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नोटबंदी से गांवों में लोग परेशान हो रहे हैं, सरकार बताए क्या कदम उठाए: SC

dainikbhaskar.com | Dec 02, 2016, 14:22 IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि नोटबंदी से परेशान हो रहे गांववालों की दिक्कतें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। गांव के ये लोग ज्यादातर को-ऑपरेटिव बैंकों पर निर्भर हैं। कोर्ट ने कहा कि सरकार अगर इन बैंकों के लिए कुछ कर सकती है तो उस पर विचार करे। बता दें कि को-ऑपरेटिव बैंकों को नोटबंदी अभियान शामिल नहीं किया गया है।सरकार ने बताई- दिक्कत की वजह...

- केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, "ऐसा नहीं कि हम हालात से बेखबर हैं। लेकिन यहां (को-ऑपरेटिव बैंकों में) पर्याप्त बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है, जिसकी वजह से दिक्कत है।'
- रोहतगी ने कहा, "को-ऑपरेटिव बैंकों काे जानबूझकर नोट बदलने के अभियान से दूर रखा गया, क्योंकि नकली नोटों की पहचान करने में उनकी एक्सपर्टाइज नहीं है।'
- को-ऑपरेटिव बैंकों की ओर से पेश हुए सीनियर एडव्होकेट पी. चिदंबरम ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाया। कहा की इस अभियान में को-ऑपरेटिव बैंकों को शामिल नहीं करने से गांवों की इकोनॉमी नाकाम हो गई है।
आम आदमी की दिक्कतों पर पहले होगी सुनवाई
- शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह नोटबंदी से आम लोगों को हो रही दिक्कतों से संबंधित मामलों की सुनवाई पहले करेगी।
एक साथ बैठकर केसों की लिस्ट बनाने की सलाह
- नोटबंद पर आईं पिटीशन्स पर चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ की बेंच सुनवाई कर रही थी।
- इस दौरान बेंच ने कहा कि नोटबंदी पर दायर अलग-अलग पिटीशन्स की सभी पक्ष एक साथ बैठकर लिस्ट बना लें। तय कर लें कि कौन से केस हाईकोर्ट में भेजे जाने हैं और किस पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट करे।
- एक अन्य पिटीशनर के वकील कपिल सिब्बल ने सलाह दी कि वे सभी एक साथ बैठ कर सोमवार तक केसों की कैटेगरी तय कर लेंगे।
- इसके बाद कोर्ट ने नोटबंदी से जुड़ी सभी पिटीशन्स पर सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को पहले भी लगाई थी फटकार
- इससे पहले 19 नवंबर को ही नोटबंदी के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नसीहत दी थी।
- कहा था, "बैंकों और पोस्ट ऑफिसों के बाहर लंबी-लंबी कतारें हैं। लोग हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। इससे उनकी परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। अदालतों के दरवाजे ऐसे हालात में बंद नहीं किए जा सकते। दंगे भड़क सकते हैं।'
- तब चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस एआर दवे की बेंच ने इस बात से इनकार किया था कि देश के किसी भी कोर्ट में 500-1000 के नोट बंद किए जाने को लेकर लगाई गई पिटीशन पर सुनवाई नहीं होगी।
- दरअसल, अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा था कि नोट बदलने के मामले को चैलेंज करने वाली किसी पिटीशन पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में ही होगी।
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Web Title: Demonetisation: SC asks govt to spell out measures taken to ease out suffering and inconvenience of rural masses
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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