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...तो उरी के कैंप में 19 सैनिक शहीद नहीं होते

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:35 AM IST

...तो उरी के कैंप में 19 सैनिक शहीद नहीं होते
अगर सियासी रंग नहीं होता संविधान की वर्दी पर आंतक की घटना का भी कोई रंग नहीं होता। यदि अफजल को सही वक्त पर फांसी दी होती तो मुंबई में आंकती हमला नहीं होता। यदि एक सिर के बदले हमने दस सिर काटे होते तो उरी में 19 सैनिक शहीद नहीं होते।

वीर रस से सरोबार ये पंक्तियां भीलवाड़ा के वीररस के कवि योगेंद्र शर्मा ने ने पढ़ी। वे पोरवाल नवयुवक मंडल व गरोठ युवा मंच के तत्वावधान में आयोजित कवि सम्मेलन में काव्यपाठ कर रहे थे। आगाज इंदौर की कवयित्री डॉ. भुवन मोहनी ने सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सुबह 4 बजे तक चले कवि सम्मेलन में फरीदाबाद के कवि दिनेश रघुवंशी ने मां पर रचना सुनाई। दिल्ली के कवि सरदार मंजीतसिंह ने हास्य रस की फुलझड़ियां छोड़कर गुदगुदाया। डॉ. भुवन मोहनी ने ‘यूं आकर रुकी नजरें मेरे चेहरे की लाली पर कहीं पंछ़ी यहां पर बैठे एक डाली पर...’ जैसे शृंगार से सराबोर रचना सुनाकर कर खूब दाद बटोरी। नई दिल्ली के वैभव वंदन ने राममंदिर के मुद्दे को कविताओं के माध्यम से रखा। धौलपुर के रामबाबू सिकरवार ने राजनीति पर हास्य प्रधान फिल्मी पैरोडी पेश की। तो ओरछ़ा के सुमित मिश्रा ने देशभक्ति का जज्बा जगाया। संस्था संयोजक जगदीश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया।

कविता सुनते काव्यप्रेमी। इनसेट- कविता पाठ करते कवि योगेंद्र शर्मा।

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Web Title: ...तो उरी के कैंप में 19 सैनिक शहीद नहीं होते
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