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BJP नेताओं से नजदीकियां बढ़ा रहे हैं अमर सिंह

डॉ. भारत अग्रवाल | Feb 21, 2017, 10:55 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
BJP नेताओं से नजदीकियां बढ़ा रहे हैं अमर सिंह
मुलायम सिंह के पूरे कुनबे ने वोट डाला। सास-बहू टाइप बातें भी कीं। बकौल अमर सिंह पूरे सीरियल की स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी। दुख ये कि ये स्क्रिप्ट न उन्होंने तैयार की थी, न उनसे पूछकर तैयार की गई थी। उसके बाद अमर सिंह बार-बार दुख भरी दास्तां सुनाते रहे, लेकिन सुनने के लिए कोई राजी नहीं हुआ। फिर चैनल-दर-चैनल इंटरव्यू देकर मोदी की तारीफ की। आखिर दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है, शायद कोई बात बन जाए। फिर राज्यसभा के एक सदस्य को साझी दोस्ती का हवाला देकर, अपने हैप्पी बर्थडे की बधाई लेने के नाम पर, अरुण जेटली से सपत्नीक मिले। सुना है कि अमर सिंह ने चुनाव में अखिलेश के खिलाफ और भाजपा के पक्ष में अमरवाणी करने का प्रस्ताव किया है। अमर सिंह संघ के एक पूर्व प्रचारक से भी मिल चुके हैं। लेकिन भाजपा आलाकमान चलते चुनाव में अमर सिंह को लिफ्ट देने के पक्ष में नहीं है। उधर अमर सिंह इस पक्ष में नहीं हैं कि पूरा चुनाव सूखा बीत जाए।
ऐसा कैसे हो गया?
ओडीशा के जिला पंचायत चुनावों में बीजेपी को मिली भारी सफलता से सारी राजनीति हैरान है। नवीन पटनायक हैरान हैं- ऐसा कैसे हो गया? बीजेपी आलाकमान हैरान है- हमने प्रचार किया नहीं, फिर कैसे जीत गए? कांग्रेस आलाकमान हैरान है- हमने प्रचार किया नहीं, फिर हार कैसे गए? बहरहाल, अमित शाह ने यूपी में पार्टी को निर्देश दिया है कि वह इस जीत को जनता के सामने रखे।
भई गति अमर सिंह केरी...
पाकिस्तान की विदेश नीति बड़ी सिंपल सी थी। जो सबसे कट्टर भारत विरोधी हो, उसे भारत भेजो, और जो भारत में रह चुका हो, उसे विदेश सचिव बनाओ। उच्चायुक्त अब्दुल बासित इसी लाइन पर आगे बढ़ रहे थे। हुर्रियत वालों की मीटिंग करवा लेने जैसी बड़ी उपलब्धि भी उनके नाम थी, जिसने मोदी को नाराज कर दिया था। विदेश सचिव बनने ही वाले थे कि नवाज शरीफ ने तहमीमा जन्जुआ को विदेश सचिव बना दिया। जन्जुआ ने बासित की दिल्ली से भी छुट्टी कर दी और तुर्की में तैनात सुहेल महमूद को भारत में उच्चायुक्त नियुक्त कर दिया। अमर सिंह गति को प्राप्त हो चुके अब्दुल बासित इस्तीफा देने का भी सोचने लगे थे। दुर्भाग्य की वजह बिल्कुल वैसी ही है। अगर पाकिस्तान की डिप्लोमेसी समाजवादी पार्टी जैसी मानी जाए, तो उसमें आर्मी की हैसियत नेताजी जैसी होती रही है। लेकिन फिलहाल आर्मी के रिश्ते नवाज शरीफ से अच्छे चल रहे हैं। ऐसे में बासित क्या कर लेते ?
