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देश के लिए निर्णायक बनी दिल्ली की घटना

Dainik Bhaskar | Dec 29, 2012, 10:35 IST

  • 16 दिसंबर की रात दिल्‍ली में चलती बस में गैंगरेप की शिकार हुई लड़की जिंदगी की जंग तो हार गई है, लेकिन वह समाज और सिस्‍टम की आत्‍मा को झकझोर कर गई है। जब वह होश में आई थी तो उसका पहला सवाल यही था कि क्या दोषी पकड़े गए? जब उसे पता चला कि वे पकड़े जा चुके हैं तो पीड़िता ने अपनी मां से कहा था कि उन्हें फांसी दी जानी चाहिए। यानी पीड़िता की आखिरी इच्छा थी कि उसके साथ दुष्कर्म करने वालों को मौत की सजा मिले।
    उसकी आखिरी इच्‍छा पूरी कराने के लिए जनता ने मुहिम छेड़ रखी है। इस मुहिम ने सिस्‍टम को भी झकझोरा है और कुछ सकारात्‍मक उम्‍मीदें जगी हैं। इस मामले में तो अब बलात्‍कारियों पर हत्‍या का केस चलेगा और पुलिस-वकील के लिए उनके लिए कोर्ट से फांसी की सजा मांगने में अब कोई कानूनी अड़चन नहीं है। लेकिन बलात्‍कार के बाकी मामलों में भी उन्‍हें ऐसी सजा मिले कि हर किसी को सबक मिल जाए, इसकी तैयारी भी अब हो सकती है।
    बलात्‍कारियों के लिए फांसी की सजा तो काफी कम हो सकती है। इससे तो एक झटके में ही उन्‍हें जिंदगी से मुक्ति मिल जाएगी और उस दर्द का अहसास तक नहीं होगा जिसके साथ वे पीडि़त को छोड़ जाएंगे। सवाल यह भी है कि क्‍या बलात्‍कारियों को फांसी दे देने भर से बलात्‍कार की घटनाएं रुक जाएंगी? एक डर यह भी है कि अगर ऐसा हो गया तो कहीं हर घटना के बाद बलात्‍कारी पीडि़ता का कत्‍ल ही न करने लग जाए? वैसे भी, भारत में केवल एक-चौथाई मामलों में ही बलात्‍कारियों को अदालत में दोषी साबित कराया जा सकता है और उन्‍हें सजा होती है।
    ऐसे में क्‍या यह जरूरी नहीं है कि सजा ऐसी हो जिससे बलात्‍कारी नहीं, बल्कि बलात्‍कार को खत्‍म करने में मदद मिले? बलात्‍कार की शिकार लड़की का कोई गुनाह नहीं होता, लेकिन उसे जीवन भर घुट-घुट कर जीना पड़ता है। तो फिर, उसे इस हाल में पहुंचाने वाले बलात्‍कारी को इतनी आसानी से छुटकारा देना ठीक होगा? क्‍या उसे भी कुछ ऐसी सजा नहीं मिलनी चाहिए, जिससे वह जीवन भर खौफ के साथ शर्मिंदगी भरी जिंदगी जीकर अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए मजबूर हो और दूसरों को भी उसे देख कर अपराध नहीं करने की प्रेरणा मिले? ऐसे में अगर सजा के तौर पर ये कुछ विकल्‍प अपनाए जाएं तो इस उद्देश्‍य की प्राप्ति हो सकती है-
    बलात्‍कारी को नपुंसक बना दिया जाए
    समाज-परिवार से बहिष्‍कृत कर दिया जाए
    उसके सिर पर 'बलात्‍कारी' का टैटू बनवा दिया जाए
    उसे जीवन भर जेल में रखा जाए
    उसे वृद्धाश्रम की सेवा करने की सजा दी जाए
    आप इस बारे में क्‍या सोचते हैं? अपनी बात कमेंट बॉक्‍स में पोस्‍ट कर दुनिया भर के पाठकों तक पहुंचा सकते हैं और बलात्‍कारियों के लिए सही सजा तय कराने के हमारे अभियान में भागीदार बन सकते हैं...
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  • दुष्कर्म की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र और कई राज्य सरकारों ने कदम उठाए हैं। भास्कर का फोकस भी यही था कि सरकारें ऐसे कदम उठाएं, जिससे इस तरह की घटनाएं हों ही नहीं। 9 दिन तक महाअभियान चला। इसमें करोड़ों पाठकों ने संवेदना के साथ ताकत दी। इसी वजह से राज्यों में ये चीजें सफल हो पाईं। भास्कर की कोशिश थी कि देश का गुस्सा दिल्ली तक सीमित न हो जाए। इसे महिला ही नहीं, देश की गरिमा से भी जोड़ा। सांसदों, विधायकों ने खुलकर साथ दिया। मुख्यमंत्रियों ने कदम उठाकर जनता में भरोसा जगाया। अब भास्कर इन पर निगाह रखेगा। ताकि ये परिवर्तन सिर्फ आश्वासन या वादे बनकर ही न रह जाएं...
