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विश्व का एकमात्र ऐसा डॉक्टर जो मौत से पहले लिख देता है डेथ सर्टिफिकेट

राधेश्याम दांगी | Dec 12, 2012, 00:03 IST

  • भोपाल।किसी मरीज की मौत के बाद उसके डेथ सर्टिफिकेट पर बीमारी आदि की पूरी जानकारी के बाद डॉक्टर साइन करते हैं, लेकिन टीबी अस्पताल के डॉ. एन. सिंह को घर जाने की इतनी जल्दी रहती है कि वे खाली डेथ सर्टिफिकेट पर ही अपने साइन कर जाते हैं। डॉक्टर साहब सिर्फ इसी मामले में उदार नहीं हैं, बल्कि मरीजों को एडमिट करने से लेकर उनके इलाज तक की व्यवस्था एडवांस में कर जाते हैं।

    राज्य के सबसे बड़े टीबी अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. एन. सिंह विदिशा में रहते हैं। उन्हें रोजाना विदिशा से भोपाल अप-डाउन करना होता है। शाम ढलने से पहले घर पहुंच जाएं, इसके लिए डॉक्टर साहब ने अनूठी इलाज पद्धति विकसित कर ली है। वे टीबी जैसी गंभीर बीमारी के मरीज को देखे बिना उसका इलाज पर्चे पर उतार देते हैं।

    अपने जूनियर्स को मौखिक और लिखित में निर्देशित भी करते हैं कि मेरी अनुपस्थिति में यदि कोई मरीज आता है, किसी का अस्पताल में निधन होता है, किसी को इलाज की जरूरत हो तो बिना मरीज को देखे लिखे गए पर्चों के अनुसार काम कर लें।

    आखिर ऐसा कैसे कर पाते हैं ये डॉक्टर साहब, क्या है इनकी आनोखी कार्य प्रणाली, काम करने का कैसा है स्टाइल, इसके बावजूद भी इतने सफल क्यों हैं ये जनाब, यह सबकुछ आगे की तस्वीरों के जरिए जानिए...

  • मरीज के भर्ती पर्चो से लेकर इलाज और मृत्यु की घोषणा के प्रमाण-पत्रों पर ऐसे ही हस्ताक्षर कर छोड़ देते हैं। अपने जूनियर्स को मौखिक और लिखित में निर्देशित भी करते हैं कि मेरी अनुपस्थिति में यदि कोई मरीज आता है, किसी का अस्पताल में निधन होता है, किसी को इलाज की जरूरत हो तो बिना मरीज को देखे लिखे गए पर्चो के अनुसार काम कर लें। डॉक्टर साहब की कार्यशैली इतनी पारदर्शी है कि वे राज्यपाल या मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जाने की जानकारी भी पर्चे पर लिख जाते हैं।

  • टीबी का इलाज टेलीफोन पर
    अस्पताल में कम समय दे पाने के कारण खाली पर्चो पर दवाइयां-ट्रीटमेंट लिख देते हैं। किसी कार्यक्रम में जाना हो तो वे बाकायदा लिखित में देते हैं कि मैं राज्यपाल या मुख्यमंत्री या अन्य किसी के कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा हूं, मेरी अनुपस्थिति में किसी मरीज को परेशानी हो या इलाज की आवश्यकता पड़े तो टेलीफोन पर परामर्श ले लें।
  • चौंकाने वाली बात तो यह है कि मरीज को देखे बिना ही उसकी केस शीट भी तैयार कर देते हैं। टीबी जैसी गंभीर बीमारी के लिए वे मरीज को देखने की भी जरूरत नहीं समझते हैं और स्व-विवेक से ट्रीटमेंट लिख देते हैं। उनकी अनुपस्थिति में कोई मरीज आता है तो डॉ. सिंह द्वारा लिखी गई केस शीट के अनुसार नर्सिग स्टाफ ट्रीटमेंट शुरू कर देता है। वहीं, डॉक्टर से सर्टिफाइड ब्लैंक डेथ सíटफिकेट का दुरुपयोग भी हो सकता है। इस आधार पर किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति या असामाजिक तत्व के मृत्यु प्रमाण-पत्र तैयार करवाए जा सकते हैं।

  • ऐसे काम करते हैं डॉ. सिंह
    १. मरीज है नहीं पर भर्ती पर्चा तैयार
    मरीज अस्पताल आया ही नहीं और बिना नाम के मरीज का पर्चा बनाकर नर्सिग स्टाफ को दे दिया।
  • २. बीमारी देखे बिना इलाज शुरू
    मरीज न अस्पताल आया, न ही केस हिस्ट्री देखी गई, लेकिन डॉ. सिंह ने ट्रीटमेंट और दवाइयां लिख दीं।
  • ३. और मौत की घोषणा भी कर दी..
    डॉक्टर सिंह ने ब्लैंक डेथ सर्टिफिकेट पर साइन कर दिए हैं, जिसमें किसी का भी नाम लिख सकते हैं।
  • सुधार कर रहा हूं
    मैं चार-पांच महीने पहले ही यहां आया हूं। आपने बताया है तो मैं दिखवा लेता हूं। पहले तो यहां हालात और बुरे थे, मैं तो इसमें सुधार के लगातार प्रयास कर रहा हूं। यह राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल है मैं चाहता हूं कि इसे और भी अच्छा बनाऊं।
    - डॉ. एआर थेटे, अधीक्षक, टीबी अस्पताल
  • जो करता हूं, लिख देता हूं
    ब्लैंक सर्टिफिकेट पर मैंने साइन नहीं किए, मेरे किसी शुभचिंतक ने कर दिए होंगे। शेष अन्य कागजों में जो मैं करता हूं, लिख देता हूं। मेरे पास अधिक मरीज आते हैं, तो मेरे साथियों को अच्छा नहीं लगता है। हमारे यहां लेग-पुलिंग सिस्टम है तो लोग इसका सहारा लेते हैं।
    डॉ. एन. सिंह, मेडिकल ऑफिसर
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: doctor prepared death certificate before death
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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