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बाबरी मस्जिद गिराए जाने से 139 साल पहले भी अयोध्या में हुई थी हिंसा

DainikBhaskar.com | Apr 19, 2017, 20:34 IST

  • 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाई गई। (फाइल)
    नई दिल्ली. अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत बीजेपी के 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश का केस चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की पिटीशन पर यह फैसला सुनाया। 6 दिसंबर, 1992 को मस्जिद ढहाए जाने से 139 साल पहले भी अयोध्या में हिंसा भड़की थी। निर्मोही अखाड़े ने दावा किया था कि बाबर के समय एक मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई थी। ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन ने फेंसिंग हटाकर पूजास्थल को अलग कर दिया...
    - 1853 में नवाब वाजिद अली शाह के समय पहली बार मंदिर को लेकर हिंसा भड़की थी। बताया जाता है कि तब निर्मोही अखाड़े ने दावा किया था कि बाबर के समय एक मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई थी।
    - 1859 में ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन ने फेंसिंग हटाकर पूजास्थल को अलग कर दिया। मुस्लिमों को अंदरूनी तो हिंदुओं को बाहरी हिस्से का इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई।
    - 1885 में महंत रघुबीर दास ने पहला केस दायर किया। इसमें मस्जिद के बाहर राम चबूतरे पर एक छतरी लगाने की परमिशन मांगी गई। फिरोजाबाद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पिटीशन नामंजूर कर दी।
    68 साल पहले रामलला की प्रतिमा मस्जिद में लाई गई
    - 1949 में रामलला की प्रतिमा मस्जिद के अंदर लाई गईं। एक हिंदू ग्रुप पर प्रतिमा को अंदर लाने का आरोप लगा। हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों की तरफ से केस किया गया। सरकार ने पूरे इलाके को विवादित घोषित कर परिसर के गेट पर ताला लगा दिया।
    - 1950 में गोपाल सिंह विषारद और महंत परमहंस रामचंद्र दास ने फिरोजाबाद कोर्ट से जन्मस्थान में पूजा की परमिशन मांगी। चूंकि अंदरूनी हिस्से में ताला था, इसलिए परमिशन दे दी गई।
    - 1959 में निर्मोही अखाड़े ने तीसरा केस दायर किया। इसमें विवादित हिस्से पर हक की मांग की गई। साथ ही रामजन्मभूमि के संरक्षक होने का दावा किया।
    - 1961 में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मस्जिद के अंदर प्रतिमा रखने पर केस दायर किया। साथ ही मस्जिद होने का दावा किया और उसके चारों ओर की जमीन को कब्रिस्तान बताया।
    आडवाणी की अगुवाई में आंदोलन की शुरुआत
    - 1984 में एक हिंदू ग्रुप ने राम मंदिर बनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया। इसी समय लालकृष्ण आडवाणी की अगुवाई में मंदिर आंदोलन ने भी जोर पकड़ा।
    - 1986 में हरिशंकर दुबे नामक शख्स की पिटीशन पर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने मस्जिद के गेट खोलने के ऑर्डर दिए और हिंदुओं के पूजा करने की परमिशन दी। मुस्लिमों ने इसका विरोध किया। इसी दौरान बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनी।
    - 1989 में विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद के बगल वाली जमीन पर राम मंदिर की आधारशिला रख दी। वीएचपी के पूर्व प्रेसिडेंट जस्टिस देवकी नंदन अग्रवाल ने पिटीशन दायर कर पूछा कि क्या मस्जिद को कहीं और ले जाया जा सकता है? फिरोजाबाद कोर्ट में पेंडिंग पड़े 4 केस हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच को ट्रांसफर कर दिए गए।
