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ये है एक ऐसे दर्द की पीड़ा जिसे सहना किसी भी औरत के लिए असहनीय है!

Bhaskar News | Dec 03, 2012, 00:13 IST

  • नागपुर.शनिवार की सुबह डागा अस्पताल में काफी हंगामा हुआ। अलग अलग परिवार के दो शिशुओं की मृत्यु पर उनके परिजन व राजनैतिक कार्यकर्ता भड़क उठे।

    जमकर नारेबाजी की। चिकित्सकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। घेराव प्रदर्शन किया गया। तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। अस्पताल के अधिकारियों की ओर से कहा जा रहा है कि प्राकृतिक मृत्यु के इस मामले को तुल दिया गया।


    शांतिनगर निवासी मोहम्मद आरिफ की पत्नी शाइना परवीन को प्रसुति के लिए अस्पताल में लाया गया था। शुक्रवार को उसे अस्पताल के बाह्य रुग्ण विभाग में औपचारिक जांच के बाद वार्ड एल आर २ में भर्ती कराया गया। शनिवार की सुबह शाइना ने शिशु को जन्म दिया। कुछ देर बाद उसकी मृत्यु हो गई।

    शाइना के परिजनों के अनुसार चिकित्सकों की लापरवाही के कारण शिशु की मृत्यु हुई । अस्पताल में पीड़िता को लाए जाने के समय से ही चिकित्सकों का व्यवहार अपमानजनक था। वे शाइना को अभद्र शब्दों में फटकार लगा रहे थे। प्रसुति वेदना की शिकायत करने पर शाइना पर एक चिकित्सक ने तमाचा जड़ दिया। चिकित्सकों के व्यवहार को सहना पड़ा।

    परिजनों का यह भी आरोप है कि चिकित्सकों ने शाइना को आवश्यक उपचार सेवा नहीं दी। दवाइयां भी अनियमित तौर से इस्तेमाल की गई। शाइना के परिजनों का राजनीतिक कार्यकर्ताओं से अच्छा संबंध है।

  • सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में उनके परिचित अस्पताल में पहुंचे। राकांपा पदाधिकारी भी वहां आए। शाइना के परिजनों ने चिकित्सकों के व्यवहार के बारे में कार्यकर्ताओं को बताया। उनकी व्यथा जब सुनी जा रही थी तभी एक और परिवार चिकित्सकों की शिकायत करने लगा। वार्ड क्र.6 में भर्ती आशा प्रभाकर पौनीकर के शिशु की भी मृत्यु हो गई। बिनाकी मंगलवारी निवासी आशा को भी शुक्रवार को ही प्रसुति के लिए अस्पताल में लाया गया था। पौनीकर परिवार ने भी शाइना के परिवार की तरह चिकित्सकों के व्यवहार की शिकायत की। उनका कहना था कि प्रसुति वेदना के समय आशा को अपमानजनक फटकार लगायी।

  • कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। एक वरिष्ठ चिकित्सक का घेराव किया। तनाव की स्थिति को देखते हुए तहसील थाने से बड़ी संख्या में पुलिस को बुलाया गया। पुलिस ने लोगों को शांत किया। उसके बाद चिकित्सा अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा गया । कार्यकर्ताओं में कामिल अंसारी, तनुज चौबे, रमन ठक्कर, राजेश कुंभलकर, अण्णाजी राऊत, अशफाक खान तथा अकील खान शामिल थे। मामले की जांच कर दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई करने की मांग की गई।
    होगी जांच :
    प्रारंभिक तौर पर जानकारी मिली है कि आशा पौनीकर के शिशु की गर्भ में ही मृत्यु हो गई थी। शाइना के शिशु की गर्दन पूर्ण विकसित नहीं हो पायी थी। जन्म से 7 दिनों तक शिशुओं की स्थिति नाजुक रहती है। आरोपों की जांच की जाएगी। शव विच्छेदन रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होगी।
    - डॉ. वैशाली खेडीकर,
    स्वास्थ्य अधीक्षक,डागा अस्पताल, नागपुर
  • गटर में जहरीली गैस, रेलवे सफाईकर्मी की मौत :
    रेलवे स्टेशन के मुख्यद्वार के समीप सफाई के लिए गटर में उतरे रेलवे सफाईकर्मी की दम घुटने से मौत हो गई। घटना के बाद कुछ देर के लिए परिसर की स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। आरपीएफ जवान कोशिश करने के बाद भी कर्मचारी को गटर से निकाल नहीं पाए। करीब आधे घंटे बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ी घटनास्थल पर पहुंची व सफाईकर्मी को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया। मगर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आने से मौत का कारण पता नहीं चल पाया है।
  • सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे स्टेशन के मुख्यद्वार के समीप शनिवार शाम 4 बजे गटर की सफाई करने 2 रेलवे सफाईकर्मी पहुंचे। एक गटर के बाहर खड़ा रहा, जबकि दूसरा मनोज पन्ना (49) लगभग 14 फीट नीचे उतरा। सफाई कर एक बार वह बाहर आया भी, लेकिन दूसरी बार ऐसा नहीं हो पाया। गैस से दम घुटने के कारण वह गटर में ही बेहोश हो गया। उपर खड़े कर्मचारी ने मनोज की गंभीर हालत को देखते हुए मदद के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया। सैकड़ों लोग एकत्र हो गए। किसी ने घटना की जानकारी संबंधित सुरक्षा विभाग को दी। घटनास्थल पर पहुंचे सुरक्षा दल ने २० मिनट के भीतर सफाईकर्मी को बाहर निकाल मेयो अस्पताल भेजा गया। मगर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि मृतक अजनी रेलवे कॉलनी का निवासी था।

  • नहीं बरती सावधानी :
    आमतौर पर गहरे गटर के निचले तल में मिथेन गैस होती है। यदि कोई कर्मचारी इतनी गहराई में उतरता है, तो पहले से ही सावधानी बरती जाती है, लेकिन सूत्रों के अनुसार उपरोक्त हादसे के दौरान सावधानी की उपाययोजनाएं नहीं की गई थी। गटर में उतरे कर्मचारी को खींचने के लिए रस्सी का इंतजाम तक नहीं था।
    सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाईं :
    रेलवे में कर्मचारियों की संख्या कम होने से काम का बोझ बढ़ रहा है। यहां तक कि सुरक्षा नियमों का ध्यान भी रेलवे नहीं रख पा रही है। नियमों की अवहेलना के कारण उपरोक्त घटना हुई है।
    -विनोद चतुर्वेदी, मंडल सचिव, सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ
  • जांच चल रही है :
    गटर काफी पुराना है पर यहां नियमित काम होता रहा है। घटना की जांच चल रही है। यदि दक्षतापूर्वक काम नहीं हुआ होगा तो संबंधित विभाग पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मृतक के परिवार को नियमानुसार पूरी मदद मिलेगी।
    - बृजेश दीक्षित, मंडल रेल प्रबंधक, मध्य रेलवे नागपुर मंडल
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Uproar over death in nagpur
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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