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'सन ऑफ पंजाब' ने नेताजी के साथ मिल लड़ी थी आजादी की जंग

भास्कर न्यूज | Dec 10, 2012, 02:04 AM IST

'सन ऑफ पंजाब' ने नेताजी के साथ मिल लड़ी थी आजादी की जंग
जालंधर। हजारों मील दूर गुलामी की जंजीरों में जकड़ी भारत माता आपको पुकार रही है; तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा..। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कही इन पंक्तियों ने बेगोवाल टांडा के रहने वाले फौजी अजीत सैनी की जिंदगी बदल दी।
फौज में रहते हुए जनरल मनमोहन सिंह के संपर्क में आए और नेताजी के पीआरओ बने। उनके साथ बरमा, रंगून और मलाया के जंगलों व शहरों में आजादी की लड़ाई लड़ी।
जंग के दौरान कई रातें बंकरों में रहकर गुजारीं। उन्हीं बंकरों में सैनी को एक रात जांघ पर सांप ने डंक मार दिया। नीचे सांप और ऊपर जर्मनी फौजी उन्हें मारने के लिए बाहर खड़ी थे। ऐसे में उन्होंने अपनी जांघ में खुखरी से प्रहार किया और जांघ के मांस को निकाल कर सारी रात दर्द को सहते हुए सांस की आवाज रोक कर गुजारी।
1943 में आईएनए के अधिकारी बनकर मलाया में रहे। 1944 में सिंगापुर में आजाद हिंद फौज के प्रवक्ता बने। इस फौज के सहायक संपादक भी रहे और 1945 में नेताजी के पीआरओ रंगून में रहे। ढिल्लो शाह नवाज के साथ लाल किले-जैगरगचा चाट कोलकाता में जेल भी काटी।
भारत के आजाद होने के बाद 1947 से 52 तक प्रभात उर्दू जालंधर व अन्य समाचार पत्रों से जुड़े। भारत सरकार ने सूचना व प्रसारण विभाग में 1956 से 1979 से सीआईएस अधिकारी के तौर पर काम किया। कुलदीप नैय्यर और कुलवंत सिंह विर्क के साथ रहे। सैनी का जन्म 1922 में 23 मई को हुआ था।
उन्होंने प्रिंसिपल संत भगवंत सिंह से शिक्षा हासिल की। उन्होंने अपने जीवन में 25 कहानियों की किताबों के अलावा स्वैजीवनी और अन्य किताबें लिखी। जिनको हिंदी, उर्दू, पंजाबी, बंगला, अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया। दूरदर्शन के लिए सीरियल भी लिखे।
स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनको ताम्र-पत्र देकर सम्मानित किया। त्याग की भावना से लोगों की सेवा करते हुए ईमानदार सरकारी अधिकारी, पत्रकार और लेखक सैनी 10 दिसंबर 2007 को वह जीवन को अलविदा कहकर मौत की आगोश में समा गए।
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Web Title: Son of Punjab was fought of freedom struggle along with the Netaji Subhash Chandra Bose
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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