    - 1990 में वीएचपी वालंटियर्स ने मस्जिद के कुछ हिस्से को नुकसान पहुंचाया। तब पीएम रहे चंद्रशेखर ने आपसी बातचीत से मसले को हल करने की कोशिश की। कोशिश नाकाम रही। इसी दौरान सितंबर में अयोध्या आंदोलन हवा देने के मकसद से आडवाणी ने रथयात्रा निकाली। सोमनाथ से शुरू हुई ये यात्रा अयोध्या में खत्म हुई।
    यूपी में बीजेपी की सरकार आने पर बढ़ा विवाद
    - 1991 में बीजेपी की सरकार बनीं। मंदिर आंदोलन के चलते अयोध्या कारसेवक पहुंचने लगे।
    - 6 दिसंबर 1992 को वीएचपी, बीजेपी और शिवसेना कार्यकर्ताओं ने विवादित बाबरी ढांचा गिरा दिया गया। 16 दिसंबर को पीएम पीवी नरसिम्हाराव ने अयोध्या मामले की जांच के लिए लिब्रहान कमीशन का गठन कर दिया।
    - 2001 में वीएचपी ने एक बार फिर मंदिर बनाने की बात दोहराई।
    - 2002 में गुजरात के गोधरा में एक ट्रेन पर हमला हुआ। माना जाता है कि ट्रेन में अयोध्या से लौट रहे कारसेवक थे। हमले में 58 लोगों की मौत हो गई। इसके चलते गुजरात में दंगे भड़क गए और एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।
    - इसी दौरान हाईकोर्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) से विवादित जगह पर यह जांच करने को कहा कि वहां मंदिर था या नहीं। अप्रैल 2002 में तीन जजों की बेंच ने इस पर सुनवाई शुरू की कि उस जगह का संबंध किससे है।
    मस्जिद के नीचे मंदिर था: ASI
    - 2003 में एएसआई ने बताया कि मस्जिद के नीचे एक मंदिर के सबूत मिले। सितंबर में कोर्ट ने 7 हिंदू नेताओं पर हिंसा भड़काने का केस चलाने को कहा।
    - उस वक्त आडवाणी डिप्टी पीएम थे, लिहाजा उनपर कोई चार्ज नहीं लगा।
    - 2004 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी। एक यूपी की अदालत ने कहा कि आडवाणी को दोषी नहीं बताने वाले ऑर्डर का रिव्यू होना चाहिए।
    लिब्रहान कमीशन की रिपोर्ट में बीजेपी नेताओं पर आरोप
    - जून 2009 में लिब्रहान कमीशन ने अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें विवादित ढांचा ढहाने में बीजेपी नेताओं को जिम्मेदार बताया गया। रिपोर्ट पर संसद में काफी हंगामा हुआ।
    - 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसले में विवाद जगह के 3 हिस्से करने को कहा। एक तिहाई हिस्सा राम लला (हिंदू महासभा), एक तिहाई सुन्नी वक्फ बोर्ड और एक तिहाई निर्मोही अखाड़े को देने का आदेश दिया। इसको लेकर दिसंबर में हिंदू महासभा और वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट चले गए।
    - मई 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के ऑर्डर पर स्टे देते हुए यथास्थिति बनाने की बात कही।
    मोदी के सत्ता में आने के बाद मंदिर आंदोलन में तेजी आई
    - 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की बहुमत की सरकार आई। 2015 में वीएचपी ने मंदिर के लिए पूरे देश से पत्थर इकट्ठा करने की बात कही। दिसंबर में दो ट्रक पत्थर अयोध्या पहुंचाए गए। महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि मोदी सरकार ने मंदिर बनाने को हरी झंडी दे दी है।
    - मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद ढहाने के मामले में आडवाणी समेत दूसरे नेताओं का नाम हटाया नहीं जाएगा।
    - 21 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर विवाद कोर्ट से बाहर आपसी सहमति से हल होना चाहिए।
  • 2003 में एएसआई ने बताया कि मस्जिद के नीचे एक मंदिर के सबूत मिले। (फाइल)
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Web Title: ram mandir babri masjid dispute first recorded violence in 1853
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