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85% सस्ता होते ही हॉस्पिटल्स में स्टेंट की किल्लत, री-लेबलिंग के बहाने स्टॉक हटाया

Dainikbhaskar.com | Feb 19, 2017, 11:08 IST

  • हार्ट पेशेंट्स के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कोरोनरी स्टेंट्स की कीमत सरकार ने 85% घटा दी है।
    नई दिल्ली.हार्ट के इलाज में इस्तेमाल होने वाले स्टेंट की कीमत 85% तक घटाने का ऑर्डर आते ही देश में इसकी किल्लत हो गई है। स्टेंट बनाने वाली कंपनियां और उनके डिस्ट्रीब्यूटर री-लेबलिंग के बहाने मार्केट से स्टेंट हटा रहे हैं। कई हॉस्पिटल में तो ऑपरेशन तक रोकने पड़ गए। इस बीच, फार्मास्यूटिकल डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी जयप्रिय प्रकाश ने कहा कि ऐसे हथकंडे अपनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को स्टेंट मुहैया कराने के लिए सरकार कदम उठा रही है। बता दें कि 13 फरवरी को हेल्थ मिनिस्ट्री ने नोटिफिकेशन जारी कर कोरोनरी स्टेंट्स 85% सस्ते कर दिए थे। स्टेंट्स की कोई कमी नहीं...
    - सरकार ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि स्टेंट्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन कुछ हॉस्पिटल्स ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
    - नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA), ड्रग कंट्रोलर जनरल इंडिया (DCGI) और हेल्थ मिनिस्ट्री से कहा गया है कि सरकार की तय की गई कीमत पर स्टेंट्स मरीजों को मिलें, इसकी पुख्ता और जल्द व्यवस्था करें।
    - सरकार के कीमत घटाए जाने के बाद कुछ मैन्युफैक्चरर, डिस्ट्रीब्यूटर्स और इम्पोर्टर्स नए प्राइस री-लेबलिंग के नाम पर हॉस्पिटल्स से स्टेंट्स वापस ले रहे हैं। साजिश ये है कि इस बहाने स्टेंट्स की कमी दिखाकर मनमानी या पुरानी कीमतों पर इन्हें बेचा जाए।
    - केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि स्टेंट ओवर चार्जिंग पर क्रिमिनल केस दर्ज होगा। शिकायत के लिए 'फार्मा जन समाधान' नाम का ऐप लाया गया है।
    ये है देश के 6 शहरों की रिपोर्ट
    1# मुंबई: ज्यादातर हॉस्पिटल्स से स्टेंट हटा लिए गए। लीलावती अस्पताल के डॉ. मैथ्यू सैमुअल ने बताया कि कई कंपनियों ने टॉप क्वालिटी वाले स्टेंट वापस ले लिए हैं। अब पेशेंट्स को दुबई या सिंगापुर ले जाना होगा।

    2# चंडीगढ़: केंद्र ने कोरोनरी स्टेंट पिछले साल 19 जुलाई को नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन की लिस्ट में डाला था। 18 नवंबर को ही स्टेंट के रेट 25 हजार रु. फिक्स कर दिए गए। इसलिए किल्लत नहीं है।

    3# पटना: सेकंड और थर्ड जनरेशन के स्टेंट बाजार से नदारद हैं। जो फर्स्ट जनरेशन स्टेंट पहले 45 हजार में मिलता था, अब 30 हजार में मिल रहा है। प्रीमियम स्टेंट लगवाने के लिए देश से बाहर जाना पड़ेगा।

    4# रांची: मेडिको सुपर स्पेशिएलिटी के डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि एबोट और मेट्रोनिक जैसी कंपनियाें के स्टेंट 1 से 1.5 लाख के थे। इन्हें वापस मंगा लिया है। कंपनियां कहती हैं कि हमारे स्टेंट का रेट अमेरिका से तय होता है।

    5# भोपाल: यहां हर महीने 170 स्टेंट लगाए जाते हैं। बंसल अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. स्कंद त्रिवेदी कहते हैं कि कीमतें कम होने की उम्मीद में महंगे स्टेंट लगवाने वाले मरीजों ने एंजियोप्लास्टी की डेट आगे बढ़ा दी।

