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जेटली ने H-1B वीजा मुद्दा उठाया, US कॉमर्स सेक्रेटरी बोले-अभी कोई फैसला नहीं

DainikBhaskar.com | Apr 21, 2017, 09:26 IST

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अरुण जेटली ने अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी विल्बुर रॉस से वॉशिंगटन में मुलाकात की।

नई दिल्ली/वॉशिंगटन. फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी विल्बुर रॉस से वॉशिंगटन में मुलाकात की है। इस दौरान जेटली ने उनके सामने H-1B वीजा मुद्दा सख्ती से उठाया और यूएस में ज्यादा कुशल भारतीय पेशेवरों के अहम रोल को सामने रखा। इस पर रॉस ने कहा, "अमेरिका ने H-1B वीजा मुद्दे को रिव्यू करने की प्रॉसेस शुरू की है और इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।" डोनाल्ड ट्रम्प के प्रेसिडेंट बनने के बाद अमेरिका-भारत के बीच कैबिनेट लेवेल की यह पहली मीटिंग थी। जेटली ने की दोनों देशों के हित की बात...
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक एक भारतीय ऑफिशियल ने बताया, "जेटली ने भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों की चिंताओं को सामने रखते हुए रॉस से कहा, "अमेरिका और भारत के इकोनॉमिक डेवलपमेंट में ज्यादा कुशल भारतीय पेशेवरों का अहम रोल रहा है और हम चाहते हैं कि वे यूएस में ऐसा करना जारी रखें, ये दोनों देशों के हित में होगा।"
- बता दें कि जेटली की अगुआई में एक भारतीय डेलिगेशन गुरुवार को ही वॉशिंगटन पहुंचा है।
मेरिट बेस्ड इमिग्रेशन पॉलिसी चाहते हैं ट्रम्प
- समझा जाता है कि विल्बुर रॉस ने कहा, "रिव्यू प्रॉसेस का जो भी नतीजा निकले, पर ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन का मकसद एक मेरिट बेस्ड इमिग्रेशन पॉलिसी बनाना है जिससे ज्यादा कुशल पेशेवरों को अहमियत मिले।"
- बता दें कि ट्रम्प ने H-1B वीजा मुद्दे को रिव्यू करने के लिए इस हफ्ते की शुरुआत में ही स्टेट, लेबर, होमलैंड सिक्युरिटी एंड जस्टिस डिपार्टमेंट्स के साथ एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया था।
IMF-वर्ल्ड बैंक की मीटिंग में हिस्सा लेंगे जेटली
- भारतीय डेलिगेशन IMF (इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड) और वर्ल्ड बैंक की एनुअल मीटिंग में भी हिस्सा लेगा। जेटली यूएस, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इंडोनेशिया और स्वीडन के मंत्रियों के साथ बाइलैट्रल मीटिंग करेंगे। वे बांग्लादेश और श्रीलंका के फाइनेंस मिनिस्टर्स के साथ भी मुलाकात कर सकते हैं।
पहले अमेरिकी लोगों को जॉब मिले: ट्रम्प
- ट्रम्प ने H-1B वीजा रूल्स को सख्त बनाने के लिए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करने के साथ ही कहा है, "अमेरिकियों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। कंपनियों को स्किल्ड लोगों को ज्यादा सैलरी देनी होगी। हमारे इमिग्रेशन सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से अमेरिकियों की नौकरियां विदेशी इम्प्लॉइज के हिस्से जा रही हैं। कंपनियां, कम वेतन देकर विदेशियों को जॉब पर रख लेती हैं जिससे अमेरिकंस की नौकरियां मारी जा रही हैं। ये सब अब खत्म होगा।"
- "लंबे समय से अमेरिकी इम्प्लॉइज वीजा प्रोसेस के गलत इस्तेमाल को खत्म करने की मांग करते रहे हैं। अभी H-1B वीजा लॉटरी सिस्टम के तहत दिया जाता है। ये गलत है। वीजा ज्यादा स्किल्ड और हाईएस्ट पेड एप्लीकेंट्स को दिया जाना चाहिए। कंपनियां किसी भी तरीके से अमेरिकन की जगह किसी और इम्प्लॉई को नहीं रख सकतीं। जो पहले हो रहा था, वो नहीं होगा। कंपनियों को फेयर प्रोसेस अपनानी होगी।"
H-1B पर मशक्कत क्यों?
- दरअसल, अमेरिका में बढ़ती बेरोजगारी को दूर करने के लिए H-1B के रूल्स को सख्त बनाने की बात कही जाती रही है। आरोप है कि कई कंपनियां दूसरे देशों से कम सैलरी पर वर्कर अमेरिका लाती हैं। इससे अमेरिकियों को नौकरी मिलने के मौके कम हो जाते हैं और बेरोजगारी बढ़ती है।
- ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के एक अफसर ने कहा, "हमारे देश में भी क्वॉलिफाइड प्रोफेशनल्स हैं, जो कंपनियों की जरूरत पूरी कर सकते हैं।" बता दें कि कुछ दिनों पहले ही ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने एक पॉलिसी मेमोरेंडम जारी किया था। इसमें कहा गया था कि कम्प्‍यूटर प्रोग्रामर्स H-1B वीजा के लिए एलिजिबल नहीं होंगे।
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Web Title: Jaitley takes up H 1B visa issue with US Commerce Secretary
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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