Home »National »Power Gallery » Power Gallery By Dr. Bharat Agrawal

पति हूं, कोई अप्रवासी नहीं

डॉ. भारत अग्रवाल | Mar 07, 2017, 13:40 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
पति हूं, कोई अप्रवासी नहीं
किसी ने स्वराज कौशल से ट्वीट करके पूछा कि आप मैडम (विदेश मंत्री सुषमा स्वराज) को ट्वीट क्यों नही करते? स्वराज कौशल ने उत्तर दिया - मैं सोमालिया या अफ्रीका जैसे किसी दूर देश में फंसा हुआ कोई अप्रवासी थोड़े ही हूं।
पूरी तरह ठीक नहीं हैं सुषमा
वास्तव में किडनी के आॅपरेशन के बाद सुषमा स्वराज अभी पूरी तरह नहीं उबर सकी हैं। उनकी अनुपस्थिति में एम.जे. अकबर का महत्व बढ़ा है। अकबर प्रधानमंत्री के साथ इस्राइल यात्रा पर भी जा रहे हैं। मामले संवेदनशील हैं और सभी मना रहे हैं कि सुषमाजी जल्द पूरी तरह स्वस्थ हो जाएं।
कौन बनेगा सीएम?
उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी कई लोग कर चुके हैं। यहां तक कि एनडीटीवी और राजदीप सरदेसाई जैसे लोग भी, और अमर सिंह की बात मानें, तो खुद मुलायम सिंह यादव भी। ऐसे में कयास लगाए जाने लगे हैं कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। कयास इंडस्ट्री का पहला नाम हैं राजनाथ सिंह। लेकिन वह खुद इसके इच्छुक नहीं हैं। दूसरा नाम हैं मनोज सिन्हा। आईआईटी शिक्षित हैं, पीएम के विश्वासपात्र हैं, आईटी का स्वतंत्र प्रभार और अब रेलवे का भी दायित्व। लेकिन वाराणसी से पीएम और सटी हुई गाजीपुर सीट का भूमिहार सीएम? यूपी का जातिशास्त्र इसकी अनुमति नहीं देता। लखनऊ के महापौर भी उम्मीद लगाए बैठे हैं, अमित शाह के नजदीकी रह चुके हैं, लेकिन बीजेपी पहले ही महाराष्ट्र में ब्राह्मण मुख्यमंत्री दे चुकी है और इस तर्क के साथ ही कम से कम दो नाम और खारिज हो जाते हैं। बीजेपी का जवाब बहुत सीधा सा है-पहले नतीजे तो सामने आ जाने दो।
ज्यादा यारी की सजा!
पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस राघवेन्द्र सिंह। कृषि विभाग में अतिरिक्त सचिव होते थे। लेकिन राजस्थान के इन ठाकुर साब की असली ख्याति इस बात में रही है कि वे वाजपेयी सरकार के दौरान जसवंत सिंह के निजी सचिव लगातार रहे। चाहे जसवंत सिंह विदेश मंत्री रहे हों, या वित्त मंत्री। यही नहीं, राघवेन्द्र सिंह ने हाल ही में बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति को लेकर एक मोटी सी पुस्तक भी लिखी थी। अब अतिरिक्त सचिव से सचिव बनाए गए हैं, लेकिन राष्ट्रीय अभिलेखागार के डीजी बना दिए गए हैं। इसे सजा नियुक्ति माना जाता है। चर्चा यह है कि यह जसवंत सिंह और उनके पुत्र मानवेन्द्र सिंह से निकटता की सजा है।
शिवाजी मूर्तियों की राजनीति
महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्तियां विभिन्न शहरों में बड़े पैमाने पर स्थापित करने जा रही है। यह फैसला नगर निगम चुनाव परिणामों के बाद लिया गया है। मतलब साफ है। बीजेपी महाराष्ट्र में अपने बूते अपने पैर पसारना चाहती है।
वेंकैया होंगे अगले राष्ट्रपति!
