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हजारों आईडी में चढ़ा रखे कई फर्जी नाम, इसलिए बेखौफ होकर कर रहे हैं राशन आवंटन में गड़बड़ी

Bhaskar News Network | Mar 21, 2017, 04:55 IST

शहर की कुल आबादी के 61 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को सस्ता अनाज मुहैया कराए जाने के मामले में नया ही खुलासा हुआ है। दरअसल यह पूरी गड़बड़ी नई पात्रता पर्ची व्यवस्था लागू किए जाने के बाद की गई। 2013 के बाद से शहर के ऐसे कई परिवारों की पात्रता पर्ची में वास्तविक से ज्यादा लोगों को जोड़ दिया गया है। जो लोग परिवार के सदस्य हैं ही नहीं उन्हें पात्रता पर्ची में जोड़कर ज्यादा लोगों का राशन आवंटित कर दिया गया। ऐसे परिवारों की संख्या हजारों में है। जिन लोगों की पात्रता पर्ची में दूसरे लोग जोड़ दिए, उन्हें आधार लिंक कराने के दौरान इस बात का पता चल रहा है।

शहर की वर्तमान आबादी 2 लाख 91 हजार के लगभग है। आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड की माने तो इनमें से 2 लाख 07 हजार 370 लोग एक रुपया किलो गेहूं, चावल पर आश्रित हैं। हकीकत में इतनी बड़ी संख्या के मान से राशन जारी तो हो रहा है लेकिन लोगों तक नहीं पहुंच रहा। पात्रता पर्ची और समग्र पोर्टल में प्रति परिवार संख्या बढ़ाकर राशन आवंटन में गड़बड़ी का खेल रचा गया।

तकनीक का तोड़ भी ऐसे निकाला- कलेक्टर बी. चंद्रशेखर ने राशनकार्ड व्यवस्था को आधार से लिंक करने के निर्देश दिए। जिन लोगों की पात्रता पर्ची आधार से लिंक होना दर्शाया है वे यदि राशन लेने पहुंचते हैं तो मशीन थंब ही स्वीकार नहीं करती। दरअसल, वे वास्तविक हितग्राही तो हैं लेकिन समग्र पोर्टल पर उनके नाम के अागे आईडी किसी और सदस्य की दर्ज है। अब आपूर्ति विभाग ने नया रास्ता निकाला है। नई व्यवस्था के तहत जिन लोगों के थंब मैच नहीं हो रहे हैं, उनसे केवल आधार कार्ड की कॉपी ली जा रही है और राशन जारी किया जा रहा है, यानी व्यवस्था बायोमेट्रिक से वापस कागजी प्रक्रिया पर लाकर खड़ी कर दी गई है।

498 भक्तन की बावड़ी निवासी मोहम्मद रफीक के परिवार में 8 सदस्य हैं। 6 फरवरी 2013 से उनके समग्र पोर्टल पर परिवार के रूप में 10 लाेग दर्ज थे। दो अतिरिक्त व्यक्तियों के नाम पात्रता पर्ची भी जुड़े हुए हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने 8 सदस्यों की जानकारी अपडेट कराई, यानी 4 साल से उनके नाम से अतिरिक्त दो लोगों का राशन जारी हो रहा था।

583 इंद्रलोक नगर में रहने वाले भेरूलाल वर्मा के परिवार में 3 सदस्य हैं। समग्र पोर्टल पर अंग्रेजी में उनका नाम दर्ज है लेकिन सामने हिंदी में किसी राजेश मकवाना, रेखा मकवाना, दीपक मकवाना का नाम दर्ज है। वे इन्हें जानते भी नहीं। भेरूलाल को पात्रता पर्ची के आधार पर 3 लोगों का राशन जारी होता रहा। अब आधार से लिंक कराने की नौबत आई तो पता चला कि उनका अंगूठे की प्रिंट ही मशीन नहीं ले रही है, दरअसल समग्र पर आधार तो राजेश मकवाना का ही दर्ज है।

344 कस्तूरबा नगर निवासी साबिर हुसैन का नाम समग्र पोर्टल पर हिंदी में साबिर और अंग्रेजी में लक्ष्मण वसुनिया दर्ज है। वास्तव में इनके परिवार के सदस्यों की संख्या 8 है लेकिन अब तक राशन 10 लोगों का जारी होता रहा है।

431 जाकिर हुसैन वार्ड निवासी नासिर हुसैन के परिवार में 2 सदस्य हैं। समग्र पोर्टल पर परिवार के सदस्यों की संख्या 5 है। इनमें भी 4 ऐसे लोगों के नाम है जो इनके परिवार के सदस्य नहीं हैं, लेकिन राशन सभी के लिए जारी होता है।

जवाहर नगर निवासी राधेश्याम गेंदालाल के परिवार में दो सदस्य हैं। समग्र पोर्टल पर इनके परिवार के सदस्यों के रूप में तेजसिंह, करण सिंह, अर्जुन सिंह, हेमलता नाम दर्ज है। इतने नामों के हिसाब से राशन जारी होता रहा है। खुद राधेश्याम ही नहीं जानते, ये लोग कौन हैं।

गड़बड़ी के कुछ उदाहरण

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Web Title: हजारों आईडी में चढ़ा रखे कई फर्जी नाम, इसलिए बेखौफ होकर कर रहे हैं राशन आवंटन में गड़बड़ी
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