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तीन साल तक सुनवाई, नहीं बनी सड़क तो एनजीटी को बंद करानी पड़ी खदानें

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:20 AM IST

बिलौआ से रोजाना करीब1500 डंपर गिट्टी होती है सप्लाई, अब हो जाएगी महंगी

प्रशासनिक रिपोर्टर | ग्वालियर

ग्वालियर-डबरा फोरलेन हाईवे से घोंगा गांव (बिलौआ) तक 19.5 किमी लंबी सड़क का निर्माण न होने से नाराज एनजीटी ने सख्ती दिखाते हुए आखिरकार बिलौआ आैर उसके आसपास चल रही 77 खदानों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। आदेश के मुताबिक ये खदानें सड़क का निर्माण होने तक बंद रहेंगी। सड़क निर्माण को लेकर बरती गई लापरवाही को लेकर एनजीटी ने बीती जुलाई में ही नाराजगी जताई थी कि तीन साल से चल रही सुनवाई के बाबजूद सड़क नहीं बन सकी। अब या तो सड़क बनवाएं या फिर खदानें बंद कर दें। अंतत: उसने खदानें बंद करने का आदेश सुना दिया।

दरअसल, इस सड़क का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाय) के तहत होना है। लेकिन इस योजना के तहत बनने वाली सड़कों की भार क्षमता 20 टन तक ही होती है। लेकिन इस सड़क पर गिट्टी आैर पत्थर से भरे 35-35 टन वाले ट्रक-डंपर निकलते हैं। ऐसे में सड़क महीने- दो महीने में ही उखड़ जाती है। इस स्थिति के चलते प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े अफसराें ने इस सड़क का निर्माण कराने से इनकार कर दिया। बीच में खदानों के संचालकों ने आपसी सहयोग से सड़क बनवाने का प्लान बनाया, जो परवान नहीं चढ़ सका।

बढ़ जाएंगे गिट्टी के दाम

एनजीटी के आदेश से बिलौआ आैर उसके आसपास की खदानों के बंद होने से गिट्टी के दामों में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होगी। यहां की खदानों से निकलने वाली गिट्टी न केवल ग्वालियर-चंबल संभाग में बल्कि राजस्थान आैर उत्तरप्रदेश के कई क्षेत्रों तक जाती है। अकेले बिलौआ से रोजाना करीब 1500 डंपर गिट्टी सप्लाई होती है। बिलौआ की खदानें बंद होते ही शहर के आसपास नयागांव, शंकरपुर, मऊ-जमाहर, सूखा पठा, बेरजा आदि की खदानों पर प्रेशर बढ़ेगा। गिट्टी महंगी होने से निर्माण कार्यों की लागत बढ़ेगी आैर उसका बोझ उपभोक्ताआें पर पड़ेगा। शंकरपुर आैर मऊ-जमाहर की खदानों की गिट्टी, बिलौआ की अपेक्षा 3 से 5 रुपए प्रति फीट महंगी होती है।

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Web Title: तीन साल तक सुनवाई, नहीं बनी सड़क तो एनजीटी को बंद करानी पड़ी खदानें
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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