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पानी कम होते ही दिखा ये प्राचीन मंदिर, पांडव बना रहे थे स्वर्ग का रास्ता

bhaskar news | May 20, 2017, 09:52 IST

  • लुधियाना.पंजाब के तलवाड़ा शहर से करीब 34 किलोमीटर की दूरी पर पोंग डैम की झील के बीच बना एक अद‌्भुत मंदिर, जो साल में सिर्फ चार महीने (मार्च से लेकर जून तक) ही नजर आता है। बाकी समय मंदिर पानी में ही डूबा रहता है। पानी उतरने के कारण अब ये मंदिर नजर आने लगा है जिससे यहां पर टूरिस्ट का आना शुरू हो जाएगा।मंदिर बहुत ही मजबूत पत्थर से बना है और इसलिए 35 साल पानी में डूबने के बाद यह मंदिर वैसा का वैसा ही है। ये है पानी में डूबे रहने का कारण...
    -इन मंदिरों के पास एक बहुत ही बड़ा पिल्लर है। जब पौंग डैम झील का पानी काफी ज्यादा होता है तब यह सभी मंदिर पानी में डूब जाते है, लेकिन सिर्फ इस पिल्लर का ऊपरी हिस्सा ही नजर आता है।
    - इस मंदिर के पत्थरों पर माता काली और भगवान गणेश जी के प्रीतिमा बनी हुई है। मंदिर के अंदर भगवान विष्णु और शेष नाग की मूर्ति रखी हुई है।
    - इस मंदिर तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। मंदिर के आस-पास टापू की तरह जगह है जिसका नाम रेनसर है।
    - रेनसेर में फॉरेस्ट विभाग का गेस्ट हाउस है। यहां पोंग डैम बनने से पहले देश के कोने-कोने से लोग यहां दर्शन करने के लिए आते थे।
    - यहां पर कई तरह के प्रवासी पंछी देखे जा सकते हैं। मार्च से जून तक दूर-दूर से पर्यटक इस मंदिर को देखने के लिए आते हैं।
    - इस मंदिर तक पहुंचने के लिए तलवाड़ा से ज्वाली बस द्वारा आया जा सकता है।
    पानी में रहने के बाद अभी तक सही सलामत है इमारत
    - यहां पर कुल आठ मंदिर हैं, जो कि बाथू नामक पत्थर से बने हैं। इसलिए इसका नाम बाथू की लड़ी पड़ा है।
    - इन मंदिरों के पास एक बहुत बड़ा पिल्लर है, जब झील में जलस्तर बढ़ जाता है तो सिर्फ पिल्लर का ऊपरी हिस्सा नजर आता है।
    - पिल्लर के अंदर लगभग 200 सीढ़ियां हैं। पिल्लर के ऊपर से 15 किलोमीटर तक झील का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है।
    पांडवों ने लिया था आश्रय..
    - त्रेता युग से पहले अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां आश्रय लिया था और भगवान शिव की पूजा करने के लिए यह मंदिर बनवाया था।
    - इन मंदिरों के बारे में कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडव ने यहां स्वर्ग जाने के लिए सीढ़ी बनवाने की कोशिश की थी। जो सफल नहीं हो सकी।
    - तब वह शिवरात्रि को भगवान शिव की पूजा करते थे। अब मंदिर साल में चार महीने ही नजर आता है। जिन दिनों में पानी होता है तो लोग कश्तियों की मदद से मंदिर तक जाते हैं।
    आगे की10 स्लाइड्स में देखें इस मंदिर की Photos...
  • दूर से कुछ ऐसा दिखता है मंदिर।
  • बाथू का मंदिर झील में डूबा रहता है।
  • मंदिर बहुत ही मजबूत पत्थर से बना है और इसलिए 30 साल पानी में डूबने के बाद यह मंदिर वैसा का वैसा ही है।
  • कई विदेशी लोग भी मंदिर देखने आते हैं।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: bathu ki lari temples sumberged 8 month in the water
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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