Home »National »Latest News »National» Political News

गुजरात जाकर सर्वे करेंगे राहुल गांधी के पांच दूत

dainikbhaskar.com | Feb 16, 2013, 08:31 IST

  • modi
    नई दिल्‍ली. लोकसभा चुनाव के वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके राज्य में ही घेराबंदी करके उलझाए रखने की रणनीति महाराष्ट्र में बनाई जा रही है। इस काम को अंजाम देने के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पांच दूत गुजरात के प्रत्येक लोकसभा सीट की जमीनी हकीकत खंगालने के लिए वहां जाने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि मोदी की घेराबंदी की जमीन तैयार करने के लिए गुजरात जाने वालों में महाराष्ट्र कांग्रेस के महासचिव माणिक जगताप और दिल्ली से अंजलि राय को भी रखा गया है।
    बताया जा रहा है कि गुजरात की 26 सीटों में से 5 सीटों का सर्वे करने की जिम्मेदारी जगताप पर सौंपी गई है। लोकसभा की ये पांच सीटें कच्छ, राजकोट, पोरबंदर, जामनगर और जूनागढ़ हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि गुजरात की करीब 15 सीटों पर इस वक्त भाजपा का कब्जा है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता में लोकप्रियता को देखते हुए आगामी लोकसभा चुनाव में यह संख्या बढऩे की प्रबल संभावना है। इसके अलावा मोदी को भाजपा का एक बड़ा वर्ग प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के पूरे में पेश कर रहा है। जिसकी वजह से भविष्य में राहुल गांधी को मोदी की लोकप्रियता से मुकाबला करना पड़ेगा। भविष्य में निर्माण होने वाली इस सियासी परिस्थिति का कांग्रेस के रणनीतिकारों ने अभी से आंकलन कर लिया है। लिहाजा विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव में अच्छा प्रदर्शन न होने से सबक लेते हुए कांग्रेस ने लोकसभा की एक-एक सीट का बारीकी से सर्वे करना शुरू किया है।
    सर्वे का यह काम पहले किसी प्राइवेट एजेंसी को दिया जाता था, लेकिन राहुल गांधी ने चुनाव समन्वय समिति की कमान संभालने के बाद छान-छान कर देश के प्रत्येक राज्यों से करीब 37 ऐसे लोगों का चयन किया है जिन पर पार्टी के लिए निष्पक्ष सर्वे की जिम्मेदारी समय-समय पर सौंपी जाएगी। बता दें कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा का चुनाव होने की वजह से कांग्रेस की ओर से लोकसभा चुनाव का सर्वे रह गया था, जो अब शुरू हो गया है।
    गुजरात जाकर क्या करेंगे राहुल के दूत : बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के जो पांच दूत गुजरात की लोकसभा सीट का सर्वे करने जाने वाले हैं। वे सबसे पहले तालुका, ब्लॉक व जिला अध्यक्षों से मुलाकात करेंगे और पार्टी की जमीनी ताकत की जानकारी हासिल करेंगे। इसके बाद जिन सीटों पर कांग्रेस का कब्जा नहीं है, वहां पार्टी का उम्मीदवार कौन और क्यों होना चाहिए? इसकी विश्वसनीय जानकारी लेकर रिपोर्ट तैयार करेंगे। महत्वपूर्ण है कि यह रिपोर्ट बाद में चुनाव समन्वय समिति के सदस्य अहमद पटेल और मधुसूदन मिस्त्री को सौंपी जाएगी। जिसके आधार पर बाद में पार्टी गुजरात में अपने लोकसभा उम्मीदवार का नाम तय करेगी। सूत्रों का कहना है कि इतनी बड़ी कवायद करने के पीछे राहुल गांधी की मंशा सिर्फ इतनी है कि लोकसभा चुनाव के वक्त गुजरात में पार्टी भाजपा को टक्कर देने वाला सक्षम उम्मीदवार दे ताकि मोदी चुनाव प्रचार के लिए अपने राज्य से बाहर न जा सकें। इसके अलावा यदि मोदी को घेरने की पार्टी की रणनीति सफल होती है यानी गुजरात में कांग्रेस की भाजपा से ज्यादा सीटें आती हैं, तो मोदी का प्रधानमंत्री पद का दावा अपने आप कमजोर पड़ जाएगा।
    आगे पढें- राहुल के सामने ही 15 मिनट तक शीला और अग्रवाल में होती रही 'तकरार'

    जानिए, 5 ऐसे कदम जो कर देंगे राहुल की राह आसान

    बीजेपी ने जोड़ा राहुल कनेक्‍शन, डील रद्द करने की तैयारी

    नरेंद्र मोदी ब्रांडेड छवि : भीतरी सच और खतरे

    नरेंद्र मोदी की राह में रोड़ा बने शिवराज सिंह?

