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महिला गार्ड बोलीं: साहब कैडर बदल दो या फिर पुलिस सुरक्षा दो

Bhaskar News Network | Apr 21, 2017, 05:00 IST

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महिला गार्ड बोलीं: साहब कैडर बदल दो या फिर पुलिस सुरक्षा दो
एक तरफ रेलवे महिलाओं को भी ट्रेनों का संचालन सौंपने की तैयारी तेजी से कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ रेलवे में काम कर रही महिलाएं गार्ड बोगी में अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। आलम ये हो गया महिलाएं खुद को महफूज करने के लिए अपना कैडर तक बदलने को राजी हैं। इसके लिए महिलाओं ने डीआरएम को आवेदन भी दिए हैं। खुद रेलवे के अधिकारी भी अब इन परिस्थितियों में पशोपेश में हैं महिलाओं की भागीदारी तय करने वाली इस फील्ड से महिलाओं को कैसे अलग किया जाए या फिर इनकी सुरक्षा कैसे तय की जाए। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर यह सरगर्मी अचानक तब बढ़ गई, जब महिला गार्ड ने डीआरएम को पत्र देकर कहा नौकरी करने के लिए मुझे महिला आरपीएफ के जरिए सुरक्षा दी जाए।

अब अचानक क्यों मांगी सुरक्षा

करीब 10 साल पहले नागपुर मंडल में 4 महिलाओं को अनुकंपा नियुक्ति गार्ड कैडर में दी थी। एक माह पहले इन महिलाओं को रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक परिचालन ने अपने मूल पद गार्ड का काम करते हुए गुड्स ट्रेन के संचालन का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश के पालन में नागपुर की 2 महिला गार्ड ने नियमित रूप से अपनी सेवाएं भी देना शुरू कर दिया है, लेकिन 2 महिलाओं ने अभी अपनी सेवाएं देना शुरू नहीं किया है। इनमें जंक्शन की एक महिला गार्ड अनीता झा ने काम शुरू करने से पहले खुद की सुरक्षा के लिए पुलिस बल मांगा है। महिला ने स्टेशन प्रबंधक एसके वर्मा को पत्र देकर कहा गार्ड के डिब्बे में वे अपने आपको बेहद असुरक्षित महसूस कर रही हैं। इसीलिए सुरक्षा के लिहाज से उन्हें महिला आरपीएफ की सुरक्षा ड्यूटी टाइम में दी जाए।

पैसेंजर ट्रेन हो सकती है विकल्प

मेल एक्सप्रेस गार्ड आरके वर्मा के अनुसार इन महिलाओं को गुड्स गार्ड से हटाकर कम दूरी की पैसेंजर ट्रेन की ड्यूटी पर लगाया जा सकता है। काफी हद तक ऐसी ट्रेनों में इनकी सुरक्षा भी तय हो जाएगी। रेलवे के काम भी प्रभावित नहीं होंगे।

आवेदन पर कार्रवाई हो रही है

महिला गार्ड ने आवेदन दिया है। महिला की दिक्कत से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया है। इस पर मंथन शुरू है। आरपी झा, स्टेशन प्रबंधक

एक्सपर्ट व्यू

रेलवे गुड्स गार्ड आरके मिश्रा एवं वरूण कुमार ने बताया एक गुड्स ट्रेन की औसत लंबाई करीब 650 मीटर होती है। एक ट्रेन में 59 बोगी तथा एक गार्ड ब्रेकवान होता है। इसमें लाइट, पानी, शौच जैसी सुविधाएं भी नहीं होती हैं। गार्ड बोगी में खिड़की दरवाजे भी ठीक से काम नहीं कर रहे होते हैं। गुड्स ट्रेन जंगल में बने स्टेशन पर डेढ़ से दो घंटे तक भी रुकती हैं। इन हालातों में अकेले गार्ड के पास सुरक्षा के नाम पर कोई साधन नहीं उपलब्ध होता है।

ये हो चुकी हैं वारदातें

गुड्स ट्रेन के गार्ड प्रेमप्रकाश को नवंबर 2016 में घोड़ाडोंगरी से सारनी के बीच कोयला चुराने के काम में जुटे लोगों ने पथराव कर घायल किया था। गोधनी से नागपुर जाते समय करीब दो साल पहले गुड्स गार्ड सीएल सुरे के साथ लूट की वारदात भी हो चुकी है।

आमला. गुड्स ट्रेन की महिला गार्ड को नौकरी करने में आ रही परेशानी।

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Web Title: महिला गार्ड बोलीं: साहब कैडर बदल दो या फिर पुलिस सुरक्षा दो
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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