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दो दिन की हड़ताल से 20 हजार करोड़ रुपये का होगा महानुकसान

dainikbhaskar.com | Feb 20, 2013, 07:33 IST

  • NOIDA
    नई दिल्ली.ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का आज दूसरा दिन है। हड़ताल की वजह से बुधवार की तरह आज भी लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। दिल्‍ली में ऑटो-टैक्‍सी नहीं चल रहे हैं तो कई शहरों में बसों की हड़ताल से जनजीवन ठहर सा गया है। मारुति, हीरो, सुजुकी जैसी प्राइवेट कंपनियां भी आज के बंद में शामिल हो रही हैं। बहुत लोगों ने शिकायत की है कि एसबीआई के एटीएम में पैसे खत्‍म हो गए हैं।
    बुधवार को 11 केंद्रीय मजदूर यूनियनों की ओर से बुलाए गए दो दिनों के बंद की शुरुआत हिंसा से हुई और देश के अलग-अलग इलाकों से हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ (देखें तस्‍वीरें) की खबरें आती रहीं। एसोचैम ने बंद के पहले दिन 26,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अंदाज लगाया है। बंद के दूसरे दिन मारुति, हीरो मोटोकॉर्प और सुजुजी इंडिया लिमिटेड के कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है। हरियाणाके अंबाला में ट्रेड यूनियन नेता नरेंद्र सिंह काका की अम्बाला रोडवेज डिपो में बस व गेट पिल्लर के बीच फंसने से मौत हो गई। नरेंद्र सिंह ट्रेड यूनियन एआईटीयूसी के कोषाध्यक्ष थे।
    हालांकि एआईटीयूसी के महासचिव गुरुदास दासगुप्ता ने इसे हत्बाया बताया है। उन्होंने कहा, 'अंबाला बस स्टैंड के पास कुछ असामाजिक तत्वों ने नरेंद्र की हत्या कर दी। हत्या करने वाले हड़ताल के बावजूद बस डिपो से बस ले जाना चाहते थे। बस रोकने के चक्कर में नरेंद्र बस की चपेट में आ गया'। (सबसे बड़ी हड़ताल का दिल्ली पर बड़ा 'असर') नरेंद्र सिंह की मौत पर अंबाला में दिन भर तनाव रहा। रोडवेज यूनियन ने नरेंद्र सिंह के परिवार के लिए 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। लेकिन बुधवार शाम को हरियाणा सरकार ने मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने पर भी विचार करने का भरोसा दिलाया। (तस्‍वीरों में देखि‍ए भारत बंद का नजारा, लोग सड़कों पर उतरे)
    हड़ताल के दौरान उत्तर प्रदेश के नोएडा भी जमकर तोड़फोड़ हुई।इस दौरान सरकारी वाहनों को सबसे पहले निशाना बनाया गया। आम राहगीरों को पीटा गया। नोएडा फेज-टू में सीटू समर्थक हड़ताल के दौरान भड़क गए और उन्होंने कई वाहनों में आग लगा दी। सीटू समर्थकों ने यहां से गुजरने वाले लोगों को इन कार्यकर्ताओं ने अपना निशाना बनाया। इन कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने नोएडा फेज-टू के हौजरी कांप्‍लेक्‍स की करीब 400 फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की। इस घटना में 15-20 लोग घायल हुए। फेज-टू के सीओ की गाड़ी भी प्रदर्शनकारियों ने जला दी। नोएडा के सेक्टर-63 में भी तोड़फोड़ हुई। नोएडा के सेक्‍टर 57 और लेबर चौक के आसपास के ऑफिसों में हड़ताल समर्थकों ने जमकर उत्‍पात मचाया। कई ऑफिसों के शीशे तोड़ दिए गए। जिसके बाद इन ऑफिसों को बंद कर दिया गया। कई जगह कर्मचारियों ने वाहनों में आग लगा दी। नोएडा फेज-टू में हुई इस हिंसा के बाद यहां काफी तनाव का माहौल बना रहा। प्रशासन ने एहतियातन नोएडा फेज-टू और अन्‍य कई इलाकों में सुरक्षा को कड़ा कर दिया। नोएडा पुलिस के अलावा गाजियाबाद से भी पुलिस बल को बुलाया गया। एडीजी (एनसीआर) ओपी सिंह ने एहतियातन नोएडा पहुंचकर खुद हालात का जायजा लिया। कई प्रदर्शनकारियों पर गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
    वरिष्‍ठ माकपा नेता वृंदा करात ने हिंसा की घटनाओं की निंदा की। इंटक अध्‍यक्ष संजीवा रेड्डी ने कहा कि हम शांतिपूर्वक हड़ताल कर अपनी बात सरकार तक रखना चाहते हैं, लेकिन ऐसी हिंसा के हम कतई पक्षधर नहीं है। यह सही नहीं है। हमें अफसोस है और ऐसा नहीं होना चाहिए था। इस घटना की संगठन जांच-पड़ताल करेगा और संगठन के संबंधित पदाधिकारियों से इस बाबत जवाब मांगा जाएगा।
