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पापों को नष्ट करने मन की एकाग्रता जरूरी : मुनिश्री

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:35 IST

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गंजबासौदा| पापों को जलाने में मन की एकाग्रता जरूरी है। चंचल मन से कुछ नहीं किया जा सकता। मंत्र की सिद्धि या लाभ उठाने कर्म की नजरों के लिए मन को बांधना जरूरी है। महावीर विहार में चल रहे प्रवचनों के दौरान मुनिश्री कुन्थु सागर महाराज ने यह बात कही।

जिस प्रकार नदी का पानी रोक कर बांध बनाया जाता है तो उस पानी से कई फायदे उठाए जाते हैं। मुनिश्री ने कहा कि मोह मनुष्य को तनावग्रस्त रखता है क्योंकि आज जमाना दिखावट, सजावट, मिलावट और तनावट का है। इससे ही गिरावट आ रही है। अपनी आत्मा को छोड़ धन संपत्ति संबंधी परिजनों से प्रभावित होना मोह है। कलाकार वह नहीं जो चित्र में भगवान का रूप बनाता है। कलाकार वह है जो मन को भगवान के अनुरूप बनाता है।

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Web Title: पापों को नष्ट करने मन की एकाग्रता जरूरी : मुनिश्री
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