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मुस्लिम संगठन की चेतावनी, रुश्दी की किताब के अंश पढ़ने वालों को न बुलाएं

भास्कर न्यूज नेटवर्क/पूजा शर्मा | Jan 22, 2013, 11:41 IST

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जयपुर.जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में उन लेखकों का विरोध होगा जिन्होंने पिछले साल विवादित लेखक सलमान रुश्दी की किताब के अंश पढ़े थे। इस चेतावनी के साथ मुस्लिम संगठन अजीमुशान अजमत-ई-नमूसी-ई-रसूल ने आयोजकों से आग्रह किया वे उन लेखकों को इस बार न बुलाएं। संगठन के पदाधिकारियों ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें बताया कि पिछले साल लेखक जीत थायिल, रूचिर जोशी, हरी कुंजरू और अमिताव कुमार ने रुश्दी की किताब 'सेटेनिक वर्सेस' के अंश पढ़े थे। लिहाजा इन्हें इस साल होने वाले कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि किताब के अंश पढ़ने से मुसलमानों की भावनाएं आहत हुई हैं। अगर चारों लेखक कार्यक्रम में आते हैं तो संगठन उनका विरोध करेगा। इससे होने वाली अव्यवस्था के लिए वे ही जिम्मेदार होंगे।
साहित्य का मक्का बन रहा जयपुर
क्या वजह है कि वह शहर जो किले, हाथी-घोड़े और शाही विरासत की वजह से विदेशी पर्यटकों को लुभाता रहा है, आज अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर साहित्य का मक्का नजर आ रहा है। असल में इसके मूल में किताबें और किताबों के दीवाने ही हैं। जयपुर लिट फेस्ट के डेलरिंपल कहते हैं, करीबन 20 साल पहले भारत विदेशी किताबें अधिकतर आयात करता था, लेकिन अब स्थिति यह है कि यहां किताबों की कवर प्राइज वेस्ट से कम है और लेखक किताबों के साथ अपना कॅरिअर बना सकते हैं। वर्तमान में दुनिया भर में भारत अंग्रेजी किताबों के बेहतरीन बाजारों में से एक है। जयपुर स्थित बुक स्टोर क्रॉसवर्ड के डायरेक्टर गिरधर गोयल के अनुसार, छात्रों और पेशेवरों समेत अंग्रेजी किताबों का बड़ा ग्राहक एलीट क्लास है। इसकी वजह इस वर्ग की समृद्ध क्रय शक्ति है। इसके अलावा अंग्रेजी किताबों की बिक्री का करीबन 25 प्रतिशत हिस्सा टूरिस्ट से प्राप्त होता है।
फिक्शन के तलबगार
बेशक, अंग्रेजी किताबों पर अच्छा पैसा खर्च हो रहा है, लेकिन पाठकों का एक मिश्रित वर्ग ऐसा भी है, जो अंग्रेजी और हिंदी को समान रूप से पढ़ता है। होटल व्यवसायी अनंत राज सिंह इसी वर्ग से संबंधित हैं। गजलों और कविताओं की पत्रिका 'लफ्ज' में मुश्ताक अहमद युसुफी की किताब 'खोया पानी' के अंश पढ़कर पूरी किताब की खोज में अनंत ने जयपुर स्थित लोकायत प्रकाशन को खोजा, जहां उन्हें हिंदी साहित्य का पूरा खजाना मिला। अनंत हर सप्ताह करीब 1,000 रुपये अंग्रेजी व हिंदी की किताबों पर खर्च करते हैं। वे कहते हैं, फिक्शन की मांग बाजार में हमेशा रहती है।
100 का सफर लाखों तक
सन 2006, जयपुर का डिग्गी पैलेस। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल। 18 लेखक और श्रोताओं के रूप में 100 लोगों की भीड़, जिसमें कुछ विदेशी पर्यटक, जो रास्ता भटकने के कारण समारोह में शामिल हो गए थे। आयोजन के पहले अंतरराष्ट्रीय मेहमान थे, लेखक हरि कुंजरू। हम उन्हें इसलिए ला सके क्योंकि उस वक्त वे अपनी दोस्त से मिलने न्यूजीलैंड की यात्रा पर निकले थे। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के डायरेक्टर विलियम डेलरिंपल जयपुर के पहले लिटरेचर फेस्टिवल को कुछ इसी तरह याद करते हैं। 100 श्रोताओं का 7 साल पुराना यह आंकड़ा 2013 तक लाखों में तब्दील हो चुका है।
7 पाक साहित्यकार आएंगे लिटरेचर फेस्टिवल में
लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में इस बार दुनिया के अलग-अलग कोनों से 268 साहित्यकार आएंगे। इनमें 7 साहित्यकार पाकिस्तान के हैं। सीमा पर पैदा हुए तनाव के बाद हाल ही यहां आयोजित एक कार्यक्रम में पाकिस्तानी कलाकारों के दल को प्रस्तुति नहीं देने दी गई थी। ऐसे में पाक साहित्यकारों को भी विरोध का सामना करना
पड़ सकता है। फेस्टिवल डिग्गी पैलेस में 28 जनवरी तक चलेगा। पाक साहित्यकारों के दल में तीन महिला अमीना सैयद, फहमीदा रियाज, शरमीन उबैद चिनॉय के अलावा जमील अहमद, मो. हनीफ, एमए फारखी और नदीम असलम हैं। इनमें से जमील अहमद और मो. हनीफ डीएससी साउथ एशियन लिटरेचर प्राइज के लिए भी नॉमिनेट हैं। यह पुरस्कार फेस्टिवल के दौरान 25 जनवरी को दिया जाएगा। साहित्य के इस महाकुंभ में ब्रिटेन, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका के साहित्यकार भी शामिल होंगे। भारत से हैं रिश्ते : पाकिस्तानी साहित्यकार शरमीन उबैद चिनॉय का नाम टाइम मैग्जीन की 2012 की दुनिया के सौ प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल था।
वे ऑस्कर अवॉर्ड विनिंग पाकिस्तानी कैनेडियन जर्नलिस्ट हैं। जमील अहमद और फहमीदा रियाज का भारत से भी कनेक्शन है। जमील 1933 में जालंधर में पैदा हुए।
वे फिलहाल पाकिस्तान में रहते हैं। जेएलएफ के पहले दिन 'द फ्लाइट ऑफ द फैलकॉन' सेशन में इनकी किताब द वंडरिंग फैलकॉन पर चर्चा होगी।
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Web Title: Jaipur Lit Fest in controversy again
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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