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मोदी नहीं, किसी और ने संभाला मिशन 2014 का मोर्चा!

dainikbhaskar.com | Jul 21, 2013, 07:47 AM IST

नई दिल्ली.कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का 'बड़बोलापन' उनके लिए कानूनी अड़चनें पैदा करने लगा है। बीजेपी में रहे मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री राघवजी से जुड़े अश्लील सीडी मामले में एक विवादास्पद ट्वीट दिग्विजय के गले की फांस बनता जा रहा है। भोपाल में दिग्विजय के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया है। भोपाल में जि‍स पुलि‍स स्‍टेशन में दि‍ग्‍वि‍जय सिंह के खि‍लाफ मुकदमा दर्ज हुआ, वहां पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन कि‍या। कांग्रेस के कार्यकर्ता वहां पर काफी देर तक धरना भी देते रहे।
अपने नौकर के साथ 'कुकर्म' करते हुए कुछ सीडी में राघवजी को दिखाए जाने के बाद दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया था, 'बच्चा-बच्चा राम का, राघवजी के काम का।' दरअसल, दिग्विजय सिंह ने राम जन्म भूमि आंदोलन के समय चले नारे 'बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का' की पैरोडी पर ट्वीट किया। इस ट्वीट पर कई लोगों ने धार्मिक भावनाएं भड़कने का आरोप लगाया था।
दूसरी तरफ, बीजेपी में भले ही इनदिनों नरेंद्र मोदी (टीम मोदी में किसे मिली क्‍या जिम्‍मेदारी, जानिए) और राजनाथ सिंह की जोड़ी सभी फैसले लेते हुए दिख रही हो, लेकिन मिशन 2014 का असली ब्लू प्रिंट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही तैयार कर रहा है।
पिछले लोकसभा चुनाव में तुलनात्मक तौर पर कम सक्रिय रहे संघ ने इस बार खुद मोर्चा संभाल लिया है। पिछले नौ साल से दिल्ली की सत्ता से दूर रही बीजेपी को संघ हर हालत में सत्ता में लाना चाहता है। (आडवाणी हुए साइड, टीम मोदी और टीम राहुल की तुलना)
संघ की ही दखल से से ही मोदी-राजनाथ की जोड़ी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को मार्गदर्शक की भूमिका देने में कामयाब पाई। अमरावती की बैठक में संघ अपने सभी अनुषांगिक संगठनों-विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, आदि को निर्देश दे चुका हैं कि इस बार चुनाव में जुटना होगा। मोदी के साथ छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले वीएचपी नेता प्रवीण तोगड़ियो का भी संघ सहयोग करने को कह चुका है। संघ की अमरावती के सम्मेलन के बाद अब साफ हो गया है कि इस बार लोकसभा चुनाव की कमान संघ के हाथ रहेगी।
जबकि पिछले चुनाव में पूरी कमान एनडीए के पीएम पद के उम्मीदवार रहे आडवाणी के ही पास थी। हालांकि संगठन के तौर पर चुनाव अभियान का जिम्मा अरुण जेटली के पास था। लेकिन 2009 के चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद से ही संघ ने साफ संकेत दे दिये थे कि पार्टी को नया चेहरा तलाशना होगा।
तब बीजेपी ने भी चुनाव नतीजों की समीक्षा में पाया कि आडवाणी को उनकी ज्यादा उम्र के कारण पीएम उम्मीवार के तौर पर उम्मीद के अनुरुप समर्थन नहीं मिला। अटल बिहारी वाजयपी अस्वस्थ थे, इसलिए संघ ने दूसरी कतार के नेताओं को आगे लाना शुरू किया। इसी मकसद से गडकरी को नागपुर से दिल्ली लाया गया। संघ की इसी रणनीति का नतीजा है कि ही अब आगामी चुनाव में आडवाणी मार्गदर्शक की भूमिका रहेंगे। जबकि संघ ने मोदी-राजनाथ के जरिये भाजपा को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया है।
भाजपा की चुनाव अभियान समिति के जरिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पार्टी पर पूरी तरह से अपनी पकड़ बना ली है। संघ की पृष्ठभूमि से नहीं आने वाले नेता मुख्य जिम्मेदारी से दूर रखे गए हैं। चुनाव अभियान के लिहाज से सबसे अधिक महत्वपूर्ण दो समितियों घोषणा पत्र और दृष्टिपत्र समिति की जिम्मेदारी संघ के विश्वसनीय माने जाने वालों को सौंपी गई है। सबसे अहम बात यह है कि संघ की ‘एकला चलो’ की पुरानी नीति को ध्यान में रखते हुए मित्र दलों की तलाश करने की न तो किसी को जिम्मेदारी दी गई और न कोई उप समिति बनी। संघ ने पीएम उम्मीदवारी के लिए भी अपने पसंदीदा व्यक्ति का मार्ग मजबूत करने की कोशिश की है।
समितियों में दखल
-विजन डाक्यूमेंट समिति की जिम्मेदारी संघ के विश्वस्त नितिन गडकरी को।
-घोषणा पत्र प्रमुख संघ के प्रिय डॉ. मुरली मनोहर जोशी। 16 में 12 संघ पृष्ठभूमि के।
-संसदीय सम्मेलन के पांचों सदस्य संघ पृष्ठभूमि के।
-मुरलीधर राव सहित वर्गवार सम्मेलन के सातों सदस्य स्वयंसेवक हैं।
-विशेष संपर्क समिति के सभी सदस्य संघ पृष्ठभूमि के।
-चुनावी संगठन पूर्ण रूप से संघ के जिम्मे। रामलाल, सौदान सिंह और वी. सतीश।
-नव मतदाता अभियान का मार्गदर्शन गडकरी के जिम्मे।
पीएम के अन्य दावेदार हाशिये पर
सुषमा स्वराज: संघ पृष्ठभूमि की नहीं। मोदी के नेतृत्व में जिम्मेदारी प्रचार और प्रसिद्धि समिति तक।
अरुण जेटली: संघ के पसंदीदा नहीं। मोदी के नेतृत्व में प्रचार मात्र की जिम्मेदारी।
लाल कृष्ण आडवाणी: मार्गदर्शक की भूमिका मात्र तक सीमित।
आडवाणी के पसंदीदा सीएम शिवराज सिंह चौहान को नरेंद्र मोदी के चुनाव अभियान में सहयोग तक सीमित रखा
एकला चलो की नीति
संघ ने अपनी पुरानी नीति ‘एकला चलो’ को स्थापित किया। चुनाव अभियान के लिए बनी उपसमितियों में एनडीए गठबंधन बढ़ाने के लिए कोई इकाई नहीं बनी। न ही इसकी जिम्मेदारी किसी को दी गई। इस कार्य में दक्ष माने जाने वाले जसवंत सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, एसएस अहलूवालिया के हाथ अन्य जिम्मेदारी के जरिए बांध दिए गए।
बंधन में आडवाणी कुनबा
आडवाणी के खास माने जाने वाले नेताओं की पूरी जमात घिरी हुई दिख रही है। किसी को भी फ्री हैंड नहीं है। सुषमा स्वराज, जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा, प्रेम कुमार धूमल, अनंत कुमार, विनय कटियार, उमा भारती, रविशंकर प्रसाद को चुनाव अभियान की उपसमिति में जगह तो मिली है लेकिन इन्हे किसी भी समिति का प्रमुख नहीं बनाया गया है। शांता कुमार, बीसी खंडूरी, श्रीपद नायक आदि को टीम में जगह तक नहीं मिली।
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