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30 साल पहले जब सुषमा के सपने हो गए थे चूर-चूर, जानिए कुछ अनछुए पहलू

शादाब समी | Dec 10, 2012, 00:11 IST

  • भोपाल। अपने निधन से कुछ अरसा पहले ही शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने सुषमा स्वराज को एनडीए गठबंधन में प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त करार दिया था। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को भी सुषमा में पीएम बनने की पूरी काबिलियत नजर आ रही है।
    अगर 30 साल पहले सेना में महिलाओं की एंट्री प्रतिबंधित नहीं होती तो देश को एक सैन्य अफसर तो मिलता, लेकिन वह बड़े लीडर से वंचित हो जाता। यहां बात लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री सुषमा स्वराज की हो रही है। एक समय सुषमा अंबाला के एसडी कॉलेज की बेस्ट एनसीसी कैडेट हुआ करती थीं।
    साल भर पहले ही उन्होंने अपने जमाने की उस तस्वीर को अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया था। सुषमा आर्मी ज्वॉइन करना चाहती थीं, लेकिन उस समय आर्मी में महिलाओं को अनुमति नहीं मिलने के कारण वे अपने इस सपने को पूरा करने से वंचित रह गईं। इसीलिए एक टिप्पणीकार कहते हैं कि सुषमा आर्मी तो ज्वॉइन नहीं कर पाईं, लेकिन अपने राजनीतिक भाषणों में ‘गोला-बारूद’ का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकती हैं। यही वजह है कि सुषमा के विरोधियों की पहली कोशिश हमेशा उनके प्रहार से खुद को बचाने की होती है, लेकिन सुषमा का यह आक्रामक स्वरूप केवल उनके भाषणों तक ही सीमित है।
    भाजपा की वरिष्ठ नेत्री सुषमा स्वराज की क्या है पसंद, कैसा है स्वभाव, जिंदगी से जुड़ी और भी कुछ रोचक बातें जिनसे आप हो सकते हैं अनजान, तस्वीरों के जरिए जानिए यह सब कुछ...
  • सुषमा स्वराज आमतौर पर मृदुभाषी और हंसमुख हैं। हालांकि उनके कुछ विरोधियों का यह जरूर कहना है कि वे कार्यकर्ताओं से दूरी बनाकर रखती हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी गिनती भाजपा के जमीनी नेताओं में होती है। सुषमा स्वराज ने 1977 में 25 साल की उम्र में हरियाणा की श्रम एवं रोजगार मंत्री बनकर अपने राजनीतिक करियर के सफर में पहली सफलता हासिल की थी। दिसंबर 2009 में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी तक पहुंचना उनके इस सफर का एक स्वर्णिम मुकाम था। हालांकि उनके सफर का यही अंतिम पड़ाव नहीं है। अब तो उनके समर्थक ही नहीं, कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह जैसे विरोधी भी मानते हैं कि सुषमा में प्रधानमंत्री बनने की पूरी काबिलियत है।

  • बेटी के साथ राजनीतिक चर्चा
    सुषमा अपनी इकलौती बेटी बांसुरी का काफी ध्यान रखती हैं। वे अपनी जिम्मेदारियों के चलते कहीं भी हों, लेकिन बांसुरी के बारे में जानकारी लेती रहती हैं। बांसुरी इस समय लॉ की प्रैक्टिस कर रही हैं और इसी को अपना करियर भी बनाना चाहती हैं। सुषमा अपनी बेटी के बारे में कहती हैं कि वे राजनीति में काफी रुचि लेती हैं और हम घर पर अक्सर राजनीतिक विषयों पर चर्चा करते हैं। अब तो यह भी माना जा रहा है कि वे अपनी राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए बांसुरी को तैयार कर रही हैं।
  • सुषमा के पति स्वराज कौशल सीनियर एडवोकेट हैं और सबसे कम उम्र में राज्यपाल बनने का उनका रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ सका है। स्वराज कौशल को वर्ष 1990 में जब मिजोरम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था, उस समय उनकी उम्र महज 37 वर्ष थी। इसी तरह वर्ष 1977 में हरियाणा मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनीं सुषमा स्वराज उस समय देश की सबसे युवा कैबिनेट मिनिस्टर थीं।

