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चीन ने पीछे हटने से किया इनकार, भारत और सेना भेजेगा लद्दाख

एजेंसी | Apr 24, 2013, 11:00 AM IST

नई दिल्ली/बीजिंग। लद्दाख में चीन के सैनिकों की घुसपैठ को लेकर मामला और गरमा गया। चीन ने अपनी पिछली स्थिति पर लौटने की भारतीय मांग मानने से मना कर दिया। इसके बाद भारत ने लद्दाख के इस दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में और सेना भेजने का निर्णय किया है। इससे पहले वहां आईटीबीपी की लद्दाख स्काउट टीम भेजी जा चुकी है जो पहाड़ी युद्ध में विशेषज्ञ है। सेना अध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह बुधवार को लद्दाख क्षेत्र का दौरा करेंगे। (पढ़ें, युद्ध के 50 साल बाद भी चीन सीमा विवाद जस का तस)
दोनों देशों के बीच मंगलवार को करीब तीन घंटे ब्रिगेडियर स्तर पर फ्लैग मीटिंग हुई। लेकिन इसमें कोई नतीजा नहीं निकला। चीन की दलील थी कि वह अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में है। भारत ने स्पष्ट किया कि यह अप्रैल 2005 के समझौते का उल्लंघन है। इससे पहले बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनइंग ने कहा कि दोनों देशों को सीमा विवाद सुलझा लेना चाहिए, ताकि रिश्ते और मधुर हो सकें। उन्होंने कहा कि चीन की सेना नियंत्रण रेखा संबंधी समझौते का पालन कर रही है। मिलिट्री इंटेलीजेंस रिपोर्ट में बताया गया है कि तकरीबन छह हजार फुट की ऊंचाई पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के 40 से 45 जवान लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में 15 अप्रैल से डेरा डाल रखा है।
चीनी सेना के हेलिकॉप्टर उनको रसद-पानी पहुंचा रहे हैं। इस रिपोर्ट पर रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा और सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह में बातचीत हुई है। सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री एके एंटनी ने भी इस विषय पर प्रधानमंत्री से बात की है। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद से भी इस विषय में बातचीत हुई है। सूत्रों ने यह भी बताया है कि सेना प्रमुख खुद बुधवार को जम्मू जाएंगे और वहां से लद्दाख होते हुए एलएसी का दौरा करेंगे, ताकि सही स्थिति का पता चल पाए और भारतीय सेना का मनोबल बढ़े तथा चीन पर भी दबाव बने। जनरल सिंह ने इस मामले में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी जानकारी हासिल की है।
उधर, विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि इस समस्या का कूटनीतिक समाधान निकल जाएगा क्योंकि दोनों मुल्कों के बीच बेहतर संबंध तेजी से स्थापित हो रहे हैं। लेकिन रक्षा मंत्री एंटनी ने साफ कहा है कि भारत अपने हितों और सीमाओं की रक्षा करने को तैयार है। जाहिर है, इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी यह साफ कर दिया कि पूर्व की स्थिति चीन बहाल करे। विदेश सचिव रंजन मथाई ने चीन के राजदूत को भारत के विरोध से अवगत करा दिया है और बीजिंग में भारत के राजदूत ने भी वहां की सरकार को भारत की स्थिति से अवगत करा दिया है। संसद में रक्षा मामलों की स्थायी समिति, जिसके चेयरमैन राजबब्बर हैं, ने सीमा पर हो रही चीनी हरकत पर पूरी रिपोर्ट मांगी है। यही नहीं, ऐसे संकेत भी हैं कि संसदीय समिति सेना प्रमुख को इस विषय में पूरी जानकारी देने के लिए तलब कर सकती है।
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Web Title: China to build second, larger carrier: report
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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