    आगे की स्लाइड में पढ़िए, दो दिनों की हड़ताल से देश को लगेगा कितना चूना और यूपी में क्या है हड़ताल का असर:
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  • सरकार से बातचीत नाकाम होने के बाद बुलाए गए दो दिनों के बंद का असर (देखें तस्‍वीरें)देश के बड़े हिस्से में देखा गया। हड़ताल की मार लाखों लोगों पर पड़ी। देश की राजधानी दिल्ली में ऑटो-टैक्सी पूरी तरह से बंद रहे। यहां करीब 70 हजार ऑटो वाले और 15 हजार टैक्सी वाले हड़ताल पर रहे।
    नई दिल्ली रेलवे स्टेशनपर यात्री ऑटो-टैक्सी के लिए भटकते रहे। स्टेशन पर ऑटो-टैक्सी के प्रीपेड काउंटर तो खुले रहे, लेकिन यहां यात्रा के लिए जरूरी कूपन नहीं मिले। मुसाफिरों की इन्हीं दिक्कतों को देखते हुए कुछ टैक्सी वालों ने मनमाना किराया वसूला। कई यात्रियों की शिकायत रही कि दिल्ली में ही जाने के लिए कुछ निजी टैक्सी चालक उनसे दो हजार रुपये तक वसूले। जबकि सामान्य दिनों में 700-800 रुपये में आप टैक्सी से एक जगह से दूसरी जगह पर जा सकते हैं। दिल्ली में सरकारी बसें चलाने वाली डीटीसी ने सामान्य दिनों की तुलना में करीब एक हजार ज्यादा यानी करीब 5500 बसें सड़कों पर उतारीं , लेकिन जमीन पर इनसे मुसाफिरों को कोई राहत मिलती नहीं मिली। हालांकि, दिल्ली में मेट्रो बहाल रही।
    मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी हड़ताल का असर दिखा। वहीं, मुंबई और कोलकाता में ऑटो-टैक्सी की सेवाएं सामान्य दिनों की तरह चालू रहीं। मुंबई में बस और लोकल ट्रेन बिना किसी दिक्कत के चलीं। यहां कुछ टैक्सियां जरूर सड़कों से नदारद रहीं। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी के पुतले फूंके। राज्य में कई जगहों पर प्रदर्शनकारी रेल की पटरियों पर बैठ गए जिसके चलते कई जगहों पर रेलवे यातायात पर असर पड़ा। गुजरात में करीब 8 हजार सरकारी बसें सड़कों से नदारद रहीं।
    आगे पढें- हड़ताल से दो दिनों में लगेगा 20 हजार करोड़ का चूना
  • हड़ताल से दो दिनों में 26 हजार करोड़ का चूना
    औद्योगिक संगठन एसोचैम ने ट्रेड यूनियनों से मांग की थी कि वे 20-21 फरवरी को हड़ताल पर न जाएं। लेकिन एसोचैम की इस अपील का मजदूर संगठनों पर कोई असर नहीं पड़ा। एसोचैम ने अनुमान लगाया है कि दो दिनों की हड़ताल से देश की अर्थव्यवस्था को करीब 26,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। अकेले दिल्ली में 5 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। एसोचैम का कहना है कि उसका यह आकलन औसतन रोजाना जीडीपी के आंकड़े पर आधारित है।
    (तस्वीर: कोलकाता में हड़ताल के समर्थन में रैली निकालते ऑटोवाले)

  • यूपी में थमे बसों के चक्के, गैस-डीजल-पेट्रोल की सप्लाई भी ठप
    ट्रेड यूनियनों की देशव्‍यापी हड़ताल के पहले दिन का जबर्दस्त असर यूपी में देखने को मिला। यूपी में बैंक कर्मचारी, डिप्‍लोमा इंजीनियर्स महासंघ, आयकर विभाग, डाक विभाग, आरबीआई, एलआईसी और बीमा क्षेत्र के कर्मचारियों समेत केंद्र और राज्य सरकार के करीब 18 लाख कर्मचारी और शिक्षक हड़ताल पर रहे। इलाहाबाद समेत उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में सरकारी बैंकों के कर्मचारी निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों में घुस गए और जबर्दस्ती उनका कामकाज बंद करवा दिया। हड़ताल में यूपी के एचपीसी, आईओसी, बीपीसीएल जैसी पेट्रोलियम कंपनियों के कर्मचारी भी शामिल रहे। इसके चलते एलपीजी गैस और पेट्रोल डीजल सप्‍लाई भी ठप हो गई। लखनऊ के अमौसी में आईओसी प्‍लांट के अलावा कुर्सी रोड पर बीपीसीएल प्‍लांट और उन्‍नाव में एचपीसी प्‍लांट पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।
