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स्टोरी1 : वह भोपाल में बड़ी हुई और सेंट थेरेसा

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:15 AM IST

स्टोरी1 : वह भोपाल में बड़ी हुई और सेंट थेरेसा
स्टोरी1 : वह भोपाल में बड़ी हुई और सेंट थेरेसा स्कूल में पढ़ी। बाद में उसने स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेज से कम्प्यूटर प्रोग्रामर की ट्रेनिंग लेकर भारत की साइबर राजधानी बेंगलुरू में अच्छा जॉब हासिल कर लिया, जो किसी भी महत्वाकांक्षी युवा के लिए सामान्य बात है। असामान्य बात यह थी कि उसने ऑयल और कैनवास से अपने बचपन का लगाव जिंदा रखा। 2014 तक पेंटिंग का जुनून इतना ज्यादा हो गया कि वह नौकरी छोड़कर दुनिया की सैर पर निकलने के लिए मजबूर हो गई ताकि सैनफ्रांसिस्को और पेरिस जैसे शहरों के अग्रणी स्टुडियो से कला की बारीकियां सीख सके।

सिएटल में फेसबुक पर उसने ‘लविंग विसेंट’ मूवी का ट्रेलर देखा। यह विचार उसे अद्‌भुत लगा और उसने खुद से वादा किया कि वह फिल्म का हिस्सा बनेगी। दो हफ्ते की पेंटिंग और तकनीक सीखने के बाद उसे उस फिल्म के लिए पेंटर व एनिमेटर चुन लिया गया, जिसमें ऑस्कर विजेता ब्रिटिश निर्माता ह्यू वेल्चमैन काम कर रहे हैं।

मिलिए 34 वर्षीय शुची मूले से, जो सौ ‘वान गॉग कलाकारों’ में से एक हैं। हर शॉट पेंट किया जा रहा है अौर हर शॉट की अलग फ्रेम है। शुची को वेल्चमैन ने दुनियाभर के हजारों शौकिया और पेशेवर चित्रकारों में से चुना है। यह इसलिए संभव हुआ, क्योंकि वे एम्सटर्डम के वान गॉग म्युजियम में गईं और उनकी पेंटिंग्स की महान कहानियां जानीं, जिनके साथ इस महान चित्रकार के प्रसिद्ध पत्र भी प्रदर्शित थे। जुनूनी ट्रिप और सीख ने उन्हें सबसे प्रतिष्ठित हॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री पहुंचा दिया।



स्टोरी 2 : गिरीश गुप्ता टुरिस्ट गाइड थे, जिससे उन्हें यात्रा का अवसर मिलता था। 2003 की शुरुआत में ऐसी ही यात्रा के दौरान उन्होंने प|ी रेखा से कहा कि गुजरात के कुम्हार अवसरों की खोज में अन्य क्षेेत्रों में जा रहे हैं, क्योंकि उनके परंपरागत बर्तन चलन से बाहर होते जा रहे हैं। दोनों ने सोचा कि वे शिल्पकला सीखकर उन कुम्हारों की मदद कर सकते हैं। उन्होंने पुरातत्वविदों की मदद से हड़प्पा की प्रागैतिहासिक जगह पर मिट्‌ट्ी के बर्तनों के टुकड़ों की बनावट का अध्ययन किया। उन्होंने यह भी पाया कि गंगा की तलहटी की मिट्‌टी स्थानीय सामग्री में अच्छी तरह मिल जाती है अौर उससे कप व मग जैसी चीजें बनाई जा सकती थी। उन्होंने हलके वजन की माइक्रोवेव में इस्तेमाल लायक स्क्रैचप्रूफ क्रॉकरी बनानी शुरू की। वार्ली पेंटिंग करने वाले आदिवासी समूहों से उन बर्तनों पर शिकार, खेती और नृत्य के चित्र बनवाए गए। फिर उन्हें प्रदर्शनियों के जरिये बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे रेखा ने मिट्‌टी की इन चीजों पर भारत की परम्परागत कहानियों का इस्तेमाल बढ़ाया, जिनका घरों में बहुत स्वागत हुआ और वहां मौजूद क्रॉकरी की जगह ‘इन्फिनिटी पॉटरी’ लेने लगी। तेरह साल पहले मिट्‌टी के परम्परागत बर्तन बनाने वालों को आजीविका पाने में मदद के लिए मुट्‌ठीभर शिल्पकारों के साथ शुरू हुआ काम अब ‘इन्फिनिटी पॉटरी’ ब्रैंड और उद्यम बन गया है, जिसमें सौ से ज्यादा शिल्पकार और उनके परिवार काम करके आजीविका अर्जित कर रहे हैं।



स्टोरी 3 : हममें से कई लोगों ने नितिभा कौल को बिग बॉस-10 शो में सलमान खान से बतियाते देखा होगा। उन्होंने बड़े गर्व से बताया कि शो में आने के लिए उन्होंने दो घंटे पहले ही नई दिल्ली में गूगल जैसी कंपनी में प्रतिष्ठित जॉब छोड़ दिया, क्योंकि इस रियलिटी शो के लिए उन्हें लंबी छुट्‌टी देने से इनकार कर दिया गया था। उनका कहना था कि जहां आप जाना चाहते हैं, वहां पहुंचने के लिए जिंदगी में एेसे जोखिम लेने पड़ते हैं। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि उनका जोखिम काम आया या नहीं, लेकिन जिस एटीट्यूड के साथ उन्होंने अपने आपको कैमरे के सामने प्रस्तुत किया, उसकी सराहना करनी होगी।



फंडा यह है कि अलग-अलग लोगों के लिए सफलता का मतलब अलग-अलग होता है और उस सफलता को पाने का रास्ता भी भिन्न होता है। अत: हर व्यक्ति को अपना अलग रास्ता बनाना होता है।

सफलता के कई रास्ते हैं, अपने रास्ते को पहचानें

मैनेजमेंट फंडा

एन. रघुरामन

raghu@dbcorp.in

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Web Title: स्टोरी1 : वह भोपाल में बड़ी हुई और सेंट थेरेसा
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