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तीन तलाक पर मुस्लिम बोर्ड काजियों को देगा सलाह, SC ने रिजर्व रखा फैसला

DainikBhaskar.com | May 18, 2017, 19:10 IST

  • बुधवार को चीफ जस्टिस खेहर ने कहा क्या महिलाओं के लिए नया निकाहनामा बन सकता है, जिसमें वह तीन तलाक को नकार सके। (फाइल)
    नई दिल्ली. तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को छठे दिन सुनवाई पूरी हो गई। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। हालांकि, कोर्ट ने फैसला सुनाने की अगली तारीख नहीं बताई। इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मान लिया कि वह निकाहनामे में महिलाओं की राय जानने के लिए काजियों को एक एडवायजरी जारी करेगा। बुधवार को पांचवें दिन की सुनवाई के दौरान तीन तलाक समर्थकों और विरोधियों की दलीलें पूरी हो गईं। अब दोनों पक्षों के बीच जिरह शुरू हो गई है। छठे दिन सुप्रीम कोर्ट में किसने क्या कहा...
    कपिल सिब्बल, AIMPLB के वकील: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड काजियों को एडवायजरी जारी करेगा कि तीन तलाक पर न सिर्फ महिलाओं का मशविरा लिया जाए, बल्कि उसे निकाहनामे में भी शामिल किया जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट को तीन तलाक की वैलिडिटी जानने के मसले में नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि किसी कम्युनिटी के रीति-रिवाजों की वैलिडिटी बहुत नाजुक मसला है।
    सुप्रीम कोर्ट: कोई चीज मजहब के हिसाब से गुनाह है तो वह किसी कम्युनिटी की रिवाज का हिस्सा कैसे बन सकती है?
    अमित चड्ढा, मेन पिटीशनर शायरा बानो के वकील: इस्लाम ने कभी औरत और मर्द में भेदभाव नहीं किया। मेरी राय में तीन तलाक एक पाप है। यह मेरे और मुझे बनाने वाले (ईश्वर) के बीच में रुकावट है।
    बुधवार को क्या हुआ?
    - पांच जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच ने केंद्र सरकार से कहा था, "आप कहते हैं कि अगर कोर्ट ट्रिपल तलाक को अमान्य घोषित कर दे तो आप कानून बनाएंगे, लेकिन सरकार ने पिछले 60 साल में कोई कानून क्यों नहीं बनाया?"
    - केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जवाब दिया था, "सेकुलर कोर्ट की खासियत ये थी कि जब ऐसे मसले उसके सामने आएं तो कानून का इंतजार किए बगैर वो सुधार करे। मैं वो करूंगा जो मुझे करना चाहिए, पर सवाल ये है कि आप (कोर्ट) क्या करेगी? मैंने निर्देशों के हिसाब से बयान दिया है। शीर्ष अदालत मौलिक अधिकारों की रक्षक है और इसे देखना चाहिए कि क्या कहीं इन अधिकारों का हनन तो नहीं हो रहा है।"
    ऐसे चली थी सुनवाई
    - सिब्बल: लोग तीन तलाक भूल रहे हैं। कोर्ट ने कोई फैसला दिया तो यह मरणासन्न परम्परा फिर जिंदा हो उठेगी।
    - चीफ जस्टिस खेहर:क्या महिलाओं के लिए नया निकाहनामा बन सकता है, जिसमें वह तीन तलाक को नकार सके।
    - यूसुफ मुचाला (बोर्ड के वकील): सुझाव अच्छा है। बोर्ड इस पर विचार करेगा। बोर्ड काजियों को सिर्फ सुझाव दे सकता है। अमल करना उनके ऊपर है।
    - सिब्बल:आज अल्पसंख्यकों की हालत उस चिड़िया जैसी है, जिसे गोल्डन ईगल दबोचना चाहता है। उम्मीद है कि चिड़िया को घोंसले तक पहुंचाने के लिए कोर्ट न्याय करेगा।
    - राजू रामचंद्रन (जमीयत उलेमा-ए-हिंद के वकील): अगर किसी को मुस्लिम पर्सनल लॉ, तीन तलाक और बहुविवाह में खामी नजर आती है तो सरकार लोगों को जागरूक करे। सेक्युलर कोर्ट द्वारा किसी की धार्मिक मान्यताओं और आस्थाओं को गलत बताना सही नहीं होगा।
    - वी गिरी (बोर्ड के वकील):मुस्लिम पर्सनल लॉ कुरान और हदीस पर आधारित है। मुस्लिमों के लिए कुरान खुदा द्वारा कहे शब्द हैं। यही उनका कानून है।
    - जस्टिस आरएफ नरीमन: तीन तलाक में से पहले दो अहसान और हसन का जिक्र कुरान में है। पर तीसरे तलाक-ए-बिद्दत का जिक्र नहीं है। पहले दो तलाक सुन्नत का हिस्सा हैं, जबकि तीसरा सुन्नत विरोधी। यह प्रथा है। इस पर कोर्ट सुनवाई कर सकता है।
    - चीफ जस्टिस: पर्सनल लॉ शरीयत कानून 1937 पर आधारित है। इसमें कानूनी तरीके से तलाक का प्रावधान है। फिर कोर्ट में तलाक लेने क्यों नहीं जाते?