    तमाम सरकारी विभागों में अपने रोजमर्रा के काम निपटाने आने वाले लोगों को खासकर ग्रामीण अंचलों से आ रहे लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। वहीं, रोडवेज की बसें भी नहीं चलने से आवाजाही में प्रदेशवासियों को मुसीबत झेलनी पड़ी। रोडवेज कर्मी भी हड़ताल पर रहे। मंगलवार की आधी रात के बाद से यूपी की 10 हजार से ज्‍यादा बसों के चक्‍के थम गए। हड़ताल के चलते गुरुवार तक प्रदेश में रोडवेज की बसें नहीं चलेंगीं। हड़ताल की जद प्रदेश के कई शहरों में चलने वाली सिटी बसें भी रहीं। लेकिन ऑटो-टैक्सी की सेवाएं सामान्य रहीं।
    (तस्वीर: इलाहाबाद में निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सरकारी बैंकों के कर्मचारियों ने जबर्दस्ती बंद करवाया)
  • बैंकों ने अनसुनी की वित्त मंत्रालय की अपील
    सरकारी बैंकों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल रहे। इस वजह से उन लोगों को भी परेशानी हुई, जिन्हें पैसे की जरूरत थी। हड़ताल के चलते एटीएम में पैसे मंगलवार को ही डाले गए थे। अब दो दिनों तक एटीएम में पैसे नहीं डाले जाएंगे। यही वजह है कि ज्यादातर एटीएम में बुधवार तक पैसे खत्म हो गए।
    सरकार ने बैंक कर्मचारियों से अपील की थी कि वे बुधवार से प्रस्तावित दो दिवसीय हड़ताल में शामिल न हों। लेकिन बैंक कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि जहां तक बैंक कर्मचारियों का संबंध है तो उनके पास हड़ताल में शामिल होने का कोई कारण नहीं है। मांग पत्र में ऐसा कोई भी बिंदु नहीं है जिसका संबंध बैंक कर्मचारियों से हो। मंगलवार सुबह भी ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत हुई। लेकिन यह भी सोमवार की तरह बेनतीजा रही।
    हड़ताल का आह्वान पार्टी लाइन से ऊपर उठकर बीजेपी समर्थित भारतीय मजदूर संघ, कांग्रेस समर्थित इंडियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिंद मजदूर सभा, सीटू, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर ने संयुक्त रूप से किया था।
    (तस्वीर: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हड़ताल से परेशान महिला)
  • ये हैं ट्रेड यूनियनों की मांगें
    - महंगाई के लिए जिम्मेदार सरकारी नीतियां बदली जाएं।
    - मिनिमम वेज (न्यूनतम भत्ता) बढ़ाया जाए।
    - सरकारी संगठनों में अनुकंपा के आधार पर नौकरियां दी जाएं।
    - आउटसोर्सिंग के बजाए रेगुलर कर्मचारियों की भर्तियां हों।
    - सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी प्राइवेट कंपनियों को न बेची जाए।
    - बैंकों के विलय (मर्जर) की पॉलिसी लागू न की जाए।
    - केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भी हर पांच साल में वेतन में संशोधन हो।
    - न्यू पेंशन स्कीम बंद की जाए, पुरानी स्कीम ही लागू हो।
    (तस्वीर: हड़ताल के दौरान बिहार के पटना में ऑटो को पलटते प्रदर्शनकारी)
  • इन सेवाओं पर पड़ा असर
    ये बैंक रहे बंद : देना बैंक, एसबीबीजे, एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, यूको बैंक, ओरियंटल बैंक, ऑफ कॉमर्स, इंडियन बैंक, सिंडीकेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, आंध्रा बैंक, सेंट्रल बैंक इंडिया, पंजाब एंड सिंध बैंक, केनरा बैंक सहित अन्य सहकारी बैंक और आरबीआई के कर्मचारी हड़ताल में शामिल होंगे।
    इंश्योरेंस :एलआईसी और दूसरी कंपनियों में काम-काज बंद रहे। पोस्ट ऑफिस बंद रहे।
    ऑटो : भारतीय प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ के मुताबिक हजारों ऑटो-टैक्सी नहीं चलीं। कुछ संगठन हड़ताल से अलग रहे।
    बसें : उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों रोडवेज की हजारों बसें बंद रहीं।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: India Unions Call Strike
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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