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गुजरात में BJP का मिशन 150, 22 साल में पहली बार नहीं होगा कोई CM कैंडिडेट

Tikendra Raval | Mar 20, 2017, 20:42 IST

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गुजरात में 2012 में इलेक्शन हुए थे। दिसंबर में पांच साल पूरे हो जाएंगे। ( फाइल)

अहमदाबाद.यूपी में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद गुजरात में पार्टी ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी नेताओं के बीच दो फॉर्मूले पर सहमति बनती दिख रही है। पहला- पार्टी इस बार सीएम कैंडिडेट का एलान नहीं करेगी। अगर ऐसा होता है तो 1995 के बाद पहली बार पार्टी बिना सीएम फेस के चुनाव लड़ेगी। दूसरा- अगर पार्टी चुनाव में जीत दर्ज करती है तो डिप्टी सीएम की पोस्ट को बनाया जाएगा। दरअसल, पार्टी पूरा इलेक्शन यूपी की तर्ज पर लड़ना चाहती है। यही वजह है कि बीजेपी ने 'यूपी में 300, गुजरात में 150' का स्लोगन दिया है। उधर, तय वक्त से पहले चुनाव कराए जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस भी तैयारी में जुट गई है। बता दें कि गुजरात में 2012 में इलेक्शन हुए थे। दिसंबर में पांच साल पूरे हो जाएंगे।बीजेपी में बढ़ी गुटबाजी...
- बीजेपी के सूत्रों ने DivyBhaskar.com को बताया कि सीएम कैंडिडेट का एलान नहीं करने की बड़ी वजह पार्टी में बढ़ती गुटबाजी है।
- बीजेपी आलाकमान नहीं चाहता है कि किसी एक के नाम पर चुनाव लड़ा जाए। अगर ऐसा किया जाता है तो पार्टी में भितरघात हो सकता है। इससे पार्टी को नुकसान होगा।
- पार्टी ने यूपी में बिना फेस के चुनाव लड़ा था। बीजेपी अलायंस ने 325 सीट पर जीत दर्ज की, जिसमें पार्टी की 312 सीट हैं।
22 साल बाद पार्टी का सीएम कैंडिडेट नहीं होगा
- बीजेपी गुजरात में पहली बार 1995 में सत्ता में आई थी। तब पार्टी ने बिना सीएम कैंडिडेट का एलान किए चुनाव लड़ा था। जीत के बाद केशुभाई पटेल को सीएम बनाया गया था।
जुलाई या सितंबर में हो सकते हैं इलेक्शन
- एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ऐसी अटकलें हैं कि जुलाई या सितंबर में चुनाव कराया जा सकता है।
- दूसरी तरफ, सीएम विजय रूपानी ने कहा कि पार्टी को पांच साल के लिए जनादेश मिला है और सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि दिसंबर में ही चुनाव कराए जाएंगे।
बीजेपी के सामने 4 चैलेंज
- इस बार मोदी के गढ़ में बीजेपी को कई चैलेंज का सामना करना पड़ सकता है।
1. पटेल आरक्षण अहम है। पटेल राज्य में ओबीसी का दर्जा चाहते हैं। कम्युनिटी लंबे वक्त से आंदोलन कर रही है।
2. दलित कम्युनिटी पर हमले का मुद्दा भी बड़ा है। पिछले दिनों गौरक्षा के नाम पर दलितों पर हुए हमले भी पार्टी के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं।
3. बीजेपी के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी फैक्टर भी है। गुजरात में 19 साल से लगातार बीजेपी की सरकार है।
4. मोदी के दिल्ली जाने के बाद पार्टी राज्य स्तर पर एक ताकतवर नेता की कमी से भी जूझ रही है।
अटकलें क्यों लगाई जा रही हैं?
- ऐसा कहा जा रहा है कि यूपी में जीत के बाद नरेंद्र मोदी के लिए 2019 आम चुनाव के पहले गुजरात में इलेक्शन जीतना अहम है।
- पार्टी ने इसके लिए 'यूपी में 300, गुजरात में 150' का नारा दिया है। इसके साथ ही पार्टी ने 182 मेंबर वाली असेंबली में 150 सीट पर जीत हासिल करने का टारगेट तय किया है।
- राज्य के बडे शहरों में मोदी और शाह की फोटोज और नारों वाले बैनर और पोस्टर लगा दिए गए हैं और पर्चे बांटे गए हैं।
कांग्रेस ने तैयारियां शुरू की
- गुजरात में विपक्ष के नेता शंकरसिंह वाघेला ने कहा कि कांग्रेस इस बात के लिए तैयार है कि राज्य सरकार कभी भी चुनावों का एलान कर सकती है। चुनावों के मद्देनजर कैंडिडेंट्स के सिलेक्शन की प्रॉसेस शुरू कर दी गई है।
आम आदमी पार्टी भी मैदान में
- पंजाब इलेक्शन की तरह गुजरात में भी आम आदमी पार्टी मैदान में होगी। कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
- पार्टी के गुजरात इंचार्ज गोपाल राय ने कहा- "समय से पहले चुनाव कराना बीजेपी का गेम प्लान है। वे हमसे डरे हुए हैं। उन्हें लगता है कि अगर चुनाव जल्द हुए तो AAP को तैयारी करने के लिए वक्त नहीं मिलेगा।"
असेंबली में अभी क्या स्थिति है?
- कुल 182 सीटें हैं
- BJP: 123
- INC: 56
- NCP: 2
- JD(U): 1
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Web Title: Would BJP go for early polls in Gujarat
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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