    - बदर सईद (एक पक्षकार के वकील):तीन तलाक पर्सनल लॉ पर आधारित है। इसके तहत कोर्ट का कोई विकल्प नहीं है। आपको यह मामला नहीं देखना चाहिए।
    - चीफ जस्टिस: कोई कानूनी मामला कोर्ट में आता है तो यह हम तय करेंगे कि विचार करना है या नहीं।
    - केंद्र ने कहा- कोर्ट 1400 साल पुरानी परम्पराएं न देखे, यह देखे कि संविधान कैसे बना; परम्परा के नाम पर कोई नरबलि नहीं दे सकता।
    सरकार ने दी थी ये दलीलें
    > 25 देशों में ट्रिपल तलाक नहीं तो ये इस्लाम का हिस्सा कैसे?
    - रोहतगी ने कहा, "अगर 25 देशों में तीन तलाक का सिस्टम नहीं है तो इसे इस्लाम का अहम हिस्सा नहीं कहा जा सकता। अगर पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक को ऑप्शनल, पाप और गलत बताता है कि तो फिर यह इस्लाम का अलग न हो पाने वाला हिस्सा कैसे हो सकता है?"
    > सती और देवदासी प्रथा को कानून बनाकर खत्म किया
    - रोहतगी ने कहा कि एक समय हिंदुस्तान में सती प्रथा, दासी प्रथा और अछूत जैसी बाते थीं। इस पर बेंच ने कहा, "क्या इन प्रथाओं को कोर्ट ने खत्म किया है? इन्हें कानून बनाकर खत्म किया गया।"
    - रोहतगी ने कहा, "तब कोर्ट विशाखा के मामले में क्यों गई? कोर्ट ये नहीं कह सकती कि वो असहाय है और हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। कोर्ट मौलिक अधिकारों की रक्षक है।"
    > ये मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं के बीच की लड़ाई
    - मुकुल रोहतगी ने कहा, "ट्रिपल तलाक का मसला मुस्लिम समुदाय के भीतर की लड़ाई है। ये मुस्लिम पुरुष जो ज्यादा ताकतवर, पढ़े लिखे हैं और मुस्लिम महिलाओं जो कि उतनी ताकतवर नहीं हैं और अशिक्षित हैं... उनके बीच की लड़ाई है।"
    AIMPLB से सुप्रीम कोर्ट के 2 सवाल
    1- क्या निकाहनामे के दौरान महिला तीन तलाक को न कह सकती है? चीफ जस्टिस जीएस खेहर ने सिब्बल से पूछा- क्या ये संभव है कि महिला को निकाह से पहले ये ऑप्शन दिया जाए कि उसकी शादी तीन तलाक के जरिए खत्म नहीं होगी?
    2- क्या काजियों को निकाह के वक्त इस कंडीशन को शामिल करने के लिए कहा जा सकता है?
    बेंच में कितने जज?
    - बेंच में चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं।
    - इस बेंच की खासियत यह है कि इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी धर्म को मानने वाले जज शामिल हैं।
    - इस मसले का जल्द निपटारा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गर्मी की छुटि्टयों में रोज सुनवाई की शुरुआत हुई है।
    कितनी पिटीशन्स दायर हुई हैं?
    - मुस्लिम महिलाओं की ओर से 7 पिटीशन्स दायर की गई हैं। इनमें अलग से दायर की गई 5 रिट पिटीशन भी हैं। इनमें दावा किया गया है कि तीन तलाक अनकॉन्स्टिट्यूशनल है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Triple Talaq Case Supreme Court Reserves its Verdict, Day 6 Hearing Live Updates
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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