ब्लू गैंग वाली भैनजियां
गुलाबी गैंग के बाद आ रही है- नीले ब्लाउज वाली ब्लू गैंग। ये मायावती की महिला कार्यकर्ताओं का ड्रेस कोड होगा। तो क्या खुद मायावती भी इस ड्रेस कोड को मानेंगी? नहीं। बहनजी को आमतौर पर सलवार-कुर्ता और भारी भरकम शॉल ओढ़ना पसंद है।
हद है भई
देखना सोशल मीडिया किसी दिन बड़ा पंगा करवा देगा। सोशल मीडिया पर एक खबर रविवार शाम से घूम रही है कि मुरलीमनोहर जोशी उत्तराखंड के गवर्नर बनाए जा सकते हैं। माना कि मौजूदा गवर्नर के.के. पॉल से सरकार खुश नहीं है, लेकिन फिर भी खबर का कोई तो सिर-पैर होना चाहिए। चुनाव के पहले गवर्नर बदला जाएगा? वो भी मार्गदर्शक मंडल के सदस्य जोशी जी? जो खुद मूलतः उत्तराखंड के ही निवासी हैं? हद है भई।
चप्पे-चप्पे की लड़ाई
यूपी में चप्पे-चप्पे की लड़ाई जारी है। मोदी सोमवार को इलाहाबाद जाएंगे, दो दिन बाद राहुल-अखिलेश वहीं रोड शो करेंगे। राहुल 23-24 को अमेठी में रहेंगे, जहां अमित शाह पहले ही हो आए हैं। वरुण गांधी जरूर कहीं ज्यादा नजर नहीं आ रहे हैं। और यही हालत प्रियंका की है। कांग्रेस अपने दोनों कार्ड एक साथ नहीं खेलना चाहती है।
बैन पर बवाल
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 1 मई से प्रदेश भर में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर दिया है। इससे पर्यावरण को भी लाभ होगा और सीएम की भी छवि निखरी है। लेकिन दिल्ली की राजनीति इससे हिल गई है। प्लास्टिक लॉबी ने इसके विरोध में दिल्ली में अफसरों और नेताओं के तमाम दरबारों में पैरवी कर डाली है। कुछ कंपनियां इसके खिलाफ अदालत जाने के मूड में हैं, हालांकि मोदी और जेटली- दोनों इस कदम के समर्थन में हैं।
पीएम की डिमांड
बीजेपी की मूल योजना यह थी कि उत्तरप्रदेश के चुनाव में प्रधानमंत्री की सिर्फ 14 रैलियां करवाई जाएंगी। हर चरण के चुनाव में दो। लेकिन अब प्रधानमंत्री की रैलियों की मांग बढ़ रही है। बीजेपी की 400 वीडियो वैन और 1650 मोटरसाइकिल सवार कार्यकर्ता पहले ही तैनात हैं। एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक इस चुनाव में बीजेपी की जमीनी तैयारी 2012 ही नहीं, 2014 से भी बेहतर है।
नई कार्य संस्कृति
आम तौर पर जजों का शपथ ग्रहण समारोह सुबह साढ़े दस बजे होता था। इसका नतीजा यह होता था कि अदालत का लगभग सारा ही दिन बेकार चला जाता था। अब एक नए चीफ जस्टिस ने एक नई परम्परा की शुरुआत की है। शपथ ग्रहण समारोह सुबह साढ़े नौ बजे, आधे घंटे में काम खत्म और ... और क्या, अदालत शुरू।
यहां मन नहीं लगता...
लोकसभा सचिवालय में दो नई संयुक्त सचिव नियुक्त हुईं हैं। अब हुईं हैं, माने महिला हैं। लेकिन वहां कदम रखने के बाद से ही दोनों वहां से पिंड छुड़ाने की कोशिश में लग गई हैं। वजह? वजह आपको फिर कभी बताएंगे। फुर्सत से।
होगा इम्पैनलमेंट!
1985 के बैच के आईएएस अधिकारियों का सचिव स्तर का और 1988 बैच के अधिकारियों का अतिरिक्त सचिव स्तर का इम्पैनलमेंट होने की संभावना है। लेकिन जल्दबाजी की बात नहीं है। पहले इधर 1984 वालों का नंबर आएगा और उधर 1987 वालों का। उसके 4-6 महीनों बाद इनका नंबर लगेगा।
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Web Title: Power Gallery By Dr. Bharat Agrawal
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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