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धान की फसल का कराया था बीमा खेत में बोई उड़द, नहीं मिलेगा क्लेम

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:25 AM IST

धान की फसल का कराया था बीमा खेत में बोई उड़द, नहीं मिलेगा क्लेम
2 हजार किसानों की उड़द हुई खराब, 47 करोड़ का नहीं मिलेगा बीमा

भास्कर संवाददाता | दतिया

अधिक ऋण के लालच में जिले के लगभग दो हजार किसानों ने 47 करोड़ रुपए गंवा दिए। उनके खेत में धान की फसल का बीमा बैंकों ने कर दिया। लेकिन किसानों ने उड़द की पैदावार कर ली। खराब मौसम के कारण उड़द की फसल खराब हो गई। अब किसान फसल बीमा का लाभ लेने के लिए कृषि विभाग के चक्कर लगा रहे है। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही हैं। जिले में लगभग ऐसे दो हजार से अधिक किसान हैं। सेंवढ़ा अनुभाग में ऐसे किसानों की संख्या अधिक है।

केसीसी किसी फसल का और खेत में पैदावार अन्य फसल इस बार किसानों के नुकसानदायी हो गया। शासन ने प्राकृतिक आपदा पर मुआवजा राशि न देने की घोषणा करते हुए किसानों से फसल बीमा कराने के लिए कहा था। किसानों ने बीमा कराया भी।लेकिन उन्हें बीमा का लाभ नहीं मिल रहा। जिले के लगभग दो हजार किसान ऐसे हैं जिन्होंने धान का बीमा कराया, लेकिन पैदावार उड़द की। ऐसे किसानों को 10 हजार हेक्टेयर उड़द की फसल का बीमा लाभ नहीं मिल पा रहा। उड़द की लागत शासन 47400 रुपए मानता है। इस हिसाब से किसानों ने लगभग 47 करोड़ रुपए गंवा दिए। अब किसान क्लेम के लिए भटक रहे हैं।

उड़द की खराब फसल देखते ग्रामीण।

दूसरी फसल की सूचना नहीं देते किसान, इसलिए संकट

आमतौर पर किसान एक ही फसल के नाम पर केसीसी बनवा लेता है। अधिक लाभ के चक्कर में खेत में एक से अधिक फसलों की पैदावार करता है। मसलन किसी के पास 20 बीघा जमीन है तो वह कुछ हिस्से में धान की तो कुछ हिस्से में अन्य फसल की बोवनी कर देता है। लेकिन इसकी सूचना बैंक को नहीं देता।

ज्यादा ऋण के चक्कर में किसानों ने बनवाई धान की केसीसी

बैंक फसल की लागत के हिसाब से केसीसी बनाते हैं। बैंक धान की फसल के लिए किसान को 50300 रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से केसीसी पर ऋण देते हैं। जबकि उड़द की फसल पर यह राशि 47400 रुपए होती है। प्रति हेक्टेयर लगभग 3000 रुपए अधिक ऋण कम ब्याज पर मिलने के चक्कर में किसान धान की फसल बताते हुए केसीसी से ऋण ले लेते हैं। बाद में अन्य फसलों की पैदावार कर लेते हैं। किसानों को एक माह का समय भी दिया जाता है कि अगर उन्होंने फसल बदल दी है तो वह फसल का नाम परिवर्तन करा सकते हैं। लेकिन किसानों ने इस भी ध्यान नहीं दिया।

कोई नहीं सुन रहा

कबैंक ने धान के केसीसी पर प्रीमियम राशि काट ली थी। हमने 15 बीघा में उड़द की फसल की। फसल खराब हुई तो पटवारी को कई बार सूचना दी। लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की। अशोक शर्मा, किसान देभई

धान का बीमा कर दिया

क7 बीघा में उड़द की फसल की बोवनी की थी। शेष में धान की। बैंक ने पूरे रकबे का धान का बीमा कर दिया। उड़द की फसल खराब हो गई। अब बैंक बीमा का लाभ नहीं दे रहा है। कैलाश शर्मा, ग्राम पोसरा

नहीं मिलेगा क्लेम

किसान अधिक ऋण राशि के चक्कर में धान की फसल लिखा देते हैं।ऐसे किसानों को बीमा लाभ नहीं मिलेगा। विभु रंजनकर ,लीड बैंक मैनेजर

जिस फसल का बीमा, उसी का मिलेगा लाभ

किसानों ने जिस फसल का बीमा कराया है। उसी फसल का बीमा लाभ मिलेगा। बगैर बोवनी प्रमाण पत्र के अगर बैंक ने बीमा कर दिया तो उसकी भी गलती है। आरके गणेशे, उप संचालक कृषि ।

फैक्ट फाइल

38143 ने कराया था फसल बीमा

56897हेक्टेयर रकबा का हुआ बीमा

23000केसीसी धारी किसानों का बैंक ने किया था सीधा बीमा

24500किसानों को मिलेगा बीमा लाभ

04करोड़ रुपए प्रीमियम किसानों ने किया था जमा

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Web Title: धान की फसल का कराया था बीमा खेत में बोई उड़द, नहीं मिलेगा क्लेम
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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