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PIX : जब एक डाकू की दरियादिली ने उसे बना दिया 'भगवान'!

dainikbhaskar.com | Dec 05, 2012, 00:01 IST

  • भोपाल।चंबल के डाकू विश्व विख्यात हैं। इनकी कई कहानियां सुनने को मिलती हैं। इन डाकुओं की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, तभी तो आज भी इनके जीवन पर फिल्में बनती रहती हैं। भास्कर नॉलेज पैकेज के अंतर्गत आज हम आपको डाकू मान सिंह के बारे में बता रहे हैं।
    1955 ई. में एनकाउंटर में मारे गए डाकू मान सिंह भले ही प्रशासन की नजर में गुनहगार थे, लेकिन अपने इलाके में वो किसी देवता से कम नहीं थे। तभी तो उनके गांव खेड़ा राठौर में एक मंदिर है, जिसमें गांव वाले सम्मानपूर्वक उनकी पूजा करते हैं।
    आखिर डाकू मान सिंह ने ऐसा क्या किया, जिसके बाद उसे लोग 'भगवान' मान बैठे? तस्वीरों के जरिए जानिए इस डाकू के जीवन की पूरी कहानी...
  • ठाकुर मान सिंह दस्युओं के सरगना थे। चंबल की घाटी को उन्होंने अपना प्रभाव क्षेत्र बनाया। यहीं रहकर वे सारी घटनाओं को अंजाम देते थे। 1939 ई. से 1955 ई. तक उनकी तूती बोलती थी। अगर उनकी जमीन पर कब्जा नहीं हुआ होता तो शायद वे डाकू नहीं बनते, लेकिन साहूकारों द्वारा उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया, जिसके कारण उन्हें यह कठोर कदम उठाना पड़ा।

  • जानकारों के मुताबिक उस समय डाकू बनने की अधिकतर घटनाएं जमीन पर कब्जा किए जाने के कारण ही होती थी। जमीन पर कब्जा होने के बाद मान सिंह ने उसे छुड़ाने का प्रयास भी किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्हें लगा कि अब राजपूतों के वर्चस्व को खतरा है। इसलिए उसे बचाए रखने तथा अपनी जमीन वापस लेने के लिए उन्होंने जुल्म ढाने वालों को सबक सिखाने की ठानी।

  • 17 डाकुओं के साथ मिलकर उन्होंने एक दल बनाया, जिसमें अधिकतर उनके भाई और भतीजे शामिल थे। महिलाओं की इज्जत करना तो उनके दल का सबसे पहला कर्तव्य था। वे उनपर आंच नहीं आने देते थे। तभी तो सिर्फ बलात्कार का आरोप लगते ही उन्होंने गैंग के एक महत्वपूर्ण सदस्य सुल्ताना को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उनके करीबी बताते हैं कि कमजोर लोगों को वे कभी अपना शिकार नहीं बनाते थे।

  • मजबूर और कमजोर लोगों को हक दिलाने के लिए वे खूनी खेल जरूर खेलते थे। उनके नाम लूट की 1112 तथा हत्या के 185 मामले पुलिस में दर्ज थे। लेकिन उन्होंने अपने जीवन में कभी किसी महिला का अपहरण नहीं किया और ना ही किसी बच्चे की हत्या की। यही कारण है कि आज भी उनके इलाके में उन्हें डाकू बोलने की कोई हिम्मत नहीं करता।

  • मध्यप्रदेश के भिंड में उनका एनकाउंटर हुआ। उनके व्यक्तित्व का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि एकबार एस एन सुब्बाराव ने उन्हें मंच से भाषण देते हुए सुना। उनके शब्दों के चयन और भाषण देने की शैली को देख वे अचंभित रह गए। तुरंत उनका ख्याल बदल गया। राव ने कहा कि मान सिंह के बारे में उन्होंने जो कुछ भी अखबार में पढ़ा था, वे मंच पर उसके विपरीत लग रहे थे। उनकी पर्सनैलिटी रॉबिन हुड की तरह लग रही थी। वे गरीबों के मसीहा लग रहे थे।

  • यही कारण है कि उनके जीवन के ऊपर 1971 में डाकू मान सिंह नाम की फिल्म भी बनी, जिसमें दारा सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई। उनका जीवन लोगों को इतना प्रभावित करता है कि उसपर आधारित कई लोकगीत तथा नौटंकियां भी हैं। ऐसा कहा जाता है कि वे अपने लिए तो कुछ रखते ही नहीं थे, जो कुछ भी लूटते, दूसरे लोगों में बांट देते थे।

  • यह अपराध है
    इसमें कोई शक नहीं कि लूटपाट और हत्याएं कानूनन जुर्म है। यह समाज तथा मानवता के विरुद्ध है, लेकिन उनके इलाके में इसे अपराध नहीं माना जाता, तभी तो लोग आज भी उनकी पूजा करने मंदिर जाया जाते हैं।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: daku man singh is hero in chambal gwalior madhya pradesh
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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