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कंपनियों के हिसाब से बदले जा रहे स्पीड गवर्नर के नियम, कभी ट्रेड सिस्टम तो कभी एमआईएस का डर

Bhaskar News Network | Mar 21, 2017, 05:00 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
कंपनियों के हिसाब से बदले जा रहे स्पीड गवर्नर के नियम, कभी ट्रेड सिस्टम तो कभी एमआईएस का डर
स्पीड गवर्नर को लेकर वाहन मालिक असमंजस में हैं। एक तरफ कमीशन का खेल तो दूसरी तरफ विभाग के मनमाने नियम। गवर्नर को लेकर पिछले एक साल में करीब तीन बार परिवहन विभाग नियमों में फेरबदल कर चुका है। जिसके चलते हर बार सैकड़ों वाहन मालिकों को नए नियमों के हिसाब से स्पीड गवर्नर लगवाने पड़ते हैं। हाल ही में एमआईएस पर एंट्री कराने की बात सामने आई है। अब वाहन मालिकों को डर है कि कहीं उनकी गाड़ियों में लगे गवर्नर फिर से निरस्त न कर दिए जाएं। जब दैनिक भास्कर टीम ने मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि स्पीड गवर्नर को लेकर शुरुआत में केवल प्रमाणित संस्थाओं के ही स्पीड गवर्नर लगाने का आदेश जारी हुआ था, लेकिन राज्य के परिवहन विभाग ने इसे कमाई का जरिया बनने और चहेती कंपनियों को लाभ देने के उद्देश्य से नियमों में फेरबदल कर दिए। अब यह मामला इतना उलझ चुका है कि अफसर ही तय नहीं कर पा रहे कि गवर्नर को लेकर कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाएं?

सागर. बाजार में साढ़े तीन से चार हजार रुपए में उपलब्ध स्पीड गवर्नर छह हजार में बेचा जा रहा है। इन्हें बेचने के लिए डीलर आरटीओ के इन्हीं नए नियमों का हवाला देते हैं, जिससे वाहन मालिक डर कर इन्हें खरीद लें।

1500 से लेकर 2000 तक कमीशन ले रहे दुकानदार

Á स्पीड गवर्नर को लेकर एमआईएस का नियम कब लागू हुआ है?

- अभी दस-बारह दिन ही हुए हैं, लेकिन उसमें फिलहाल एंट्री नहीं हो रही।

Á जब एमआईएस सिस्टम ही लागू होना था तो ट्रेड का नियम क्यों बनाया गया?

- आदेश ऊपर से आए थे। लेकिन अब इसे जल्द ही खत्म कर देंगे।

Á एक साल में तीन बार नियम बदल दिए। स्पीड गवर्नर लगवाने के लिए वाहन मालिक क्या करें?

- वाहन मालिक कहीं से भी स्पीड ले सकते हैं। लेकिन इसे लेने से पहले रेट का विशेष ध्यान रखें। डीलर से मोलभाव करें। यह जरूर देखें कि गवर्नर प्रमाणित संस्था से अप्रूव हो और अच्छी कंपनी का हो।

प्रदीप शर्मा, आरटीओ सागर

सीधी बात

इस तरह एक साल में बदले नियम

1. स्पीड गवर्नर को लेकर जारी हुए पहले आदेश में केंद्रीय मोटरयान नियम 126 के तहत चार संस्थाओं ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड टेक्नालॉजी, इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नालॉजी और व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट द्वारा प्रमाणित स्पीड गर्वनर वाहनों में फिट किए की बात थी। जिसके हिसाब से वाहनों में गर्वनर लगने लगे।

2. फरवरी 2017 में परिवहन विभाग ने नया फरमान जारी करते हुए ट्रेड सिस्टम लागू कर दिया। जिसमें स्पीड गवर्नर बेचने वाली संस्था को पहले मुख्यालय और फिर स्थानीय आरटीओ कार्यालय में फीस भर कर स्पीड गर्वनर बेचने होंगे। इस नियम के चलते सैकड़ों वाहनों में लगे नॉन ट्रेड कंपनियों के स्पीड गवर्नर बेकार हो गए और उन्हें ट्रेड कंपनियों के गवर्नर लगाने पड़े।

3. 15 दिन पहले स्पीड गवर्नर को एमआईएस पर लाने का नियम लागू हुआ है। जिसके हिसाब से कंपनी को ट्रेड और नॉन ट्रेड होने का नियम खत्म कर दिया जाएगा। अब केवल बार कोड वाले सर्टिफिकेट ही मान्य होंगे। ऐसे में जिन वाहन मालिकों के पास कंम्यूटराइज बिल और सर्टिफिकेट नहीं हैं, उनकी एंट्री एमआईएस पर नहीं होगी। यानि फिर से पांच हजार का खर्चा।

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Web Title: कंपनियों के हिसाब से बदले जा रहे स्पीड गवर्नर के नियम, कभी ट्रेड सिस्टम तो कभी एमआईएस का डर
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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