबसे बड़े और प्रसिद्ध गणेश मंडलों का नजारा।
    आगे तस्वीरों में देखिए यह शानदार नजारा ....
  • ‘दगड़ूशेठ हलवाई गणपति’ मंडल
    सब से पहला नाम आता है श्री ‘दगड़ूशेठ हलवाई गणपति’ मंडल का। इनकी भक्तों में सब से ज्यादा मान्यता है। दगड़ूसेठ हलवाई गणपति को मन्नत पूरी करने वाला गणपति भी कहा जाता है। यह मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से ही भक्त के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
    यहां सबसे ज्यादा चढ़ावा चढ़ता है इसलिए इन्हें पुणे के सबसे अमीर गणपति का दर्जा मिला हुआ है। हर साल गणेश चतुर्थी के दौरान दगड़ूशेठ हलवाई गणपति कि मूर्ति की पूजा नई पोशाक में कि जाती है। इस बार श्रीमंत दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंडल द्वारा गणेश चतुर्थी के लिए गणेश मूर्ति के लिए करोड़ो रुपये का बीमा करवाया गया है।
  • लालबागचा राजा गणपति मंडल
    आज़ादी से पहले साल 1932 में मुंबई के लालबाग इलाके में ब्रिटिश सरकार ने लोगों की दुकानों पर अचानक ताला लगा दिया था। अपनी रोजीरोटी छीनता देख इलाके के लोगों ने गणेश जी की आराधना शुरू की और कुछ दिनों के प्रयास के बाद फिर से उनकी दुकानों खुल गई। इसी खुशी में मुंबई के लालबाग इलाके में साल 1934 में गणेश मंडल की शुरुवात की गई।
    इन्हें भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाले गणपति के रूप में पूजा जाता है। मुंबई के सबसे प्रसिद्ध गणेश पंडालों में लालबाग के राजा का नाम आता है। लालबाग के राजा पर हर साल करोड़ो रूपये का चढ़ाव चढ़ता है। इस पंडाल की खूबसूरती और भव्यता की चर्चा देश ही नहीं विदेशों में भी होती है। हर बार की तरह इस बार भी लालबाग के राजा के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
  • भंडारकरचा राजा गणेश मंडल
    साल 1962 में भंडारकर रोड इलाके के कुछ लोगों ने इस गणपति मंडल की शुरुवात की थी। इस मंडल की शुरुवात लोगों को एकजुट करने के प्रयास में की गई थी। अन्य गणेश पंडालों की तुलना में यह गणेश पंडाल थोड़ा अलग है। यह घर-घर जा कर चंदा इकट्ठा नहीं करता बल्कि इस मंडल को जो लोग खुद आ कर चंदा पहुंचा जाते हैं मंडल उसी से यह गणेश प्रतिमा का निर्माण करता है।
    हर साल कुछ चुने हुए लोग है जो मंडल को एक बड़ी धनराशि चंदे के रूप में देते हैं और उसी से यह प्रतिमा का निर्माण करते हैं। यहीं नहीं बप्पा को पहनाए जाने वाले आभूषण भी कुछ संभ्रांत लोगों के घरों से मंगाए जाते हैं और उत्सव खत्म होते ही उन्हें वापस कर दिया जाता है।
  • गौड़ सरस्वती ब्राह्मण समाज गणपति मंडल
    गौड़ सरस्वती ब्राह्मण समाज ने साल 1955 में गौड़ समाज को एकजुट करने के लिए इस गणेश उत्सव को शुरू किया था। साल के बीतने के साथ-साथ इस गणपति मंडल का महत्व बढ़ गया। साल दर साल इस गणपति मंडल में भक्तों की संख्या लाखों में पहुंच गई। इस गणपति मंडल को चढ़ावे के रूप में करोड़ो रूपये चढ़ाया जाता है। साल 2011 में इस गणेश मंडल का 222 करोड़ का बीमा करवाया गया था।
  • मुंबईचा राजा गणपति मंडल
