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मोदी बनना चाहते थे साधु, बन गए सीएम

dainikbhaskar.com | Dec 21, 2012, 09:50 IST

  • नई दिल्‍ली. लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बना कर नरेन्द्र मोदी को गुजरात की जनता ने महानायक के रूप में स्थापित कर दिया है। बतौर मुख्यमंत्री यह तीसरा चुनाव मोदी के लिए कई मायनों में अलग था। पहले चुनाव में उन्हें 'हिंदुत्व का चेहरा' कहा गया। दूसरे में 'विकास पुरुष'। 13वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव ने मोदी को 'भाजपा के तारणहार' की पहचान दी है। उनकी यह जीत इस मायने में भी अहम है कि तमाम अदालतों, जांच एजेंसियों और खुद के परिवार की अंदरूनी खींचतान के झंझावातों से सफलतापूर्वक निपटते हुए उन्होंने अपनी लाइन बड़ी की। अपनों से जूझते हुए कद की यह ऊंचाई हासिल की। (अहंकारी लेकिन ईमानदार हैं मोदी?)

    नरेंद्र मोदी की क्‍या पहचान है? उनके कितने रूप हैं? वे कितने गहरे हैं? उनकी कामयाबी के राज क्‍या हैं? ऐसे कई सवाल मोदी की शख्सियत को लेकर हर आदमी के जेहन में रहते हैं। मोदी के सफर और उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्‍प तथ्‍यों पर एक नजर : -

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  • जब मगरमच्छ का बच्चा ले आए

    17 सितंबर 1970 को गुजरात के वडनगर में निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे मोदी का पूरा नाम है नरेन्द्र दामोदरदास मोदी। पिछड़े वर्ग घांची समाज से आने वाले और परचून की दुकान चलाने वाले दामोदरदास की छह संतानों, पांच बेटों और एक बेटी में से एक नरेंद्र मोदी परिवार को सहारा देने के लिए वे अपने घर के आसपास से तेल के खाली टिन जमा कर उन्हें पास की मिल में जमा कराते थे। बदले में हर टिन पर पांच पैसे मिलते थे। मोदी के दोस्त भरत भाई बताते हैं-मोदी बचपन में झील से मगरमच्छ का बच्चा घर ले आए थे, बाद में मां ने डांटा-कोई तुझे भी इस तरह उठा ले जाए तो कैसा लगेगा। मोदी तुरंत झील पर लौटे और मगर के बच्चे को छोड़ आए।

  • साधु बनने के लिए छोड़ दिया घर

    मोदी एक जमाने में साधु बनना चाहते थे। दो साल हिमालय की खाक छानी। पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम में भी रहे। एक दिन अचानक यह विचार छोड़ वे घर लौट आए। घर चलाने के लिए मोदी को अहमदाबाद में स्टेट ट्रांसपोर्ट ऑफिस के बाहर चाय की दुकान तक खोलनी पड़ी। यहीं पर शाखा से लौटते संघ कार्यकर्ताओं से होने वाली मुलाकातों ने मोदी को बदल डाला। उन्होंने दुकान समेटी और संघ के साथ जुड़ गए। वैसे मोदी बचपन में ही स्‍कूल के बाद संघ की शाखाओं में नजर आते थे। एनसीसी और रंगमंच ने उनकी शख्सियत को और निखारा। 20 साल की उम्र में वह संघ प्रचारक बन गए थे। मोदी ने तत्‍कालीन प्रांत प्रचारक लक्ष्‍मणराव ईनामदार का भरोसा जीता। जमकर स्‍वाध्‍याय किया और संघ के काम से खूब घूमे।

