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SC ने सहारा-बिड़ला डायरी मामले में जांच की मांग करती पिटीशन खारिज की, राहुल-केजरी ने मोदी पर लगाए थे पैसे लेने के आरोप

Dainikbhaskar.com | Jan 12, 2017, 09:38 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए सबूत होने भी जरूरी हैं।

नई दिल्ली. ​सुप्रीम कोर्ट ने दो कारोबारी घरानों से पैसे लेने के आरोपों पर नरेंद्र मोदी और दूसरे नेताओं के खिलाफ एसआईटी जांच की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा- इनकम टैक्स सैटेलमेंट कमीशन ने भी शुरुआती जांच में पाया था कि सहारा के यहां से जो मेटैरियल पाया गया है वो बनावटी है। बता दें कि कुछ दिन पहले राहुल गांधी ने मोदी का नाम इस डायरी में होने के आरोप लगाए थे। मोदी के अलावा कुछ और नेताओं के नाम होने के भी आरोप लगे थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आरोपों की जांच के लिए पुख्ता सबूत होना जरूरी है। एक एनजीओ के जरिए प्रशांत भूषण ने इस मामले में पिटीशन दायर की थी। और क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने...
- कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि शीट्स, पेपर्स और ई-मेल प्रिंट आउट्स साधारण चीजें है, इन्हें दस्तावेजी सबूत नहीं माना जा सकता। और इनके आधार पर किसी के खिलाफ एफआईआर या जांच के ऑर्डर नहीं दिए जा सकते।
- कोर्ट ने आगे कहा कि इनकम टैक्स सैटलमेंट फंक्शनरीज पहले ही उन दस्तावेजों को बनावटी बता चुकी हैं।
नई बेंच ने की सुनवाई
- बुधवार को इस केस की सुनवाई जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अमिताव रॉय की नई बेंच ने की। बेंच ने कहा- केस दर्ज करने का ऑर्डर देने से पहले सबूतों का भरोसेमंद होना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि बेतरतीब कागजों का सबूत नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने दिसंबर में भी मांगे थे सबूत
- 17 दिसंबर को भी सहारा-बिरला डायरी मामले की पिटीशन पर सुनवाई हुई थी।
- तब जस्टिस जेएस खेहर ने पिटीशनर प्रशांत भूषण से पूछा था कि आपने जिन ठोस सबूतों को कोर्ट में पेश करने का दावा किया था, वो कहां हैं?
- इस पर प्रशांत भूषण ने कहा था कि उन्हें आयकर विभाग से तीन तरह के डॉक्यूमेंट्स मिले हैं, जिसमें उन्होंने दो तरह के पढ़ लिए हैं और एक को पढ़ा जाना बाकी है। उन्होंने और वक्त दिए जाने की मांग की थी।
- इस पर कोर्ट ने कहा था कि आपको पहले ही काफी वक्त दिया जा चुका है। अगर आप ठोस सबूत नहीं दे सकते तो आपकी पिटीशन को खारिज कर दिया जाएगा।
राहुल ने मोदी पर क्या आरोप लगाए थे?
- राहुल ने पिछले महीने गुजरात के मेहसाणा में रैली के दौरान कहा था, "सहारा ने बीते 6 महीने में मोदी को 9 बार पैसे दिए। सहारा के यहां रेड पड़ी थी। वहां से बरामद हुए रिकॉर्ड में इसका जिक्र था।"
- "सहारा के रिकॉर्ड में लिखा था, 30 अक्टूबर 2013 ढाई करोड़ रुपए मोदी जी को दिया।"
- "इसके बाद 12 नवंबर 2013 को पांच करोड़, 27 नवंबर को ढाई करोड़, 29 नवंबर को भी ढाई करोड़। 6 दिसंबर को 5 करोड़, 19 दिसंबर 2013 को पांच करोड़, 13 जनवरी 2014 को 5 करोड़, 28 जनवरी 2014 को 5 करोड़ और 22 फरवरी, 2014 को भी 5 करोड़।"
- "इस तरह कुल नौ बार पैसे दिए गए। 6 महीने में 9 बार सहारा ने मोदी को पैसे दिए। और ये एक डायरी में लिखा है।"
क्या है डायरीगेट?
- सहारा-बिरला ग्रुप पर आयकर विभाग के छापों के दौरान कुछ डायरियां मिलीं थीं। इनमें कथित रूप से कुछ नेताओं से लेनदेन का ब्योरा दर्ज था।
- इन्हीं डायरियों को आधार बनाकर भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन दायर की थी।
- उनका कहना था कि आयकर विभाग के छापे के दौरान जब्त एक डायरी में सीएम गुजरात, अहमदाबाद मोदी जैसे नामों से कुछ एंट्री थीं। इनमें कुल 55 करोड़ रुपए के पेमेंट का जिक्र था।
- एंट्री में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्रियों और बीजेपी की महाराष्ट्र यूनिट की एक नेता का नाम भी कथित तौर पर शामिल बताया गया था।
डायरी में किन दलों के नेताओं के नाम?
- इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि डायरी में बीजेपी और कांग्रेस समेत जेडीयू, आरजेडी, सपा, एनसीपी, जेएमएम, जेवीएम, टीएमसी, बीजेडी, बीकेयू, शिवसेना और एलजेपी के नेताओं के नाम दर्ज हैं।
- डायरी के दो पेज में नेताओं के नाम वाली 2 लिस्ट है। जिसमें कुल 54 नाम हैं।
- दो हैंडरिटेन पेज और एक अन्य प्रिंटेड पेज में पुराने नामों को ही लिखा गया है।
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(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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