  • हर दिन का अलग रंग
    सुषमा स्वराज को हर दिन अलग-अलग रंग के कपड़े पहनने के लिए जाना जाता है। इस बारे में वे कहती हैं कि इसके पीछे कोई धार्मिक धारणा नहीं है, बल्कि यह एक अच्छे वार्डरोब मैनेजमेंट को दर्शाता है। सुषमा सोमवार को सफेद या क्रीम रंग की साड़ी ही पहनती हैं। उनका कहना है कि सोमवार का दिन चंद्रमा का होता है, इसलिए वे इस दिन सफेद या क्रीम रंग की साड़ी पहनती हैं। इसी तरह वे मंगलवार को केसरिया शेड की साड़ी पहनती हैं। बुधवार को हरे, गुरुवार को पीले, शुक्रवार को ग्रे, शनिवार को नीले या काले और रविवार को लाल अथवा भूरे रंग के शेड की साड़ियां पहनती हैं। 
  • खाना : कचौड़ी है पसंद
    सुषमा स्वराज को सादा खाना पसंद है। वे ज्यादा तला-भुना भोजन खाने से बचती हैं। हालांकि उन्हें कचौड़ी बहुत पसंद है और जब भी मौका मिलता है, वे जरूर खाती हैं। इसके अलावा खाने में उन्हें मेथी की भाजी, पराठे और कढ़ी बेहद पसंद है।
  • धर्म : कृष्ण की भक्त
    सुषमा स्वराज बेहद धार्मिक प्रवृत्ति की हैं। वे कृष्ण की अनन्य भक्त हैं। सुषमा ब्रज चौरासी भजन सुनना पसंद करती हैं। वे हर साल वृंदावन और मथुरा दर्शन करने जाती हैं। वे कई प्रकार की धार्मिक मान्यताओं का पालन करती हैं और करवाचौथ का व्रत पूरी शिद्दत के साथ रखती हैं। वे इस व्रत को लेकर काफी गंभीर रहती हैं।
  • वर्किंग : बेहद व्यवस्थित
    सुषमा स्वराज की कार्यशैली बेहद व्यवस्थित है। वे हर काम की तैयारी पहले से करती हैं और उसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास करती हैं। कोई भी काम हो, वे पहले टार्गेट सेट करती हैं और उसे तय समय-सीमा में पूरा करती हैं। उनकी मेमोरी बेहद शार्प है और वे जिससे एक बार मिलती हैं, उसे हमेशा याद रखती हैं। उनके करीबियों का कहना है कि सुषमा समय की बहुत पाबंद हैं। वे समय पर अपने कार्यक्रमों में पहुंचने के अलावा जिसको मिलने का समय देती हैं, उससे भी तय समय पर मिलती ही हैं।
  • साहित्य : कविताएं
    सुषमा स्वराज को कविताएं काफी पसंद हैं। वे अक्सर कविताएं पढ़ती हैं। म्यूजिक की बात हो तो उन्हें क्लासिकल म्यूजिक पसंद है। वे खाली समय में ड्रामा भी देखती हैं। उन्हें फाइन आर्ट्स में भी काफी रुचि है। इकोनॉमी, डिफेंस और इन्फॉर्मेशन उनके पंसदीदा विषय हैं।
  • स्टाइल
    सुषमा कावाकचातुर्य और भाषण में प्रवाह इतना मजबूत है कि आडवाणी जैसे नेता की भी चाह होती है कि वे सुषमा की तरह भाषण दे सकें।
  • लैंग्वेज
    बेल्लारी से चुनाव लड़ते वक्त कन्नड़ में भाषण दिया। केरल और तमिलनाडु के चुनाव के दौरान उन्होंने तमिल और मलयालम में भी भाषण दिए।
  • फॉलोवर
    सुषमा ट्विटर पर सक्रिय हैं और उनके तीन लाख से ज्यादा फॉलोवर हैं, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक गजेट से उन्हें कोई लगाव नहीं है।
  • आइडियल
    अटल बिहारी वाजपेई भले ही सुषमा की राजनीतिक शैली के कायल हों, लेकिन सुषमा अटल और आडवाणी को ही अपना आदर्श मानती हैं।
  • 13 अक्टूबर 1998 को सुषमा स्वराज दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी थीं। उन्हें दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल है।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: sushma swaraj story on her whole life
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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