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मेरे यहां सेक्स और ड्रग्स का रैकेट चलता है, एफबीआई जांच करे

dainikbhaskar.com | Jan 20, 2013, 00:00 IST

  • भोपाल । अमेरिका के ओरेगन में 64 हजार एकड़ में फैले विशाल और भव्य रजनीशपुरम में आचार्य रजनीश के वैभव की कीर्ति पूरी दुनिया में तेजी से फैली और हजारों लोग यहां रहने लगे साथ। लाखों लोग दुनिया भर से रजनीशपुरम पहुंचने लगे।

    यहां बढ़ती भीड़ ने अमेरिकी सरकार की चिंताएं बढ़ा दीं। यहां शुरुआती दिनों में ही रजनीश ने मौन धारण कर लिया और लंबे दिनों तक चले मौन के बाद एक दिन यह एहसास हुआ कि यहां बहुत से गैरकानूनी काम हो रहे हैं तो उन्होंने खुद ही अमेरिकी अधिकारियों से कहा कि मेरे आश्रम में कई गैर कानूनी काम हुए हैं, जिनकी जांच करने के लिए अधिकारी यहां आएं।

    दैनिक भास्कर डॉट काम उनके पुण्य दिवस (19 जनवरी 1990) पर उनसे संबंधित विशेष सामग्री प्रकाशित कर रहा है। इसी क्रम में जारी है, आगे जानने के लिए क्लिक कीजिए....

  • एक ऐसा संन्यासी, जिसने गड़बड़ियों के सच को भी स्वीकारा और उनकी जांच की भी मांग की और जेल की हवा भी खाई। उन्हें अमेरिका से निर्वासित भी होना पड़ा। आइए, इसी क्रम में जानते हैं, कैसे उन्हें जेल जाना पड़ा और जन्नत की तरह बने कम्यून को अमेरिकी सरकार ने खत्म कर दिया। रजनीशपुरम में पहुंचे ओशो 1 मई 1981 को मौन लंबे समय के लिए मौन में चले गए और आश्रम की जिम्मेदारी अपनी सचिव शीला को सौंप दी।

  • ओरेगन से शुरू हुआ कम्यून दुनिया के कई देशों में फैल गया।1315 दिनों के बाद उन्होंने मौन तोड़ा तो पाया कि आश्रम में कई अवांछित गतिविधियां चल रहीं हैं। आश्रम प्रबंधन के जिम्मेदार लोगों और यहां रह रहे लोगों के बीच काफी मतभेद उभरे। 14 सितंबर को भगवान की सचिव और बहुत से सदस्य कम्यून छोड़कर चले गए। उन्होंने आश्रम में चल रही गैर कानूनी गतिविधियों की जांच के लिए अमेरिका की सबसे बड़ी जांच एजेंसी एफबीआई को आमंत्रित किया। आश्रम में हुई अवांछित गतिविधियों में कई संन्यासियों पर ड्रग्स लेने और संन्यासिनों पर बिना एड्स सुरक्षा उपाय कंडोम का उपयोग किए बिना संसर्ग स्थापित करने जैसे काम भी शामिल थे।

  • ओरेगन में फैले विशाल रजनीशपुरम में करीब 5000 हजार लोग रहते थे। गर्मियों के वार्षिक उत्सव में दुनिया भर से करीब 20 हजार लोग यहां पहुंचते थे।

  • हथकड़ी लगाकर भेजे गए जेल : अमेरिका में वीजा संबंधी गड़बड़ियों के लिए 29 अक्टूबर 1985 में रजनीश को गिरफ्तार कर लिया गया और हथकड़ी लगाकर 12 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। कहा जाता है कि उनकी इस जेल यात्रा के दौरान उन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने स्लो प्वॉइजन दे दिया था, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि उनकी सचिव रहीं विवादास्पद संन्यासिन शीला ने उन्हें धीमा जहर दे दिया था। 12 दिन के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। वीजा में उन्होंने भगवान और अपने निक नेम रजनीश का तो इस्तेमाल किया था, लेकिन मूल नाम चंद्रमोहन जैन का प्रयोग नहीं किया था। उन्होंने टूरिस्ट वीजा स्वास्थ्य संबंधी कारणों से लिया था, जो कुछ निश्चित अवधि के लिए था, लेकिन वह इसके विपरीत एक लंबी अवधि तक अमेरिका में ही रुक गए थे।

  • सजा में अमेरिका से मिला निकाला : नवम्बर मध्य में इमीग्रेशन संबंधी छोटी-छोटी गलतियों के लिए आरोपित किया गया। वकीलों की सलाह पर उन्होंने अमेरिकी कानून के पचड़े से बचने के लिए माफी मांग ली। इसके लिए कोर्ट ने उन पर 40 लाख डॉलर का जुर्माना करते हुए अमेरिका छोडऩे और पांच वर्ष तक वापस नहीं लौटने की सजा सुनाई। उसी दिन अमेरिका से रजनीश एक निजी विमान द्वारा भारत के लिए रवाना हो गए।

  • और अमेरिकी सरकार ने खत्म कर दिया ओरेगन का स्वर्ग : अमेरिका के अटार्नी चार्ल्स टर्नर ने उनकी सेक्रेटरी पर मुकदमा चलाने के सवाल पर कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता यहां है कि भगवान को यहां हटाया जाए, दूसरा यह कि सरकार नहीं चाहती कि भगवान यहां बलिदान हो जाएं। तीसरा यह कि किसी अपराध में उनकी संलिप्तता का प्रमाण नहीं मिला।

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Web Title: FBI do investigate at my ashram the sex and drugs racket
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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