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बोफोर्स स्कैंडल के 30 साल बाद भारत आई 2 तोप, चीन बॉर्डर पर होंगी तैनात

DainikBhaskar.com | May 18, 2017, 18:43 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स

VIDEO: दोनों हॉवित्जर तोपों को चार्टर्ड एयरक्राफ्ट से भारत लाया गया। अब पोकरण फायरिंग रेंज में इनकी टेस्टिंग की जाएगी।

नई दिल्ली. बोफोर्स स्कैंडल (1980-90 के दौरान) के बाद 30 साल तक तोपखाने को मॉडर्नाइजेशन से दूर रखने के बाद इंडियन आर्मी अब अपनी पहली भारी तोप लेने को तैयार है। 145 M 777 तोपें इस हफ्ते सेना में शामिल हो जाएंगी। 155 एमएम/39 कैलिबर अल्ट्रा लाइट हॉवित्‍जर तोपें अमेरिकी कंपनी BAE सिस्टम्स से खरीदी जा रही हैं। पहली खेप में 2 तोप भारत आ गई हैं, जिनका राजस्थान के पोकरण स्थित फायरिंग रेंज में टेस्ट किया जाएगा। ये तोप चीन बॉर्डर पर तैनात की जाएंगी। चार्टर्ड एयरक्राफ्ट से भारत लाया गया...
- कंपनी के स्पोक्सपर्सन ने कहा, "हमें इस बात का एलान करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि अमेरिका के साथ 145 M 777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों के सौदे के बाद इसमें से 2 तोप भारत भेजी जा रही हैं। इंडियन आर्मी के तोपखाने को मॉडर्नाइज करने के लिए हम अमेरिकी सरकार की लगातार मदद ले रहे हैं।"
- इंडियन डिफेंस सोर्सेस के मुताबिक, दोनों हॉवित्जर तोपों को चार्टर्ड एयरक्राफ्ट से भारत लाया गया। अब पोकरण फायरिंग रेंज में इनकी भारतीय गोला-बारूद से टेस्टिंग की जाएगी।
25 तोप इम्पोर्ट करेगा भारत, 120 भारत में बनेंगी
- तीन तोपों को सितंबर में लाने का प्लान है। फिर 2019 के मार्च से लेकर 2021 के जून के बीच हर महीने 5-5 तोपें आएंगी। कंपनी कुल 145 तोप भारत को देगी। इसमें 25 तोपें भारत इम्पोर्ट करेगा, जबकि बाकी 120 तोप महिंद्रा कंपनी भारत में ही बनाएगी।
- बता दें कि 1980 में स्वीडिश कंपनी से बोफोर्स तोपें खरीदी गई थीं, उस वक्त इस सौदे को लेकर काफी बवाल हुआ था।
30 नवंबर को हुआ था करार
- पिछले साल 30 नवंबर को भारत ने इन तोपों को खरीदने के लिए अमेरिका के साथ करीब 4 हजार 743 करोड़ रुपए (737 मिलियन डॉलर) का समझौता किया था। 17 नवंबर को केंद्रीय कैबिनेट ने इस समझौते को मंजूरी दी थी। इन तोपों के इंडियन आर्मी में शामिल होने के बाद से उसकी ताकत बढ़ जाएगी। खास तौर पर चीन के साथ बढ़ते तनाव के मद्देनजर यह सौदा काफी अहम माना जा रहा है। इन तोपों को चीन से सटे ईस्टर्न फ्रंट पर तैनात करने के लिए खरीदा जा रहा है।
हॉवित्जर में क्या है खास?
- हॉवित्जर तोपें दूसरी तोपों के मुकाबले काफी हलकी हैं। इनको बनाने में काफी हद तक टाइटेनियम का इस्तेमाल किया गया है। यह 25 km दूर तक बिल्कुट सटीक तरीके से टारगेट हिट कर सकती हैं। चीन से निपटने में तो ये तोपें काफी कारगर साबित हो सकती हैं। भारत ये तोपें अपनी 17 माउंटेन कॉर्प्स में शामिल कर सकता है।
करगिल की लड़ाई में गेम चेंजर थी बोफोर्स
- करगिल की लड़ाई में बोफोर्स तोप गेम चेंजर साबित हुई थी। यह 24 km दूर तक बम बरसा सकती थी। इस कैपिसिटी को बाद में अपग्रेड कर 27 km किया गया था। करगिल में काउंटर अटैक में इसका अहम रोल था। बोफोर्स में 68 हार्स पॉवर के दो इंजन होते हैं। फ्यूल कैपिसिटी 22 लीटर है। इस तोप की सबसे बड़ी खासियत एंगल टू एंगल टारगेट पर अचूक निशाना लगाना है। इससे रात में भी टारगेट डेस्ट्रॉय किया जा सकता है। पहाड़ों में दुश्मन से लड़ने के लिए ये बेहतरीन हथियार है।
बोफोर्स का अपग्रेडेड वर्जन है 'धनुष'
- बोफोर्स के अपग्रेडेड वर्जन 'धनुष' को भारत में ही तैयार किया जाएगा। अभी इसका फाइनल ट्रायल चल रहा है।
- 1260 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में 114 तोपों का ट्रायल चल रहा है। जरूरत 414 तोपों की है।
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Web Title: Indian Army To Get New Modern Artillery Guns After The Bofors Scandal
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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