Home »Madhya Pradesh »Bhopal »News» 16 अफसरों ने रोक के बाद भी मर्जर की जमीन पर 9 साल में किए 122 नामांतरण

16 अफसरों ने रोक के बाद भी मर्जर की जमीन पर 9 साल में किए 122 नामांतरण

Bhaskar News Network | Mar 20, 2017, 03:20 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
16 अफसरों ने रोक के बाद भी मर्जर की जमीन पर 9 साल में किए 122 नामांतरण
यहां है मर्जर की जमीन

खसरों को सरकारी रिकाॅर्ड में नहीं किया दर्ज

खरीद-फरोख्त पर रोक...जिम्मेदारों ने नहीं दिया ध्यान

राजधानी में मर्जर की जमीन की खरीद-फरोख्त के रोक के बाद भी जिला प्रशासन के 16 अफसरों ने बेधड़क प्रॉपर्टी के नामांतरण किए। यह नामांतरण वर्ष-2002 से 2010 तक किए गए। नामांतरण करने वाले अफसरों में तत्कालीन तहसीलदार श्रीराम तिवारी भी शामिल हैं। इन्होंने ही पहले मर्जर की जमीन की खरीदी-बिक्री का खुलासा किया था। वे इस वक्त स्मार्ट सिटी कंपनी में पदस्थ हैं। इन 9 सालों में रोक के बाद भी 16 अफसरों ने 122 नामांतरण कर दिए थे। यह खुलासा पहली बार कलेक्टर द्वारा कराई सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है। कलेक्टर ने यह रिपोर्ट शासन को कार्रवाई के लिए भेज दी है।

गौरतलब है कि भोपाल के नवाब के साथ भारत सरकार ने 30 अप्रैल 1949 को एक एग्रीमेंट किया था। जिसके तहत नवाब की निजी प्राॅपर्टी को मालिकाना हक दिया गया था। इसमें एक हजार 983 एकड़ 30 डेसीमल जमीन नवाब की निजी संपत्ति में दर्ज है। इस प्रापर्टी पर सरकार का कोई हक नहीं बनता है। एग्रीमेंट में 13 गांव की प्रॅापर्टी को सरकार घोषित किया गया।

सबसे ज्यादा...47 नामांतरण हलालपुरा में दर्ज हैं

जिला प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, मर्जर प्रभावित हलालपुरा में सबसे ज्यादा 47 नामांतरण दर्ज किए गए हैं। इसी तरह बोरबन में 29, बेहटा में 10, लाउखेड़ी में 24 और सेवनियां गौड़ दो से ज्यादा नामांतरण दर्ज किए हैं।

कार्रवाई हुई तो...अफसरों की पेंशन भी रोकी जा सकती है

मर्जर की जमीन पर नामांतरण करने के मामले में यदि शासन दोषी अफसरों पर कार्रवाई का निर्णय लेता है तो रिटायर हो चुके तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की पेंशन रोकने की कार्रवाई की जा सकती है।

दोषी कैसे... कोई आरोप पत्र तो जारी ही नहीं किया

इसके लिए कलेक्टर नामांतरण करने वाले नायाब तहसीलदार और तहसीलदार के खिलाफ शासन को कार्रवाई का प्रस्ताव तो भेज दिया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि किसी भी अफसर को कोई आरोप पत्र नहीं दिया गया है।

यह हैं नायब तहसीलदार- सरोज अग्रवंशी मकसूद अहमद राजेंद्र पवार संध्या चतुर्वेदी ऋषि मौर्य सुनीता लाल शालिनी पाली जमील खान शांताराम कुमारे, रिटायर

ये जिम्मेदार अशोक कैथवास अजय शोभने बीपी श्रीवास्तव बीएस चौधरी तूफान सिंह(सभी रिटायर्ड तहसीलदार) श्रीराम तिवारी (वर्तमान में स्मार्ट सिटी में ) किरण गुप्ता, तहसीलदार।

मर्जर की जमीन पर नामांतरण और परमिशन जारी करना विभिन्न विभागों की एक सामूहिक चूक है। इस मामले में राजस्व अफसरों को दोषी ठहराना गलत है। -नरेंद्र सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्व अधिकारी संघ

मर्जर की जमीन पर हुए नामांतरण की डिटेल रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। इस पर अंतिम निर्णय शासन को लेना है। -निशांत वरवड़े, कलेक्टर

गड़बड़ी की वजह यह भी

मर्जर की जमीन पर लगातार नामांतरण होने की वजह प्रॉपर्टी के खसरों को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करना है। यदि तत्कालीन कलेक्टर मर्जर के खसरों को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कर देते तो शायद कोई भी अफसर नामांतरण नहीं करता। कलेक्टरों ने पिछले 9 साल में इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया। इसलिए यह गड़बड़ी होती रही।

कलेक्टर बोले- अंतिम निर्णय शासन का, अफसरों ने कहा- हम जिम्मेदार नहीं

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App
Web Title: 16 अफसरों ने रोक के बाद भी मर्जर की जमीन पर 9 साल में किए 122 नामांतरण
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।

Stories You May be Interested in

      More From News

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top