Home »National »Latest News »National » Supreme Court On Ayodhya Dispute: Both Parties Must Sit Together And Sort It Outside Court

अयोध्या पर बातचीत से आम राय बनाएं: SC; स्वामी बोले- सरयू पार बने मस्जिद

DainikBhaskar.com | Mar 21, 2017, 19:14 IST

इस मामले में स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से अर्जेंट हियरिंग की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यह संवेदनशील मुद्दा है और इस पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर विवाद का कोर्ट के बाहर निपटारा करने पर जोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि इस पर सभी संबंधित पक्ष मिलकर बैठें और आम राय बनाएं। बातचीत नाकाम रहती है तो हम दखल देंगे। दूसरी तरफ, सुब्रमण्यम स्वामी ने अयोध्या विवाद के हल के लिए एक फॉर्मूला सुझाया। कहा- मस्जिद सरयू नदी के पार बनाई जानी चाहिए। जबकि मंदिर वहीं बनना चाहिए, जहां रामलला विराजे हैं। वहीं, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के जफरयाब जिलानी ने कहा- 1986 से अब तक हुई बातचीत बेनतीजा रही है। लिहाजा आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट मुमकिन नहीं है। सऊदी अरब और दूसरे मुस्लिम देशों में भी तो यही होता है...
- पार्लियामेंट के बाहर मीडिया से बातचीत में बीजेपी सांसद स्वामी ने कहा, “मंदिर और मस्जिद दोनों बननी चाहिए। मसला हल होना चाहिए। मस्जिद सरयू नदी के दूसरी तरफ बनना चाहिए। जबकि मंदिर वहीं बनना चाहिए, जहां अभी वो है। राम जन्मभूमि तो पूरी तरह राम मंदिर के लिए ही है। हम राम का जन्मस्थल तो नहीं बदल सकते।”
- बीजेपी सांसद ने दलील दी कि सऊदी अरब और मुस्लिम देशों में मस्जिद का मतलब होता है, वो जगह यहां नमाज अदा की जाए और ये काम कहीं भी हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
1) सुब्रमण्यम स्वामी ने क्या कहा?
- पिटीशनर स्वामी ने कोर्ट से कहा कि छह साल से ज्यादा वक्त हो चुका है। इसलिए इस पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है। स्वामी ने यह भी कहा कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों से बातचीत की थी। उनका कहना था कि इस मसले के हल के लिए ज्यूडिशियरी के दखल की जरूरत है।
- अपनी पिटीशन में स्वामी ने दावा किया था कि इस्लामिक देशों में मौजूद प्रैक्टिस के मुताबिक, किसी भी मस्जिद को सड़क बनाने जैसे काम के लिए दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जा सकता है। जबकि मंदिर अगर एक बार बन जाता है तो उसे दूसरी जगह नहीं ले जाया जा सकता।
- स्वामी ने इस मामले में अर्जेंट हियरिंग की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यह संवेदनशील मुद्दा है और इस पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है।
2) सुप्रीम काेर्ट ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने कहा कि यह मुद्दा सेंसिटिव और सेंटिमेंटल है। बेहतर यही होगा कि इसका आपसी रजामंदी से हल निकले। इस विवाद का बातचीत के जरिए ऐसा हल निकालें, जिस पर सारे पिटीशनर्स और रिस्पॉन्डेंट्स राजी हों।
3) मीडिएटर्स पर बेंच ने क्या सुझाव दिया?
-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी पक्ष इस मसले को सुलझाने की नई कोशिशों के लिए मीडिएटर्स को चुन लें। अगर जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी एक प्रिंसिपल मीडिएटर चुन सकता है।
- चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि अगर सभी संबंधित पक्ष ये चाहेंगे कि वे इस मुद्दे पर मीडिएट करें तो वे मध्यस्थ बनने को तैयार हैं। जरूरत पड़ने पर मेरे साथी जजों की भी मदद ली जा सकती है।
-बेंच ने स्वामी से कहा कि वे इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा करें और बातचीत शुरू करने को लेकर होने वाले फैसले के बारे में कोर्ट को 31 मार्च तक सूचित करें।
क्या है सरकार और RSS का स्टैंड?
- मोदी सरकार ने बार-बार यही कहा है कि राम मंदिर को संविधान के दायरे में रहकर ही बनाया जा सकता है।
- वहीं, यूपी असेंबली इलेक्शन में बीजेपी को मिली बड़ी जीत को आरएसएस नेता एमजी वैद्य ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मैन्डेट बताया था। चुनाव नतीजों के बाद वैद्य ने कहा था- बीजेपी के मैनिफेस्टो में भी अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे का जिक्र है। इसलिए ये माना जाना चाहिए कि राम मंदिर बनाने को लेकर जनता ने अपनी मंजूरी दे दी है। अगर सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को हल नहीं कर पाता है तो एनडीए सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए कानून बनाना चाहिए।
क्या है राम मंदिर का मुद्दा?
- राम मंदिर मुद्दा 1989 के बाद अपने उफान पर था। इस मुद्दे की वजह से तब देश में सांप्रदायिक तनाव फैला था। देश की राजनीति इस मुद्दे से प्रभावित होती रही है।
- हिंदू संगठनों का दावा है कि अयोध्या में भगवान राम की जन्मस्थली पर बाबरी मस्जिद बनी थी। मंदिर तोड़कर यह मस्जिद 16वीं शताब्दी में बनवाई गई थी।
- राम मंदिर आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिरा दिया गया था। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या दिया था फैसला?
- 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल, एस यू खान और डी.वी. शर्मा की बेंच ने मंदिर मुद्दे पर अपना फैसला भी सुनाते हुए अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था।
- बेंच ने तय किया था कि जिस जगह पर रामलला की मूर्ति है, उसे रामलला विराजमान को दे दिया जाए। राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह निर्मोही अखाड़े को दे दी जाए। बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में मामला क्यों पहुंचा?
- हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अयोध्या की विवादित जमीन पर दावा जताते हुए रामलला विराजमान की तरफ से हिन्दू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की।
- दूसरी तरफ, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद कई और पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन्स दायर कर दी।
- इन सभी पिटीशन्स पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई, 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। तब से ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है।
केस से जुड़े हजारों कागजात
- केस से जुड़े हजारों कागजात सुप्रीम कोर्ट में जमा किए गए हैं। इनमें अरबी, फारसी और संस्कृत में भी कागजात शामिल हैं। इनका अनुवाद भी किया जाना है। कागजात के डिजिटलाइजेशन में भी लंबा वक्त लगता है।
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App
Web Title: Supreme Court on Ayodhya Dispute: Both Parties Must Sit Together And Sort It Outside Court
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।
 

Stories You May be Interested in

      More From National

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top