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केंद्र में बदलाव, राज्य में असर

भास्कर न्यूज़ | Jan 26, 2013, 05:13 IST

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केंद्र में बदलाव, राज्य में असर

नागपुर।

केंद्रीय राजनीति में भाजपा के अध्यक्ष पद से नितीन गडकरी का बाहर होना महाराष्ट्र की राजनीति पर काफी असर कर सकता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा में गडकरी के पावर कट से राज्य में राकांपा जैसे दल की अपेक्षाएं बाधित होगी। साथ ही प्रदेश भाजपा के पुराने पावर नए सिरे से उभरने का प्रयास करेंगे। कुछ ही दिनों में प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा। उसमें भी चौंकानेवाले घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। अनुमानों के अनुसार शिवसेना को राहत मिलेगी। राकांपा के शरद पवार व मनसे सुप्रीमो राज ठाकरे की अपेक्षाएं भंग होगी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुधीर मुनगंटीवार को भी थोड़ी निराशा हो सकती है।


राज्य की राजनीति में गोपीनाथ मुंडे व नितीन गडकरी के बीच राजनीतिक वर्चस्व का संघर्ष अंदरुनी तौर पर हलचल मचाता रहा है। तीन वर्ष पहले जब गडकरी को भाजपा की कमान सौंपी गई थी तब मुंडे का दर्द केंद्रीय स्तर पर चिंतन का विषय बना था। पार्टी में उपेक्षा का सुर छेड़ते हुए मुंडे ने राह बदलने की तैयारी जताई थी। दिल्ली में कांग्रेस नेता के बंगले पर भी वे नजर आए थे। उनका असंतोष दूर करने के लिए लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज व राजनाथसिंह जैसे बड़े नेताओं को आगे आना पड़ा था। मुंडे ने सब्र का घूंट पीकर स्वयं को बड़े नेताओं का स्नेह पात्र बना
लिया। अब भी वे लोकसभा में विपक्ष के उपनेता हैं।


माना जा रहा है कि दबी भावनाएं फिर से सामने आएंगी। मुंडे अपने रुतबे को बरकरार रखने के लिए राज्य की राजनीति में प्रभावी रहने की कवायद करेंगे। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सुधीर मुनगंटीवार को नितीन गडकरी के करीबी कार्यकर्ताओं में गिना जाता है। मुनगंटीवार का दोबारा प्रदेश अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि राजनीतिक स्थिति को देखते हुए मुंडे इस मामले में अधिक ध्यान नहीं देंगे। फिर भी चुनौती की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

मुंडे को कुछ समय पहले परिवार से ही राजनीतिक घाव मिला थे। उनके भतीजे धनंजय मुंडे ने बगावत की। धनंजय के पिता कई कार्यकर्ताओं के साथ राकांपा में शामिल हुए। खुले तौर पर कहा गया कि राकांपा विशेषकर अजित पवार ने मुंडे परिवार में राजनीतिक तोडफ़ोड़ की, लेकिन अंदरुनी तौर पर कहा जाता है कि धनंजय को भाजपा के कुछ नेताओं से ही बगावत के लिए बढ़ावा मिला था। संदेह की सुई नागपुर से दिल्ली तक घूमती रही। मुंडे के करीबी माने जाने वाले पांडूरंग फुंडकर प्रदेश की राजनीति में अचानक हाशिए पर चले गए। प्रदेश अध्यक्ष पद तो गया ही वे विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष पद पर भी नहीं रहे। मुंडे को राजनीति में भाजपा का ओबीसी चेहरा माना जाता है। फुंडकर भी ओबीसी है। प्रदेश भाजपा में फुंडकर को स्थान दिलाने का प्रयास मुंडे की ओर से किया जा सकता है।


तीन वर्ष में भाजपा से शिवसेना की अपेक्षाओं को लगातार आघात मिलता रहा है। मनपा, जिला परिषद व नगर निकाय चुनावों में शिवसेना को भाजपा की मदद नहीं मिली। कहीं राकांपा तो कहीं मनसे ने शिवसेना के कदम रोके। इन चुनावों में गठबंधन के लिए भी शिवसेेना को भाजपा की बेरुखी का सामना करना पड़ा। समय-समय पर राजनीतिक संदेश मिलता रहा कि गडकरी अर्थात भाजपा हाइकमान राकांपा व मनसे के प्रमुखों के साथ हैं। निकाय चुनावों में लाभ-हानि के पूर्वानुमान के साथ भाजपा, राकांपा व मनसे में क्षेत्र बंटने के अंदरुनी आरोप लगते रहे हैं। मनसे को राजग से जोडऩे का प्रयास भी गडकरी ने किया था। राकांपा के पवार परिवार के साथ गडकरी के करीबी होने की चर्चा भी समय-समय पर गर्माती रही। अंजलि दमानिया ने खुलकर आरोप लगाए थे कि गडकरी व पवार परिवार के बीच लाभ का गठबंधन है। राज्य में सत्ता में रहते हुए राकांपा बार-बार कांग्रेस को चुनौती दे रही है। इस मामले में भी कहा जाता रहा है कि भाजपा का साथ राकांपा को भा रहा है। गडकरी के भाजपा में पावर कट से राकांपा के पवार की राजनीतिक अपेक्षाएं प्रभावित हो सकती है।


नागपुर व विदर्भ में गडकरी का प्रभाव बढ़ा है। यहां भी कुछ लोग असंतुष्ट रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव मेें गडकरी की नीति का विरोध करते हुए कुछ नेताओं ने बगावत की थी। विदर्भ में भाजपा में ऐसे नेताओं की कमी नहीं है जो अंदरुनी तौर पर कहते हैं कि नयों को अधिक महत्व दिया जा रहा है। पुराने नेताओं के समर्पण की परवाह नहीं की जा रही है। उन असंतुष्टों को भी गडकरी को संभाले रखना होगा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार विदर्भ में भाजपा के 47 में से 19 विधायक प्रदेश अध्यक्ष सुधीर मुनगंटीवार के साथ हैं। प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव में विधायकों को भी खुलकर मत रखने का मौका मिला तो चौंकानेवाले नतीजे सामने आ सकते हैं।


हालांकि स्वयं मुनगंटीवार मानते हैं कि गडकरी की राजनीतिक कुशलता का फायदा प्रदेश भाजपा को मिलेगा। गुरुवार को गडकरी के स्वागत कार्यक्रम के दौरान एक चर्चा में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विरोध में भाजपा राज्य में मुखर हो रही है। गडकरी व मुंडे मिलकर काम करेंगे। भाजपा एकजुट है।

आयकर अधिकारियों को धमकी अशोभनीय
खुले मंच से नितीन गडकरी की सराहना करने वाले कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रणजीत देशमुख ने एक दिन बाद ही अपने सुर बदल दिए। बकायदा पत्रकार वार्ता लेकर उन्होंने कहा कि गडकरी ने आयकर अधिकारियों को अशोभनीय धमकी दी है। गडकरी खयाली पुलावा देख रहे हैं। भाजपा सत्ता से दूर है। गुरुवार को एग्रो विजन प्रदर्शनी के उद्घाटन कार्यक्रम में देशमुख, नितीन गडकरी के साथ थे। उन्होंने विदर्भ के विकास के मामले में गडकरी की सराहना की थी। विदर्भ के शेर संबंधी सांसद विजय दर्डा के बयान से कांग्रेस हाइकमान को अवगत कराने की तैयारी भी उन्होंने जताई।

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Web Title: Gadkari may face challange in State politics
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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