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कानून का खौफ: न लगे कलंक इसलिए दे दी जान

bhasker news | Dec 19, 2012, 07:30 AM IST

ग्वालियर. हत्या के मामले में झूठा फंसाए जाने की आशंका के चलते एक युवक ने ट्रेन से कटकर जान दे दी। युवक के चाचा के साथ उसके पिता और भाई का झगड़ा हो गया था। इसके बाद अस्पताल में चाचा की मौत हो गई।

युवक को अंदेशा था कि इस मामले में उसे और उसके परिजन को झूठा फंसाया जा सकता है। इससे डरकर उसने ट्रेन से कटकर जान दे दी। युवक की जेब से मिले सुसाइड नोट में इसी बात का उल्लेख्र है, हालांकि परिजन हत्या की आशंका व्यक्त कर रहे हैं।

परिजन ने इस आशंका के चलते सुबह रेलवे ट्रैक के बगल से लाश को नहीं उठने दिया और शाम को मुरार थाने के सामने ट्रैफिक जाम किया और दुकानें भी बंद करवाईं।


घासमंडी, मुरार में रहने वाला हितेश (23) पुत्र दीनानाथ कुशवाह सोमवार की शाम को घर से निकला था। इसके बाद वह घर नहीं लौटा। रात में परिजनों ने उसे फोन लगाकर घर आने के बारे में भी पूछा, लेकिन उसने कोई संतुष्टि कारक जवाब नहीं दिया।

रात लगभग तीन बजे हितेश की लाश महाराजपुरा थाना क्षेत्र स्थित यादव धर्मकांटे के नजदीक रेलवे ट्रैक पर पुलिस को मिली। जेब से मिले सुसाइड नोट के आधार पर उसकी पहचान हो गई।

सुसाइड नोट में हितेश के नाम-पते के अलावा लिखा था कि उसके चाचा वृंदावन से छोटे भाई लल्ला और पिता दीनानाथ का झगड़ा हो गया था। झगड़े में मारपीट भी हुई थी। इस मारपीट के चार दिन बाद चाचा सीढिय़ों से गिर गए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

चाचा की ओर से हितेश, उसके पिता दीनानाथ और छोटे भाई लल्ला के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज करा दिया। हितेश को अंदेशा था कि पुलिस इस मामले में हत्या का मामला दर्ज कर सकती है। सुबह लगभग चार बजे पुलिस ने हितेश के परिजनों को घटना की सूचना दे दी।

सूचना मिलते ही हितेश के परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए। सुबह परिजनों ने रेलवे ट्रैक के बगल से लाश रखकर हंगामा शुरू कर दिया। इनका आरोप था कि वृंदावन के बेटे सतीश ने राजीनामा के बहाने उसे सोमवार रात को बुलाया था, उसने ही हत्या की है।

हंगामे की सूचना मिलते ही मंगलवार सुबह 11 बजे सीएसपी महाराजपुरा डीवीएस भदौरिया मौके पर पहुंच गए। उन्होंने परिजन को समझाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अगर हत्या की बात सामने आती है तो मामला दर्ज कर लिया जाएगा। इसके बाद परिजन पोस्टमार्टम कराने के लिए जेएएच ले गए।

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Web Title: Fear of the law: not given the stigma so dear
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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