    अब संत ने भी की मांग- गुजरात नरसंहार के लिए माफी मांगें मोदी

    राहुल को नहीं, नरेंद्र मोदी को पीएम देखना चाहता है देश

    वाइब्रेंट गुजरात में नरेंद्र मोदी का स्‍टाइलिश लुक

    हमें तो सुषमा ही चाहिए: शिवसेना, नरेंद्र मोदी को इन चार नेताओं से मिल सकती है टक्‍कर

    बचपन में मगरमच्छ लेकर घर पहुंच गए थे मोदी

    मोदी V/s राहुल: बलात्‍कार, मुसलमान, पाकिस्‍तान पर क्‍या है इनकी राय, जानें

    16 फरवरी की खास खबरें

  • गुरुद्वारा रकाबगंज पर कांग्रेस वाररूम में उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने तमाम प्रदेश अध्यक्षों और विधायक दल के नेताओं को साफ संदेश दिया कि पार्टी में भितरघातियों के लिए कोई जगह नहीं है, चाहे उसकी हैसियत कुछ भी हो। वे 2014 के आम चुनाव और उससे पहले विधानसभा के चुनावों को लेकर प्रदेश नेताओं से विचार कर रहे थे।

    बैठक में अधिकतर नेता राज्य में पार्टी की गुटबाजी की शिकायत करते नजर आए। कुछ प्रदेश अध्यक्षों ने कई बड़े नेताओं के बारे में कहा कि वे हमारी सुनते ही नहीं हैं। खबर तो यह भी है कि दिल्‍ली की मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित और दिल्‍ली प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष जेपी अग्रवाल पंद्रह मिनट तक राहुल के सामने ही भिड़े रहे। अग्रवाल की शिकायत थी कि उन्‍हें दिल्‍ली सरकार के कार्यक्रमों में आमंत्रित ही नहीं किया जाता। इस पर दीक्षित का कहना था कि अग्रवाल सरकार के अच्‍छे कामों की तारीफ करने के बजाय आलोचनाओं में ही लगे रहते हैं।
    राहुल ने साफ कहा कि पार्टी को अंदर कमजोर करने वाले नेताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे उनकी हैसियत कुछ भी हो। कांग्रेस उपध्यक्ष ने कहा कि खासकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों में कांग्रेस विपक्ष से नहीं बल्कि खुद की कलह से हारती है। ये ऐसे प्रदेश हैं जहां लोकसभा की 200 से ज्यादा सीटें हैं इसलिए यहां पार्टी को कलह से बचना ही पड़ेगा।
    सूत्रों के मुताबिक प्रदेश अध्यक्षों को ये निर्देश भी दिए गए कि वे हर विधानसभा और लोकसभा सीट के लिए कम से कम चार उम्मीदवार तैयार करे, ताकि पार्टी को उम्मीदवार के चयन में आसानी हो। क्षेत्रीय पार्टियों से खासकर बिहार और यूपी में कैसे निपटें इस पर भी चर्चा हुई।
  • गांधीनगर. भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से शुक्रवार को यहां सौजन्य भेंट की। दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय हालात के संदर्भ में चर्चा हुई। आडवाणी शुक्रवार को शहर में थे। अन्य एक बैठक में कहा कि केन्द्र सरकार की ओर से आम बजट में प्रस्ताव और राहत के जो प्रावधान किए जाएंगे उनसे लोकसभा मध्यस्थ चुनावों के संकेत मिल जाएंगे। दूसरी ओर बजट सत्र के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने शनिवार को राज्य के सांसदों की बैठक बुलाई है। आडवाणी गांधीनगर सांसद के नाते इस बैठक में हिस्सा लेंगे। तत्पश्चात दिल्ली लौटेंगे।

