Home »Madhya Pradesh »Bhopal »News» Emperor Of Delhi When Defeted By A Wall In Bundelkhand

दिल्ली का बादशाह बुंदेलखंड में जब हार गया एक दीवार से

dainikbhaskar.com | Jan 26, 2013, 00:10 IST

  • भोपाल। बुंदेलखंड की मिट्टी और पानी में संघर्ष हमेशा जीवंत रहा है और कुछ ऐसा रहा है यहां का इतिहास। इसका जीवंत उदाहरण है मुगलकाल में घटी एक प्रमुख घटना, जिसमें बुंदेलखंड में एक किले की दीवार से एक दिल्ली का बादशाह हार गया और उसकी मौत हो गई। यह कोई साधारण या कमजोर बादशाह नहीं था, मुगल शासक हुमायू को गद्दी से हटाकर भारत से भागने के लिए मजबूर कर दिया था और खुद दिल्ली का बादशाह बन बैठा था।

    इस शक्तिशाली बादशाह को कैसे एक दीवार ने हरा दिया, जानने के लिए क्लिक कीजिए...

  • हुमायू के शक्तिशाली सामंत शेरशाह सूरी ने 1537 में बिहार और 1538 में बंगाल में अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर ली। इसके बाद शेरशाह सूरी ने 1539 में हुमायू को चौसा की लड़ाई में हराकर देश से भागने के लिए मजबूर कर दिया था। उसने दिल्ली में 1540 से 1545 तक ही राज्य कर सका क्योंकि बुंदेलखंड जीतने की उसकी चाहत ही उसकी मौत का सबब बन गई थी और एक किले की दीवार ने यह उसका सपना ही नहीं उसकी जान भी ले ली।

  • बाबर ने दिल्ली में मुगलवंश की सत्ता स्थापित की। इसके बाद उनका बेटा हुमायू ने मुगल सल्तनत की कमान संभाली, लेकिन उन्हीं के एक शक्तिशाली सामंत शेरशाह सूरी ने 1537 में बिहार और 1538 में बंगाल में अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर ली। इसके बाद शेरशाह सूरी ने 1539 में हुमायू को चौसा की लड़ाई में हराकर देश से भागने के लिए मजबूर कर दिया था। उसने दिल्ली में 1540 से 1545 तक ही राज्य कर सका क्योंकि बुंदेलखंड जीतने की उसकी चाहत ही उसकी मौत का सबब बन गई थी और एक किले की दीवार ने यह उसका सपना ही नहीं उसकी जान भी ले ली।

  • शेरशाह सूरी ने 1545 में बुंदेलखंड को जीतने के लिए युद्ध अभियान चलाया। उसने यहां सबसे प्राचीन किले कालिंजर पर हमला बोला और वह स्वयं तोपखाना से किले पर गोलाबारी कर रहा था। मजबूत किले पर भारी गोलाबारी हो रही थी, तभी एक चिंगारी किले की दीवार से टकराकर वापस तोपखाने में गिरी। इस चिंगारी से पूरे तोपखाने में आग लग गई और शेरशाह बुरी तरह घायल हो गया और 22 मई1545 को उसकी मौत हो गई।

  • महमदू गजनी भी नहीं जीत सका था इस किले को
    भारत पर अफगानी आक्रमणकर्ता महमूद गजनी ने 1023 में कालिंजर पर हमला किया था, लेकिन उसे वापस लौटना पड़ा। यहां पर चंदेल, रीवा के सोलंकी राजपूत शासकों का शासन रहा है।

    1857 की क्रांति में भी बड़ी रही भूमिका : वर्तमान में उप्र के बांदा जिले में यह किला स्थित है, जो मप्र के पन्ना और छतरपुर जिले की सीमा के बिल्कुल समीप है। 1812 में अंग्रेजों ने बड़े संघर्ष के बाद इस किले पर कब्जा कर लिया। इसके बाद यह अंग्रेजों के कब्जे में और अंतिम समय में यहां पर 1947 तक अंग्रेज गैरिसन यहां पर काबिज रहा था।

  • कई युगों पुराना है कालिंजर का इतिहास :पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शंकर ने यहीं पर अमृत मंथन के बाद निकले हलाहल का सेवन करने के बाद काल पर विजय प्राप्त की थी। यहीं से भगवान शिव का नाम नीलकंठ पड़ गया था। महाभारत काल में भी इसका उल्लेख आता है। इतिहासकारों का कहना है कि 150 से 250 ईसा पूर्व नए तरीके से किले का निर्माण बरगूजर राजा ने कराया था। यह किला अपने आप में अद्धितीय है अपनी विशेषताओं के कारण। इस किले का उल्लेख महाभारतमें

  • 22 मई 1545 को शेरशाह की मौत हो गई।बिहार के सासाराम में बना शेरशाह सूरी का मकबरा

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: emperor of delhi when defeted by a wall in bundelkhand
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।

Stories You May be Interested in

      More From News

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top