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कराची पहुंची थी चीन की न्यूक्लियर सबमरीन, ग्वादर पोर्ट पर किसी फोर्स की तैनाती हुई तो मुकाबले को पूरी तरह तैयार : नेवी चीफ

dainikbhaskar.com | Dec 02, 2016, 14:44 IST

  • नेवी चीफ ने कहा, बदलते सिक्युरिटी हालात में नेवी ने तैनाती की फिलॉसफी बदल दी है। अब हम पहले से ही किसी भी खतरे का जवाब देने को तैयार रहते हैं।
    नई दिल्ली.इंडियन नेवी चीफ एडमिरल सुनील लांबा ने कहा है कि पाकिस्तान में कराची के करीब ग्वादर पोर्ट पर चीन की न्यूक्लियर सबमरीन और वहीं के सैनिकों की मौजूदगी की खबरें आई थीं। लांबा ने कहा- "इंडियन नेवी इन हरकतों पर पैनी नजर बनाए हुए है और अगर वहां किसी फोर्स की तैनाती हुई तो हम मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" नेवी चीफ ने पाकिस्तान के इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि पाकिस्तान से सटी समुद्री सीमा में भारत ने कोई न्यूक्लियर सबमरीन तैनात की है। हालात बदले इसलिए खतरा ज्यादा...
    - नेवी चीफ ने कहा, "बदलते सिक्युरिटी हालात में नेवी ने तैनाती की फिलॉसफी बदल दी है। अब हम पहले से ही किसी भी खतरे का जवाब देने को तैयार रहते हैं। अपने रीजन में क्या करना है या क्या ठीक रहेगा, इस पर हमारा नजरिया बिल्कुल साफ है।"
    पाकिस्तान के आरोप बोगस
    - पाकिस्तान ने हाल ही में आरोप लगाया था कि भारत की एक न्यूक्लियर सबमरीन कराची के नजदीक देखी गई थी। इस आरोप पर लांबा ने कहा, "पाकिस्तान की नेवी जो दावा किया वो मनगढ़ंत है। किसी भी देश के लिए न्यूक्लियर सबमरीन की किसी खास इलाके में तैनाती और इसका दिखाई दे जाना आसान काम नहीं है।"
    - "हम अपनी सबमरीन की तैनाती वहां करते हैं, जहां इनकी जरूरत है और ये काम जारी रहेगा। साउथ चाइना सी का मसला भी बाकी समुद्री सीमा मसलों और कानूनों के हिसाब से निपटाया जाना चाहिए।"
    पाकिस्तानी अफसर ने ही किया था खुलासा
    - पिछले महीने पाकिस्तान के एक अफसर ने खुलासा किया था कि ग्वादर पोर्ट और 46 अरब डॉलर की लागत से बने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर की सिक्युरिटी में चीन अपने नेवी शिप तैनात करेगा। पाकिस्तान की नेवी उसकी मदद करेगी।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: कैसा है CPEC और चीन-पाकिस्तान को क्या होगा इससे फायदा...
  • पिछले महीने पाकिस्तान के एक अफसर ने खुलासा किया था कि ग्वादर पोर्ट और 46 अरब डॉलर की लागत से बने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर की सिक्युरिटी में चीन अपने नेवी शिप तैनात करेगा।
    कैसा है CPEC और चीन-पाकिस्तान को क्या होगा इससे फायदा...
    - पाकिस्तान के अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की खबर के मुताबिक, चीन और पाकिस्तान मिलकर इस वक्त 3,000 किलोमीटर लंबा इकोनॉमिक कॉरिडोर बना रहे हैं।
    - चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) अरब सागर में मौजूद पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग से जोड़ेगा। इसे तैयार करने का मकसद दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर बनाना है।
    - इस कॉरिडोर से चीन को ऑयल ट्रांसपोर्ट करने के लिए एक सस्ता और नया रास्ता मिलेगा। साथ ही, चीन के प्रोडक्ट मिडल ईस्ट और अफ्रीकी देशों तक पहुंचाने में अासानी होगी।
    - चीन दुनिया में क्रूड ऑयल का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है। अभी चीन आने वाला 80% क्रूड ऑयल मलाका खाड़ी से होते हुए शंघाई पहुंचता है।
    - करीब 16 हजार किमी का सफर तय करने में जहाजों को 3 माह लगते हैं, लेकिन अब यह दूरी 5 हजार किमी तक घट जाएगी।
    तुर्की-चीन से शिप खरीदने की तैयारी
    - अफसर के मुताबिक, पाकिस्तान ग्वादर पर स्पेशल स्क्वॉड्रन भी तैनात करेगा।
    - एक अन्य अफसर के मुताबिक, एक स्क्वॉड्रन में 4 से 6 वॉरशिप हो सकते हैं।
    - अफसर ने यह भी बताया कि पाक नेवी अपने स्पेशल स्क्वॉड्रन के लिए चीन और तुर्की से सुपरफास्ट शिप खरीदने के बारे में सोच रही है।
    भारत के लिए खतरा
    - चीन ने भी ग्वादर में अपने शिप तैनात करने की बात से इनकार नहीं किया है। यह कदम अमेरिका और भारत के लिए खतरे की घंटी है।
    - एक्सपर्ट्स मानते हैं कि CPEC और ग्वादर पोर्ट से पकिस्तान और चीन के बीच सैन्य ताकत बढ़ेगी।
    - इससे चीनी सेना को अरब सागर तक पहुंचने में भी आसानी होगी।
    दिसंबर तक पूरा होगा CPEC का पहला फेज
    - CPEC का पहला फेज इस साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। 3 साल में यह पूरा बनकर तैयार हो जाएगा।
    - पाक आरोप लगाता रहा है कि भारत कॉरिडोर के बनने में मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
    - पाकिस्तान के पूर्व आर्मी चीफ राहिल शरीफ ने पिछले दिनों कहा था, "भारत इस डेवलपमेंट के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है। रॉ (RAW) इस पर नजर रख रही है।"
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Web Title: Navy Chief Sunil Lanba said PLA nuclear submarine deployed at Karachi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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