  • अब बुद्धिजीवियों को पाले में लाने की होगी कोशिश
    कांग्रेस की निगाह अब बुद्धिजीवी कहे जाने वाले वर्ग प्रोफेसर, डॉक्टर, वकीलों व प्रोफेशनल पर टिकी है। पार्टी 20 तारीख को अपने विचार विभाग के जरिए देश भर से ऐसे ही लोगों को एक सेमिनार में बुला रही है। कांग्रेस मुख्यालय पर प्रस्तावित ‘नेशनल सेमिनार ऑन एचीवमेंट ऑफ यूपीए गवर्नमेंट’ में यूपीए सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा होगी। मकसद होगा सरकार के कामकाज को इन वर्गों तक पहुंचाना और फिर इनके जरिए लोगों के बीच प्रचार प्रसार करना। कांग्रेस विचार विभाग की अध्यक्ष गिरजा व्यास कार्यक्रम के आयोजन का जिम्मा संभाल रही हैं। सेमिनार में केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश और कपिल सिब्बल बतौर मुख्य वक्ता शामिल होंगे। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इसमें शिरकत करेंगे। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के भी बैठक में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
    पार्टी सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों तमाम आंदोलनों में इसी तबके ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की। मध्यम वर्ग की राय बनाने में इसी वर्ग की भूमिका होती है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने बहुत अच्छे काम किए हैं लेकिन यह कामकाज लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। लोगों के बीच सरकार की नकारात्मक छवि पेश की जा रही है। जयपुर के चिंतन शिविर में खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार के कामकाज को लोगों तक पहुंचाने के लिए पार्टीजनों से विशेष प्रयास करने को कहा था। सेमिनार इसी कड़ी में आयोजित किया जा रहा है।
    सोशल साइट्स के जरिए युवाओं से जुडऩे और युवा व मध्यम वर्ग को फोकस करके प्रचार कार्यक्रम केंद्रित रणनीति पार्टी के जेहन में है। सेमिनार के बाद पार्टी प्रदेशों में विचार विभाग के जरिए लोगों को जोडऩे का अभियान शुरू करेगी।

    नीतीश के खिलाफ बगावत:चार बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ी,बताया तानाशाह

    गडकरी के 'दुश्‍मनों'के चलते निर्विरोध अध्‍यक्ष चुने गए राजनाथ सिंह

    पहले कार्यकाल में राजनाथ ने आडवाणी से लिया था बदला

    EXCLUSIVE:सिमी ने कांग्रेस को बताया आरएसएस से ज्‍यादा खतरनाक

    INSIDE STORY:भाई की मदद के लिए गुपचु जयपुर पहुंच गई थीं प्रियंका

    राहुल गांधी ने पहली बार दुनिया को बताईं निजी जिंदगी की ये5बातें

  • लचर संगठन राजनाथ के लिए सबसे बड़ी चुनौती
    भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह को विरासत में मिला संगठन चुनावी लिहाज से लडऩे के मुफीद नहीं है। यदि संगठन की मौजूदा स्थिति कायम रही तो इस साल होने वाले 9 राज्यों और अगले वर्ष के लोकसभा चुनावों में भाजपा पिछड़ जाएगी। यह आलम बयां कर रहा है पार्टी अध्यक्ष को मिला वह फीडबैक जो विभिन्न राज्यों से भेजा गया है।
    हालांकि राजनाथ सिंह का कहना है कि पार्टी का संगठन काफी मजबूत है और यदि कुछ कमी है तो वह ठीक हो जाएगी। पार्टी को जो फीडबैक मिला है उसके मुताबिक सिर्फ चार राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात में संगठन विरोधी दलों के मुकाबले मजबूत स्थिति में है। लेकिन अन्य राज्यों में सबसे बड़े विरोधी दल या दलों के मुकाबले संगठन कमजोर है और कार्यकर्ता भी उत्साहित नहीं हैं। छह राज्यों उत्तर प्रदेश, झारखंड, दिल्ली, कर्नाटक, हिमाचल, उत्तराखंड में विरोधी दलों के संगठन अधिक मजबूत हैं। इन राज्यों से लोकसभा की 136 सीट हैं।
    हालांकि फीडबैक में राजस्थान और बिहार में संगठन के मजबूती पकडऩे और कार्यकर्ताओं में उत्साह की रिपोर्ट है लेकिन यहां भितरघात जैसे खतरे पर ध्यान देने की सिफारिश की गई है। केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडीशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भाजपा चुनावी मुकाबले से दूर है। अर्थात इन राज्यों की लगभग १७० सीटों पर पार्टी को गठजोड़ करने के लिए भी संगठन को मजबूत करना पड़ेगा। भाजपा से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने ११६ सीटें जीती थीं और लगभग 80 सीटों पर पार्टी ने विरोधी दलों को कांटे की टक्कर दी थी। इनमें ६० से अधिक सीटें कांग्रेस की झोली में गई थीं। भाजपा का आकलन है कि कांग्रेस से नाराज वोटर इन सीटों पर भाजपा की किस्मत बदल सकता है लेकिन इसके लिए शर्त संगठन को मजबूत करना है। ये सभी ए श्रेणी की सीटें हैं। भाजपा ने २८० ऐसी सीटों का आंकड़ा भी तैयार किया है जहां पार्टी ने कभी न कभी जीत हासिल की है।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: political news
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।

Stories You May be Interested in

      More From National

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top