    यह प्रदेश के सब से प्राचीन गणपति मंडलों में से एक है। इसकी शुरुवात आज़ादी से पहले साल 1928 में लोगों को एक जुट करने और उन्हें अपने हक़ के लिए लड़ने के लिए की गई थी। दस दिन तक चलने वाली विशेष पूजा में आयोजक गणेश वंदना के ठीक बाद रामायण और महाभारत का मंचन करते हैं। इन सब के अलावा रात को एक मराठी सिनेमा दर्शकों को दिखाया जाता है। साल 1977 में मंडल ने अपने 50 वर्ष पूरा करते हुए 22 फिट के गणपति की स्थापना की थी। उस दौरान वह पूरे महाराष्ट्र की सब से बड़ी प्रतिमा थी।
  • गिरगांव चौपाटी के गणपति
    साल 1928 में मुंबई के निकांदवरी लेन में रहने वाले रामचंद्र तेंदुलकर नाम के एक व्यक्ति ने साल 1928 में गणेश उत्सव की शुरुवात की थी। इस गणेश उत्सव की सब से खास बात यह है कि इसमें स्थापित होने वाले गणपति को शुद्ध मिट्टी से तैयार किया जाता है। इस मिट्टी को खास तौर पर पश्चिम बंगाल से मंगाया जाता है। इसी मिट्टी से आगे दुर्गापूजा में भी प्रतिमाओं का निर्माण भी किया जाता है। गिरगांव गणपति का निर्माण पिछले 85 साल से मुंबई के पथकर परिवार द्वारा किया जा रहा है। इस मंडल में स्थापित होने वाली गणेश प्रतिमा की लम्बाई 20 फिट होती है।
  • खेतवाड़ी गणेश मंडल
    इस मंडल का जन्म 1959 में हुआ था। मंडल ने साल 1984 में एक रूपये के चंदे से देश के सब से बड़े गणपति बनाने का सपना देखा जो आगे जा कर साल 2000 में पूरा हुआ। उस दौरान मंडल ने सब से ऊंची 35 फिट के गणपति का निर्माण किया गया था।
  • अंधेरीचा राजा गणेश मंडल

    आज से लगभग 47 साल पहले मुंबई के लालबाग इलाके में काम करने वाले हज़ारों मज़दूरों को तीन बड़ी फैक्ट्रीओं से निकाल कर मुंबई के अंधेरी इलाके में शिफ्ट किया गया था। बाद में इन्हीं लोगों द्वारा साल 1966 में आजाद नगर सार्वजनिक उत्सव समिति की शुरुवात की गई। हर साल यह मंडल अलग-अलग थीम पर पंडाल का निर्माण करता है।

  • श्री कसबा गणपति मंडल-
    कसबा गणपति पुणे के ग्रामदेवता के रूप में पूजे जाते हैं। इस गणपति की स्थापना 121 साल पहले हुई थी। 1893 में जब लोकमान्य तलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव शुरु करने की लोगों को अपील की थी। उसी साल सबसे पहले कसबा गणपति सार्वजनिक मंडल की स्थापना की गई थी।
    इस गणपति का शिवाजी महाराज के काल में वर्णन मिलता है। शिवाजी महाराज के पिता शाहजीराजे भोसले ने पुणे में लाल महल का निर्माण किया और माता जीजाबाई ने इस गणपति की स्थापना की थी। पुणे के शनिवार वाडा के नजदीक श्री कसबा गणपति का मंदिर है।
    आज भी पुणे शहर में और पुणे सार्वजनिक गणेशोत्सव में कसबा गणपति सबसे प्रतिष्ठित गणपति माने जाते हैं। पुणे के प्रथम नागरिक यानी मेयर के हाथों से कसबा गणपति की पूजा होती हैं। उसके बाद जुलूस और विसर्जन की शुरुवात होती हैं।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: One of the biggest festivals in the country top ten ganpati
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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