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'नेताजी ' की याद में बनेगा त्रिपुरी स्मारक, यहां सन् 1939 में हुआ था अधिवेशन

Bhaskar News | Feb 26, 2017, 09:22 IST

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'नेताजी ' की याद में बनेगा त्रिपुरी स्मारक, यहां सन् 1939 में हुआ था अधिवेशन
जबलपुर.शहर में आज भी वो दिल धड़क रहे हैं जिनके जेहन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का वो भाषण जिंदा हैं जो उन्होंने यहां तिलवाराघाट में आयोजित तारपुरी अधिवेशन के दौरान दिया था। तारपुरी अधिवेशन 29 जनवरी 1939 को हुआ था। अधिवेशन के दौरान नेताजी की बुलंद आवाज के भाषण से आजादी की अलख तेज हुई थी। जहां अधिवेशन हुआ था अब नगर निगम वहां नेताजी की याद में जेंट्री गेट सहित तारपुरी स्मारक बनाने जा रहा है।
- जहां नेताजी की वीर गाथाओं को ताजा करता लाइट एण्ड साउण्ड शो होगा। म्यूजियम सहित आजादी दिलाने में उनके याेगदान से जुड़े चित्रों की प्रदर्शनी सहित कई जानकारियां मौजूद होगी।
- इसके लिए नगर निगम डीपीआर तैयार कर रहा है। जो अब अपनी ड्राफ पोजीशन में पहुंच गया है। संभवत: मार्च में टेंडर जारी कर मई की शुरूआत में स्मारक बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
- सारा खर्च स्मार्ट सिटी के फंड से किया जाएगा। ये स्थान एक बेहतरीन टूरिज्म स्पॉट के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां गांधी स्मारक भी है।
- उस स्मारक के साथ नगर निगम कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा। बल्कि यहीं पर मौजूद स्थान में नेताजी की याद में एक नया स्मारक बनाया जाएगा। जिसका नाम तारपुरी स्मारक रखा जाएगा।
नेताजी का नाम देता है नई ऊर्जा
- | नेताजी सुभाषचंद्र बोस आजाद हिंद फौज के नायक थे। जिनकी देश को आजादी दिलानी वाली गाथाएं और उनका नाम आज भी लोगों के शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता हैं, खून गर्म होकर उबाल मारने लगता है।
- नेताजी का जबलपुर से गहरा नाता रहा है। उन्होंने तिलवाराघाट में कांग्रेस के अधिवेशन में एेतिहासिक जीत दर्ज कर कांग्रेस का अध्यक्ष चुने जाने के बाद स्वराज्य की आवाज बुलंद की थी।
- वे जब भी यहां आए नर्मदा के तट तिलवाराघाट जरूर जाते थे। यही कारण है कि यहां तारपुरी स्मारक बनाने का निर्णय नगर निगम ने लिया है।
बैरक को बना दिया संग्रहालय
- नेताजी की फौज जब अंग्रेजों के लिए मुसीबत बनने लगी, तब अंग्रेजों ने पहली बार सुभाष चंद्र बोस को गिरफ्तार कर 22 दिसंबर 1931 से लेकर 16 जुलाई 1932 तक इसी जेल में बंद कर दिया।
- इसके बाद उन्हें रिहा कर मुंबई भेज दिया गया था, लेकिन जैसे-जैसे देश में आजादी की लड़ाई जोर पकड़ने लगी, अंग्रेजों ने आजादी के नायकों को जेल में बंद करना शुरू कर दिया था।
- इसी दौरान सुभाष चंद्र बोस को दूसरी बार गिरफ्तार कर फिर से जबलपुर की इसी जेल में रखा गया था। इस कारण आज़ादी के बाद जबलपुर सेंट्रल जेल का नाम 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल' रखा गया।
- खास बात यह है कि जेल में बंद रहने के दौरान सुभाष चंद्र बोस जिस पट्टी पर सोते थे, उस पर सभी कैदी हर सुबह फूल चढ़ाकर दिन की शुरूआत करते हैं।
- देश की आजादी के बाद जेल प्रशासन ने नेताजी से जुड़ी तमाम चीजों को उनके बैरक में संग्रहालय के रूप में सहेज कर रखा है।
कैसे बना गांधी स्मारक
- इतिहास में तिलवारा घाट का विशेष महत्व है। यह नर्मदा नदी के किनारे पर स्थित है। यहां महात्मा गांधी की राख को विसर्जित किया गया था।
- श्रद्धांजलि स्वरूप यहां पर गांधी स्मारक बना दिया गया है। आज भी लोग गांधी स्मारक जाते हैं। जब यहां तारपुरी स्मारक बन जाएगा तो िनश्चिततौर पर आगंतुकों को एक साथ दो स्मारक देखने को मिल जाएंगे।

ये होगा फायदा
- युवा पीढ़ी नेताजी की गाथाओं के बारे में जान पाएगी।
- देश को मुश्किल से मिली आजादी का महत्व समझेगी।
- पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा।
- अभी लोग तिलवाराघाट, शनि मंदिर आकर वापस लौट जाते हैं।
- पर्यटकों को लुभाने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
तिलवाराघाट में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की याद में तारपुरी स्मारक व जेंट्री गेट बनाने का निर्णय लिया गया हैं। जहां म्यूजियम बनाने सहित लाइट एण्ड साउण्ड शो होगा, जिस पर जल्द से जल्द से काम शुरू हो जाएगा। वेदप्रकाश, आयुक्त नगर निगम
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Web Title: memorial to be made in memory of Netaji Subhash Chandra Bose
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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