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भारत सीखे कि US से फायदा लेने के लिए हम कैसे बैक सीट पर रहते हैं: चीन

DainikBhaskar.com | Feb 28, 2017, 10:25 IST

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, भारत-चीन के बीच के मतभेदों को रिलेशन बढ़ाने में रुकावट नहीं बनना चाहिए। (फाइल)

बीजिंग. चीन ने भारत से कहा है कि वह अपने फायदे के लिए चीन के साथ अपने रिलेशन में आई कमी को माने। चीन के स्टेट मीडिया ने कहा है कि भारत को चीन से यह सीखना चाहिए कि वह अमेरिका के साथ बाइलेटरल रिलेशन से ज्यादा फायदा लेने के लिए कैसे बैक सीट पर रहना पसंद करता है। बता दें कि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में मेंबरशिप और आतंकी मसूद अजहर पर यूएन में बैन को लेकर चीन भारत का विरोध करता रहा है। खुद के साथ ईमानदार रहें...
- चीन के स्टेट मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक आर्टिकल में लिखा, "भारत चीन से एक सबक यह ले सकता है कि खुद के साथ ईमानदार रहें।"
- "इकोनॉमिक और जियो पॉलिटिकल पावर में एक समान न होना किसी भी बाइलेटरल रिलेशन के लिए स्वाभाविक बात है।"
- अखबार ने 22 फरवरी को हुई चीन-भारत स्ट्रैटजिक डायलॉग के नतीजों का एनालिसिस करते हुए ये आर्टिकल लिखा।
- इस डायलॉग का मकसद भारत-चीन के बाइलेटरल रिलेशन को सुधारना, साथ ही एनएसजी और मसूद अजहर के मुद्दे को लेकर मतभेदों को दूर करना था।
और क्या कहा गया आर्टिकल में?
- "भारत-चीन के बीच किसी भी तरह के मतभेदों को डेवलप हो रहे रिलेशन में रुकावट नहीं बनना चाहिए।"
- ग्लोबल टाइम्स ने ये भी लिखा, "अमेरिका के साथ रिलेशन में पीछे की सीट पर होने को लेकर चीन ने शायद ही कभी शिकायत की हो।"
- चीन ने भारत को यह सलाह भी दी है कि उम्मीदों को कम करे और बाइलेटरल रिलेशन को ज्यादा तरजीह दे।
- ग्लोबल टाइम्स ने ये भी लिखा, "कहानी का सार सीधा-सा है। मौजूदा खाई (हालांकि यह चौड़ी दिखती है) ज्यादा चिंता की बात नहीं है। अहम बात ये है कि कैसे इस खाई को पाटा जाए। भारत-चीन, दोनों को एक दूसरे के विकास का काफी फायदा मिला है।"
भारत-चीन के बीच पहली बार स्ट्रैटजिक डायलॉग
- 22 फरवरी को चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के एग्जीक्यूटिव वाइस मिनिस्टर और अपने काउंटरपार्ट जांग येसूई के साथ स्ट्रैटजिक डायलॉग के पहले जयशंकर की चीन के फॉरेन मिनिस्टर वांग यी से मुलाकात हुई।
- वांग ने कहा, "भारत-चीन दोनों बड़े डेवलपिंग कंट्री हैं। दोनों देशों का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। हम लोग मीटिंग करते रहे हैं।"
- वांग ने स्ट्रैटजिक डायलॉग को कामयाब बताया। उन्होंने कहा, "बातचीत का मकसद दोनों देशों के बीच तनाव कम कर स्ट्रैटजिक को-ऑपरेशन को मजबूत करना है।"
- "इससे हमारे रिलेशन भी मजबूत होंगे और क्षेत्र में स्टेबिलिटी आएगी।"
- जयशंकर ने कहा, "ये पहली बार है जब दोनों देशों के बीच रीस्ट्रक्चर्ड स्ट्रैटजिक डायलॉग हुआ। दोनों देश जी-20, शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO), ब्रिक्स, ईस्ट एशिया समिट के मेंबर्स हैं। लिहाजा, दोनों के मुद्दे भी एक से ही हैं।"
भारत के लिए सॉवेरनिटी बड़ा मुद्दा
- चीन के स्टेट मीडिया ग्लोबल टाइम्स के साथ बातचीत में जयशंकर ने चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) और आतंकी मसूद अजहर का मुद्दा भी उठाया।
- जयशंकर ने कहा, "हमारे लिए सॉवेरनिटी (संप्रभुता) से बड़ी कोई चीज नहीं।" बता दें कि CPEC पाक के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरेगा।
- "आतंकवाद रोकने के लिए भारत-चीन को साथ मिलकर लड़ना चाहिए। चीन बहुत मजबूत है। वह जिस स्थिति में है, उसमें काउंटर टेररिज्म बेहतर तरीके से किया जा सकता है।"
- बता दें कि जयशंकर चीन के एक्सपर्ट माने जाते हैं। वे सबसे लंबे वक्त तक चीन के एम्बेसडर रहे थे।
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Web Title: china says to india accept diffferences in both countries relation
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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