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अजित की मुश्किलें बढ़ीं: उपमुख्यमंत्री पद की वैधानिकता पर सवाल

Bhaskar News | Dec 11, 2012, 02:07 AM IST

अजित की मुश्किलें बढ़ीं: उपमुख्यमंत्री पद की वैधानिकता पर सवाल

नागपुर.विपक्ष ने उपमुख्यमंत्री पद की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिस पद का वैधानिक महत्व नहीं, उस पर बैठे व्यक्ति का सदन में कैसे परिचय कराया जा सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष दिलीप वलसे पाटील ने इस मामले में अपना जवाब सुरक्षित रखा है। विधान परिषद में भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए गए। सभापति द्वारा अपना निर्णय सुनाने के बाद नेता प्रतिपक्ष विनोद तावड़े के नेतृत्व में विपक्ष ने बायकॉट किया।

सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई। तय कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले मंत्री का परिचय कराया जाना था। उपमुख्यमंत्री ने हाल ही में मुंबई स्थित राजभवन में पद व गोपनीयता की शपथ ली है। फिलहाल उनके पास कोई विभाग भी नहीं हैं।

नेता प्रतिपक्ष एकनाथ खडसे ने कहा कि अजित पवार को दिलाई गई शपथ ही अवैध है। बांबे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ के एक निर्णय के अनुसार उपमुख्यमंत्री पद संवैधानिक नहीं है।

सदन में मंत्री का ही परिचय कराया जा सकता है। शिवसेना के पार्टी नेता सुभाष देसाई ने भी कहा कि न्यायालय के निर्णय का सम्मान होना चाहिए। मनसे के गट नेता बाला नांदगांवकर ने इस संबंध में मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से जवाब मांगा।

पाटील-बाजोरिया में नोकझोंक


विधान परिषद में उपमुख्यमंत्री पद को लेकर उठे बवाल पर शेकाप नेता जयंत पाटील और सत्तापक्ष सदस्य संदीप बाजोरिया के बीच तीखी नोक-झोंक हुई।

जयंत पाटील द्वारा उपमुख्यमंत्री पद की शपथविधि पर आपत्ति जताने पर सत्तापक्ष सदस्य संदीप बाजोरिया व हेमंत टकले ने बचाव करते हुए कहा कि इसके पहले भी कई उपमुख्यमंत्री हुए हैं।

गोपीनाथ मुंडे भी उपमुख्यमंत्री रहे हैं। तब किसी ने आपत्ति नहीं जताई, जिसके बाद पाटील और बाजोरिया में शाब्दिक झड़प हो गई। इसके बाद सभापति शिवाजीराव देशमुख ने अपना निर्णय सुनाकर दोनों को शांत कराया।

अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला टला :

अविश्वास प्रस्ताव पर सोमवार को कोई फैसला नहीं हो सका। इस बाबत सरकार और विपक्षी दलों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। प्रस्ताव पर चर्चा का दिन तय नहीं हो सका। वहीं भाजपा भी अपना रुख तय नहीं कर पा रही है। पार्टी ने अब वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा का समय मांगा है।


विपक्षी दल शिवसेना की जल्दबाजी से नाराज : राज्य सरकार के सिंचाई श्वेतपत्र के विरोध में शिवसेना ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था।

बाकि विपक्षी दल अविश्वास प्रस्ताव लाने की शिवसेना की जल्दबाजी से नाराज हैं। मनसे पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगी। अब भाजपा को भी लगने लगा है कि यह प्रस्ताव लाने से पहले उसे अपने वरिष्ठ नेताओं से चर्चा लेनी चाहिए।

सूत्रों के अनुसार बैठक की शुरुआत में ही सरकार ने साफ कर दिया कि वह अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने विपक्ष से पूछा कि आप हमें चर्चा का दिन बताइए।

जवाब में कुछ विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे पहले सप्ताह में यह चर्चा नहीं चाहते, क्योंकि उनके पास और कई अहम मुद्दे मौजूद हैं। तभी भाजपा नेताओं ने वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करने का समय मांगकर सबको चौंका दिया।


भाजपा नेताओं ने मांगा वक्त


सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेताओं ने सरकार से कहा कि इस बारे में हमें अपने वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करनी है। इसलिए हमें थोड़ा वक्त चाहिए। हम जल्द ही आपको अपना निर्णय बताएंगे।

बैठक में मौजूद मनसे के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भाजपा को शायद अपनी गलती का एहसास हो गया है।

इसलिए वह तय नहीं कर पा रही है कि उसे आगे क्या करना चाहिए। यही वजह है कि सोमवार की बैठक में उसने अब वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करने की बात कही।

बैठक में मौजूद भाजपा नेता ने शिवसेना को लेकर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाने का शिवसेना का फैसला गलत था।

प्रस्ताव के लिए यह सही समय नहीं है, लेकिन हमारी मजबूरी यह है कि शिवसेना ने प्रस्ताव दिया है तो हमें समर्थन करना पड़ता है।

भाजपा पार्टी अध्यक्ष नितीन गडकरी और वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे भी नागपुर आ रहे हैं। उनके साथ चर्चा करने के बाद हम आगे का फैसला करेंगे।


मुंडे का हुआ था विरोध


विपक्ष की ओर से बताया गया कि युति सरकार के दौरान फिलहाल के सत्तापक्ष के लोगों ने ही उपमुख्यमंत्री पद पर सवाल उठाए थे।

आरआर पाटील, दिलीप वलसे पाटील व जयंत पाटील के अलावा अन्य नेताओं ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री गोपीनाथ मुंडे का विरोध किया था। गृहमंत्री पाटील ने कहा कि जब वे उपमुख्यमंत्री थे, तभी औरंगाबाद न्यायालय का निर्णय आया था।

कानूनी सलाहकारों से मशविरे के बाद उन्होंने फाइल पर मंत्री की हैसियत से ही हस्ताक्षर किए। अन्य स्थानों पर उपमुख्यमंत्री लिखा जाता रहा।

लोकनिर्माण मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि अन्य राज्यों में भी उपमुख्यमंत्री हैं। देश में उपप्रधानमंत्री भी हुए हैं। राकांपा विधायक नवाब मलिक ने कहा कि राजभवन में उपमुख्यमंत्री को दिलाई गई शपथ नियमबाह्य नहीं मानी जा सकती।

इन शब्दों में ली शपथ


अजित पवार ने शपथ लेते हुए कहा-'मैं उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेता हूं।Ó संवैधानिक व्यवस्था में हर राज्य में मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री की शपथ का जिक्र है। उपमुख्यमंत्री पद का अस्तित्व नहीं है।

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Web Title: Ajith pawar in trouble: legitimacy of deputy chief questioned
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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