    पुलिस फौरन कार्रवाई कर रही है
    राजस्थान, मप्र, हरियाणा, छत्तीसगढ़, पंजाब में थाना स्तर पर विशेष दस्ते बना दिए गए। पंजाब में नाइट पुलिस नाम से अलग दस्ता बनाया गया। इसमें महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती। गर्ल्‍स होस्टल, स्कूल-कॉलेज, पार्कों में सिपाही सादे कपड़ों में निगरानी के साथ-साथ शिकायत पर तत्काल कार्रवाई भी कर रहे हैं। राजस्थान में एसपी की निगरानी में विशेष प्रकोष्ठ बनाए गए। मप्र, झारखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र, में विशेष हेल्पलाइन नंबर सेवा शुरू की गई। एक फोन पर सिपाही को मौके पर जाने के निर्देश।
    लेकिन...पीडि़त पक्ष अभी भी पुलिस में शिकायत करने में संकोच करता है। पुलिस को इसे दूर करने के लिए उपाय तलाशने चाहिए।
    अदालतें जल्द सुनवाई करेंगी
    सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म मामलों की सुनवाई अधिकतम दो महीने में खत्म करने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र, मप्र, राजस्थान, झारखंड, हरियाणा समेत राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन को मंजूरी। ञ्चमहाराष्ट्र में 100 में से 25 फास्ट ट्रैक कोर्ट में सिर्फ महिला केस होंगे। ञ्चपुलिस को मौजूदा मानदंडों का पालन सख्ती से करने को कहा। दिल्ली की अदालतों में यौन उत्पीडऩ मामले की रोज सुनवाई के आदेश। अमल 4 जनवरी से। महाराष्ट्र हाईकोर्ट समेत कई अदालतों ने दुष्कर्म के दोषी को मृत्युदंड देने की सिफारिश की।
    लेकिन... देशभर की अदालतों में जजों के अभी भी कई पद खाली हैं। इन्हें भरे बिना न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आना असंभव है।
    जनप्रतिनिधि दबाव बनाने लगे हैं
    संसद में महिला विरोधी घटनाओं को रोकने में नेताओं में एक राय। डेढ़ सौ से ज्यादा सांसदों, विधायकों ने कड़े कानूनों के लिए सरकारों पर दबाव बनाया। दुष्कर्म के दोषियों को फांसी जैसी कड़ी सजा के लिए एकमत हुए। संसद की स्थायी समिति में शामिल सभी दलों के सांसदों ने महिलाओं पर होने वाले अपराध के खिलाफ कड़े कानून बनाने और संसद में मामला उठाने की बात कही। केंद्र, राज्य सरकारों को फौरन कदम उठाने को कहा।
    लेकिन...बयान देने में नियंत्रण नहीं। राष्ट्रपति के सांसद बेटे हों या माकपा के रहमान...भद्दी टिप्पणियां अब भी कर रहे हैं।

  • सरकारें कदम उठाने लगी हैं
    देशभर में दुष्कर्मियों का डाटाबेस तैयार करने का फैसला। इनके चेहरे पुलिस की वेबसााइट पर जारी होंगे। दिल्ली, मप्र, राजस्थान, पंजाब सरकार ने वाहनों में जीपीएस लगाने, चौराहों, सूनी सड़कों पर सीसीटीवी लगाने की योजना को मंजूरी दी। महिला सुरक्षा पहली प्राथमिकता बनी। हरियाणा के 2255 स्कूलों में ड्रॉप बॉक्स लगवाए गए। पश्चिम बंगाल में ६5 महिला थाने बनाने के निर्देश। मप्र में महिला अपराध रोकने वालों को 1 लाख तक के ईनाम का ऐलान। मप्र, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, झारखंड में महिला अपराध होने पर एसपी जिम्मेदार ठहराए जाएंगे।
    लेकिन...कदम उठाने से पहले अब भी राजनीतिक नफे-नुकसान को ध्यान में रखा जा रहा है। दिल्ली ताजा उदाहरण।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: News for delhi gang rape
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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