  • आडवाणी के करीबी

    1975 में आपातकाल के दौरान नरेंद्र मोदी लालकृष्‍ण आडवाणी के नजदीक आए। आडवाणी ने उनकी संगठनात्‍मक क्षमता को पहचाना और 1985 में गुजरात बीजेपी में संगठन महामंत्री बनवाया। आडवाणी उनको हाथ पकड़कर आगे बढ़ाते रहे। जब राम मंदिर आंदोलन परवान पर था तो मोदी ने आडवाणी को सोमनाथ मंदिर को प्रतीक बनाने का सुझाव दिया। मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा ढहाए गए इस मंदिर का इस मंदिर को सरकार पटेल ने पुनर्निमाण करवाया था। उनके सुझाव का नतीजा 1990 में राम रथ यात्रा के रूप में सामने आया। मोदी ने रथयात्रा की बेहद बारीकी से योजना बनाई, जिससे भाजपा का जनाधार बढ़ा। आडवाणी की यात्रा के बाद मोदी की संघ और भाजपा में धाक बढ़ गई। मुरली मनोहर जोशीकी कन्‍याकुमारी से कश्‍मीर तक की एकता यात्रा में भी मोदी को फिर जिम्‍मेदारी सौंपी गई। जोशी की सभाओं में मोदी मेवाड़ी पाग पहने सबसे पीछे खड़े जनता की नब्‍ज समझने की कोशिश करते नजर आते थे। 1995 में मोदी को भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव बना दिया और पांच राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी। 2001 में केशुभाई के हटने के बाद भाजपा ने मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया।

  • पहली बार सीएम बनने पर सामने आईं मां

    मोदी के परिवार के बारे में आजतक किसी को ज्‍यादा जानकारी नहीं है। पहली बार जब उन्‍होंने सीएम पद की शपथ ली तो मां हीरा बा को भीड़ में बमुश्किल पहचाना गया। हाल में मतदान के दिन बेटे को आशीर्वाद देते जरूर उनका फोटो मीडिया में आया। गुरुवार को भी जीत के बाद मोदी ने सबसे पहले मां से ही आशीर्वाद लिया।

  • भाई ही है खिलाफ

    गुजरात विश्‍वविद्यालय से राजनीति शास्‍त्र में एमए मोदी के पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं। मोदी के सबसे बड़े भाई सोमाभाई अपने पुश्‍तैनी शहर वडनगर में 'ओल्‍ड एज होम' चलाते हैं। दूसरे भाई अमृत अहमदाबाद के घाटलोडिया में रहते हैं। मोदी के छोटे भाई प्रहलाद मोदी अहमदाबाद के ओधाव इलाके में दुकान चलाते हैं। शहर के पॉश सैलेलाइट एरिया में उनका निवास है। वह कोटे के दुकानदारों के नेता हैं, जो सरकार के खिलाफ हमेशा तेवर दिखाते रहते हैं। प्रहलाद के बेटे का नाम मेहुल है। उनसे छोटे भाई पंकज मोदी सरकारी अफसर हैं जो गुजरात सरकार के सूचना विभाग में काम करते हैं। मोदी की एक बहन भी हैं जो सबसे छोटी हैं। उनका नाम वसंती है।

  • शादीशुदा हैं या अविवाहित! : यह सवाल कई बार उठ चुका है, अब भी उठता रहेगा। यह आरोप लगाया जाता है कि मोदी शादीशुदा हैं, मगर पत्नी के साथ नहीं रहते। कहा जाता है कि उनकी पत्नी एक टीचर हैं और गुजरात के एक गांव में अकेली रहती हैं। मोदी ने आधिकारिक तौर पर इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा है। गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान विरोधियों की तरफ से यह बात बार-बार उठाई जाती है, लेकिन मोदी इसका न तो खंडन करते हैं और न पुष्टि। मीडिया में इस बारे में छपी रिपोर्ट पर भी मोदी ने कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

    मोदी शादीशुदा हैं या नहीं, यह मुद्दा पिछले दिनों चुनाव प्रचार के दौरान भी उछला था जब कांग्रेस महासचिव दिग्विजिय सिंह ने इस बारे में सवाल पूछे। मोदी जशोदाबेन से शादी का जिक्र तक नहीं करते। सरकारी दस्‍तावेज में वैवाहिक स्थिति का कॉलम खाली छोड़ देते हैं। बीस साल की उम्र में वे संघ के प्रचारक बन गए थे। मोदी के करीबियों का दावा है कि उसके बाद से वे अपने घर तक नहीं गए। मोदी की शादी का मुद्दा 2007 के भी चुनावों में उछला था। तब यूट्यूब पर वीडियोभी सामने आाया था।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Interesting facts about Narendra Modi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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