अगला राष्ट्रपति कौन? कयास इंडस्ट्री की इस दुकान में नए नाम आने लगे हैं। लेटेस्ट एंट्री है एम. वेंकैया नायडू। वैसे अभी बीजेपी अपना राष्ट्रपति बनवाने की स्थिति में नहीं है। करीब पौने दो लाख वोट कम पड़ रहे हैं, पांच विधानसभाओं के चुनाव परिणाम आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। लेकिन प्रणब दा को फिर राष्ट्रपति बनाने के पक्ष में न बीजेपी है और न सोनिया गांधी। हां, अगर सारा विपक्ष उम्मीदवार बनाए, तो हाल ही में कोच्चि में इंटालरेंस पर खरी-खोटी सुना चुके प्रणब दा राजी हो सकते हैं। कांग्रेस हामिद अंसारी के लिए हामी हो सकती है, लेकिन हामिद अंसारी की संभावना नहीं है। देखिए क्या होता है।
ट्रैक टू भी!
माने बात यूपी के चुनाव के बाद ही होगी। यूपी चुनाव के बाद और भी बहुत कुछ हो सकता है। जैसे पाकिस्तान चाहता है कि यूपी चुनाव के बाद विदेश सचिव स्तर की बातचीत शुरू हो। पनामा पेपर्स लीक कांड में फंसे नवाज शरीफ अब गए और तब गए की हालत में हैं। उनके लिए राहत की बात यह है कि नए सेना प्रमुख अभी तक जम्हूरियत पसंद नजर आए हैं और इस नाते पाकिस्तान में लल्लू-पंजू की छवि को प्राप्त होते जा रहे हैं। इसी बूते नवाज शरीफ भारत में उच्चायुक्त बदलने की हिमाकत कर सके हैं। सिंधु आयोग की बैठक में जाने के लिए भारत राजी हो गया है और उसने सार्क का पाकिस्तानी सचिव भी कबूल कर लिया है। माने ट्रैक टू भी शुरू हो सकता है।
हालात खराब हैं
यूपी चुनाव में लालू बोल लिए, लेकिन ममता की आवाज सुनाई नहीं दी। यहां तक कि वह अपनी सखी पार्टी की खातिर गोवा और पंजाब भी नहीं गईं। उधर सुना यह है कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने केन्द्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में यह कहा है कि पश्चिम बंगाल बारूद के ढेर पर बैठा है। 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले इस राज्य में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण चरम पर है। जमाते इस्लामी यहां सक्रिय है, और वोट बैंक राजनीति के कारण ममता बनर्जी इस पर बहुत उदार बनी हुई हैं।
मोदी का फिलीस्तीन संकट
मोदी इस्राइल जाने वाले हैं, लेकिन वह फिलीस्तीन नहीं जाएंगे। प्रणब मुखर्जी जब राष्ट्रपति की हैसियत से इस्राइल गए थे तो वह सरकार की अनिच्छा के बावजूद फिलीस्तीन भी गए थे। प्रणब मुखर्जी ने सरकार को अनौपचारिक तौर पर कह दिया था कि इस्राइल और फिलीस्तीन से बराबर की दूरी रखना भारत की नीति रही है। लेकिन मोदी इस नेहरूवादी नीति को छोड़कर इस्राइल के साथ नई इबारत लिखने के पक्ष में हैं।
जरा फिलीस्तीन भी होते आना
और इस नई इबारत की वजह यह है कि पीएम नरेंद्र मोदी और रक्षा सलाहकार अजित डोभाल दोनों की राय यह थी कि रक्षा मामलों में, खुफिया सहयोग के मामलों में और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में भारत और इस्राइल के बीच जो सहयोग पनपा है, उसके लिए एक सशक्त संदेश दिया जाना जरूरी था। वरना फिलीस्तीन भी होते आने की सलाह तो इस बार भी विदेश मंत्रालय ने दी थी।
गोल के पास गलती!
मणिपुर की जनता ने इरोम शर्मिला को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। क्यों? जनता को शर्मिला का आंदोलन खत्म करने का तरीका पसंद नहीं आया। रही कसर केजरीवाल ने समर्थन देकर पूरी कर दी। इतनी लंबी तपस्या जरा सी बात से बेकार हो गई।
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App
Web Title: Power Gallery By Dr. Bharat Agrawal
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।
 

Stories You May be Interested in

      More From Power Gallery

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top