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FLASH BACK: दामिनी की कहानी, सपने, संघर्ष और दरिंदगी का सच

Dainik bhaskar.com | Jan 08, 2013, 14:12 IST

  • दिल्ली में क्रिसमस के एक दिन पहले दोपहर का समय। एक युवती ने अपने दोस्त को कॉल कर कहा जल्दी उठो पहले ही देर हो चुकी है। इसके बाद टाइम तय कर युवती और उसका दोस्त दिल्ली के सिटी वॉक मॉल पहुंचते हैं। फिल्मों की शौकीन यह युवती अपने दोस्त के साथ यहां लाइफ ऑफ पाई देखती है। उसी सीट पर जहां वह पहले कुछ दिन पहले गुलिवर्स ट्रैवल्स देख चुकी थी, फिल्म खत्म होती है दोनों साथ निकलते हैं और कुछ घंटे बाद युवती और उसका दोस्त बिना कपड़ों के बहदवास अवस्था में एक प्राइवेट बस से सड़क पर फेंक दिए जाते हैं। दोनों के साथ लोहे की छड़ से बेरहमी से मारपीट की गई थी और युवती के साथ तो छह लोगों ने वहशियाना तरीके से रेप भी किया गया था।
    जी हां यह दास्तान है दिल्ली में गैंगरेप पीड़िता की जिसने दो सप्ताह तक जिंदगी से लड़ते हुए सिंगापुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया था।
    कौन थी यह युवती, क्या थे उसके सपने, कैसा था उसका परिवार, क्या हुआ उसके साथ जानने के लिए क्लिक करें आगे की तस्वीरें...
  • वह अपने परिवार की पहली शख्स थी जिसने प्रोफशनल करियर को अपनाया था। आंखों में कई सपने लिए उसने देहरादून के एक कॉलेज में फिजियोथैरेपी कोर्स में प्रवेश लिया था। वह परिवार पर अपनी पढ़ाई का बोझ डालना नहीं चाहती थी। इसलिए एक नाइट शिफ्ट में एक आउटसोर्सिग फर्म में जॉब भी करती थी जिससे वह करीब सात हजार रुपए महीना तक कमा लेती थी। उसे पता था कि इस कोर्स को करने के बाद वह आसानी से तीस हजार रुपए महीना तक कमा सकती है। जो उसके पिता की आमदनी से चार गुना तक ज्यादा थी।

  • दामिनी एयरपोर्ट पर काम करने वाले एक मामूली से कर्मचारी की बिटिया थी। बेहतर जिंदगी की तलाश में उसके पापा तीस साल पहले उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक गांव से देश की राजधानी दिल्ली आ गए थे। यहां वह महावीर इन्क्लेव में रहते थे। घर के आसपास दिल्ली में ऊंची-ऊंची बिल्डिंग खड़ी करने वाले मजूदरों के परिवार थे। यहां उस दामिनी ने एक सपना देखा जो अपने परिवार से बिल्कुल अलग था।

  • जॉब करने के बाद सैमसंग का स्मार्टफोन, एक बड़ा घर और कार उसकी ख्वाहिश थी। अपने सपनों को पूरा करने के लिए वह विदेश जाकर पढ़ना चाहती थी। देहरादून में अपने प्रांरभिक दिनों में वह बेहद पारंपरिक थी लेकिन समय के साथ उसमें बदलाव भी आने लगा वह वैसे भी अपने क्लास में वह सबसे होशियार विद्यार्थियों में थी।

  • कॉलेज के माहौल व स्वयं की जरूरतों को देखते हुए उसने मध्यमवर्गीय विद्यार्थियों की सबसे बड़ी बाधा अंग्रेजी से भी पार पा लिया था। अंग्रेजी बोलते समय वह अपनी मिडिल क्लास इमेज को कहीं पीछे छोड़ देती थी। इंग्लिश नॉवेल पढ़ना उसका शौक था। चेतन भगत का वन नाइट एट ए कॉल सेंटर उसका पंसदीदा नॉवेल था। दिन में कॉलेज और रात में जॉब। कुल मिलाकर रात में दो घंटे की नींद लेकिन जब खुली आंखो में सपने हों तो नींद आती भी कहां है। कुछ ऐसे ही चल रही थी उसकी जिदंगी।

  • अक्टूबर में वह दिल्ली दोबारा आ गई कोर्स के लिए वालिंटियर इंटर्नशिप करने। उसके बाद इंटर्नशिप, घर और बचे हुए समय में बाजार। जहां उसकी निगाहें हमेशा उन ड्रेस पर रहती थी जैसी डिजाइन वह महंगे मॉल में देख चुकी होती थी।

  • फिर आया 16 दिसंबर। वही दिन जिसे न तो उसका परिवार और न ही पूरा देश कभी भुला पाएगा। सुबह से ही वह मां के साथ किचन में व्यस्त थी। दोनों ने सब्जी के साथ पूड़ियां बनाई। उसके पिता खाना खाकर काम पर जा चुके थे। उसने भी खाना खाया और अपने दोस्त को कॉल किया। जिसका पहले भी जिक्र किया जा चुका है। युवक और वह लंबे समय से अच्छे दोस्त थे। मूवी देखने के बाद वह दोनों रिक्शा से मुनरिका पहुंचे । यहां से दोनों उस बस में बैठे जहां उनके साथ हुआ ये दर्दनाक हादसा।
  • ठीक उसी दिन शाम को दामिनी के घर से करीब पांच मील दूर एक झुग्गी बस्ती रवि राम दास कैंप में दो भाई राम और मुकेश सिंह शराब और चिकन के साथ पार्टी कर रहे थे। राम सिंह एक प्राइवेट बस का ड्राइवर था। उनके साथ और युवक विनय शर्मा भी आ गया जो एक जिम में हेल्पर था। उसके साथ उसका दोस्त विनय भी था। शराब और चिकन का दौर पूरा होने के बाद चारों बस लेकर मस्ती के मूड में निकल लिए उनके साथ दो और लोग (जिनमें एक नाबालिग था) भी शामिल हो चुके थे।

  • करीब सवा नौ बजा था। तभी यह बस एक युवक-युवती के सामने रुक गई। युवक ने द्वारका तक जाने के लिए लिफ्ट मांगी थी। बस में सवार चारों युवक सामान्य यात्रियों की तरह बैठे थे और एक ने दोनों से टिकट के पैसे लिए। कुछ ही देर बाद उन लोगों ने दोनों पर फब्तियां कसना शुरू कर दिया।

  • दामिनी सहमी हुई थी और जब उसके दोस्त ने छेड़छाड़ का विरोध किया तो लोहे की रॉड से मारपीट शुरू कर दी गई। युवक सिर पर प्रहार नहीं सह पाया और बेहोश हो गया। उसके बाद शुरू हुई हैवानियत को भी शर्मसार करने वाली दरिंदगी। वह चिल्लाती रही लेकिन उन वहशियों पर उसकी चीखों का असर नहीं हुआ। राजधानी के पॉश इलाकों में दौड़ने के बाद करीब चालीस मिनट बाद बस रुकी और दोनों को निवस्त्र हालत में बाहर फेंक दिया।
    (पीड़िता के दोस्त, कॉलेज के साथियों-टीचर्स , परिवार और पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर)
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: New Delhi Gang rape: The Victim's Story
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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