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नाम लिखना तक नहीं सिखाया और मारमार कर हाथ सूजा दिए!

राहुल दुबे | Feb 24, 2013, 02:02 IST

  • इंदौर।वक्त- दोपहर 12.35 बजे
    जगह- पीपल्याकुमार गांव में लड़कियों का आवासीय छात्रावास।
    होस्टल के क्लास रूम में अलग-अलग कक्षाओं की बच्चियां कतारबद्ध बैठी थीं। कुछ लड़कियां सुबह 9 बजे से खड़ी थीं। होस्टल प्रभारी शगुफ्ता शेख नदारद थीं। मौके पर पहुंची भास्कर टीम को बच्चियों ने बताया वे लसूड़िया गईं हैं। पूछा- आप ऐसे क्यों खड़ी हो? वे बोलीं- मेडम ने सजा दी है, बोलकर गई हैं, जब तक वापस न आऊं खड़ी रहना। किसी ने बता दिया कि बैठ गई थी तो खैर नहीं।
    छात्राएं सैकड़ों किमी दूर से माता-पिता को छोड़ यहां पढ़ाई करने आई हैं। शिक्षा विभाग के आवासीय ब्रिज कोर्स के तहत यह छात्रावास चार महीने पहले शुरू हुआ है। गरीब आदिवासी परिवारों की बच्चियों को यहां लाया गया है। बच्चियां कहती हैं- कोई दिन नहीं जाता जब बेंत से पिटाई नहीं होती। पढ़ाई कम ही होती है।
    प्रभारी ने बच्चियों को झूठा बताया
    दूसरी तरफ होस्टल प्रभारी शगुफ्ता शेख इन आरोपों को नकारती हैं। उनका कहना है कि बच्चियां झूठ बोल रही हैं। बैठे-बैठे पैर दर्द होता है तो खुद ही खड़ी हो जाती हैं। मैं तो उन्हें बड़े प्यार से रखती हूं। शिक्षामंत्री से परिचित होने की धौंस कभी नहीं दी।
    आवासीय छात्रावास में पढ़ रही लड़कियों की दयनीय स्थिति को बयां करती तस्वीरों के साथ पढ़े पूरा मामला
  • नाम तक नहीं लिख पाती

    यहां पढ़ाई की हालत यह है कि पांचवीं तक की कई छात्राओं को अपना नाम तक ठीक से लिखना नहीं आता।

    ओंकारेश्वर से आई रोशनी, आठ मील गांव की पूजा, रीना कहती हैं हमें पढ़ना है, लेकिन क्लास ही नहीं लगती।

  • कोई पढ़ाने नहीं आता
    नेहा सरिया, निकिता सरिया (मक्सी की रहने वाली), सोनू मंसारे (सनावद) को होस्टल प्रभारी शगुफ्ता शेख खड़ा रहने की सजा देकर गई थीं।
    तीनों कहती हैं हम यहां पढ़ाई करने आए हैं, केवल खाना खाने नहीं। हमें कोई पढ़ाने नहीं आता। छोटी-छोटी गलतियों पर मेडम डंडियों से पीटती है। बच्चियां कहती हैं मेडम रोज शाम को घर चली जाती हैं। होस्टल प्रभारी होने के नाते उन्हें यहीं रुकना चाहिए। बच्चियां यहां भोजन बनाने वाली एक महिला के भरोसे बच्चियां रहती हैं।
  • ऐसी बेंत मारी कि हाथ सूज गए
    सात साल की आरती को कॉपी गुम होने पर हाथों में बेंत से ऐसा मारा कि दोनों हाथ में छाले हो गए। एक बालिका को पीठ पर बेंत से पीटा तो लाल हो गई।
    शिवानी कहती है कि होमवर्क या कॉपी अपडेट न रहने पर बाल पकड़कर के चांटे मारे जाते हैं।
  • शिक्षामंत्री की परिचित होने की धौंस
    उप सरपंच अंबाराम चौधरी, सरपंच प्रतिनिधि सावन पटेल के मुताबिक बच्चियों की पिटाई और पढ़ाई नहीं होने की बात मेडम से की तो हमें बोलीं- शिक्षामंत्री अर्चना चिटनीस से सीधे जुड़ी हुई हूं। मेरा कोई बाल बांका नहीं कर सकता।
  • होस्टल प्रभारी शगुफ्ता शेख से सीधी बात


    प्रश्न- आप बच्चियों को खड़ाकर कहां चली गई।
    उत्तर- बच्चियां झूठ बोल रही हैं। बैठे-बैठे पैर दर्द होते हैं खुद ही खड़ी हो जाती हैं। आज एक सरकारी कार्यक्रम था, इसलिए लसूड़िया चली गई थी।
    प्रश्न-बच्चियों की पिटाई होती है।
    उत्तर-शरारत करती हैं तो डांट-डपट होती है। पिटाई नहीं होती।
    प्रश्न-बच्चियां कहती हैं क्लास नहीं लगती?
    उत्तर-पढ़ाई होती है, बहुत प्यार से बच्चियों को रखती हूं। सब अच्छा पढ़ रही हैं।
    प्रश्न- आप होस्टल में रुकने के बजाए घर चली जाती हैं?
    उत्तर- होस्टल में एक दाई और भोजन बनाने वाली है, रात को वह दोनों रुकती है। मैं घर आ जाती हूं। अभी तक कोई घटना नहीं हुई।
    प्रश्न-आप गांव वालों को शिक्षामंत्री की धौंस देती हैं?
    उत्तर-मैंने कभी ऐसा नहीं कहा। गांव वाले गलत बोल रहे हैं।

  • बयान लेकर कार्रवाई करेंगे
    छात्राओं, ग्राम पंचायत पदाधिकारियों के बयान लेकर कार्रवाई की जाएगी। मेडम अगर होस्टल में नहीं रहती हैं तो ड्यूटी की शर्तो का उल्लंघन भी कर रही हैं।
    संजय गोयल, जिला शिक्षा अधिकारी
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Swollen hands and slap the black off were taught not to enroll!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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