    6# जयपुर: एटरनल हार्ट केयर एंड रिसर्च सेंटर के चेयरमैन डॉ. अजीत बाना ने बताया कि मरीजों को लेटेस्ट स्टेंट नहीं मिल रहे हैं। जबिक डॉ. जीएल शर्मा ने बताया कि स्टेंट के दामों में फिलहाल कमी नहीं आई है।
    मरीजों से जुड़े तीन अहम सवाल और उसके जवाब
    Q: क्या मरीजों के लिए विदेशी स्टेंट भारतीय स्टेंट से बेहतर हैं?
    A: एनपीपीए चीफ भूपेंद्र सिंह के मुताबिक, दोनो में कोई फर्क नहीं है। वो 10 हजार का हो या 80 हजार का, सभी एक ही काम करते हैं। भारतीय स्टेंट अमेरिकी एजेंसी एफडीए से मान्यता प्राप्त नहीं हैं।
    Q: क्या कीमत तय कर देने से इस क्षेत्र में रिसर्च पर असर होगा?
    A: भारत की सबसे बड़ी स्टेंट बनाने वाली कंपनी मेरिल के चीफ राम शर्मा के मुताबिक, इस फैसले से ‘मेक इन इंडिया’ पर असर पड़ेगा।

    Q: स्टेंट बनाने वालीं कंपनियों को आदेश पर क्या आपत्ति है?
    A: जिस तरह आदेश दिया गया कि वो तुरंत दाम कम करें, नए प्राइसिंग लेबल लगाएं, यह ठीक नहीं है।
    सरकार ने दी है बहुत बड़ी राहत
    - 13 फरवरी को नेशनल फॉर्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) और हेल्थ मिनिस्ट्री ने एक नोटिफिकेशन जारी कर स्टेंट्स की कीमत 85% तक कम कर दी।
    - बता दें कि स्टेंट पर 654% मार्जिन लेकर हॉस्पिटल मोटी कमाई करते हैं।
    दो तरह के होते हैं स्टेंट?
    - हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. अनुज सारडा के मुताबिक, कोरोनरी स्टेंट एक ट्यूब के जैसी डिवाइस होती है, जिसे ब्लॉकेज होने पर आर्टरी में लगाया जाता है, ताकि हार्ट को पूरी तरह खून की सप्लाई मिलती रहे।
    - सर्जरी के जरिए स्टेंट को आर्टरी के उस हिस्से में लगाया जाता है, जहां कोलेस्ट्रॉल जमने से ब्लड सप्लाई नहीं हो पाती है और हार्ट अटैक का खतरा रहता है।
    - बेयर मेटल स्टेंट (BMS) नॉर्मल स्टेंट होता है। जबकि खास तरह के ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (DES) पर मेडिसिन लगी होती है। इसलिए उसकी कॉस्ट थोड़ी ज्यादा होती है।
    - मेटल स्टेंट 7,260 रुपए में मिलेंगे। खुले बाजार में इसकी कीमत 30-75 हजार रुपए है।
    - ड्रग-एलुटिंग स्टेंट 29,600 रुपए में मिलेंगे। खुले बाजार में इसकी कीमत 40 हजार से 2 लाख रुपए तक है।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें- हार्ट पेशेंट्स को सालाना 4.5 करोड़ का फायदा...
  • स्टेंट पर 654% मार्जिन लेकर हॉस्पिटल मोटी कमाई करते हैं।
    हार्ट पेशेंट्स को सालाना 4.5 करोड़ का फायदा

    - अथॉरिटी के नोटिफिकेशन के मुताबिक, "अब बेयर मेटल स्टेंट (BMS) की कीमत 7,260 और ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (DES) के लिए 31,080 तक फिक्स होगी।"
    - "पिछले दिनों स्टेंट की सप्लाई चेन में कई गड़बड़ियां सामने आईं। मार्केट सिस्टम में सही जानकारी नहीं होने से मरीज पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। जनता के हित को ध्यान में रखते हुए बेहद जरूरी है कि कोरोनरी स्टेंट की कीमत फिक्स की जाए।"
    - "पिछले साल सरकार ने ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत स्टेंट को नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन (NLEM), 2015 में शामिल किया था।"
    - सरकार ने कहा है कि इस फैसले से एक स्टेंट की कीमत 80 से 90 हजार तक कम होगी। साथ ही, देश के लाखों मरीजों को सालाना 4,450 करोड़ की फायदा मिलेगा।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Govt to act against cos creating artificial shortage of stents
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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