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मिशन एग्जामिनेशनः आजमायें ये चंद खास नुस्खे और आप भी बन जाएंगे टॉपर!

भास्कर न्यूज | Jan 26, 2013, 00:06 IST

  • किसी भी परीक्षार्थी के जीवन में परीक्षा का काफी महत्व होता है। विशेषकर स्टूडेंट लाइफ तो एग्जाम्स के बिना अधूरी है। ऐसे में जब चंद दिन ही बाकी रह गए हैं 10वीं और 12वीं बोर्ड व अन्य एनुअल एग्जामिनेशन्स को तो इनके लिए तैयारी में लगे स्टूडेंट्स युद्धस्तर पर अपने योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में लग गए हैं। ऐसे में जरूरत होती है एक विशेष प्रकार के माइंडसेट और मार्गदर्शन की जो हमें न सिर्फ इंस्पायर होने में मदद करता है बल्कि सही गाइडेंस भी प्रोवाइड करता है। इस पैकेज के जरिए हम आपको बता रहे हैं कुछ खास नुस्खे जिन्हें आजमाकर आप परीक्षाओं में बेहतर परीणाम हासिल कर सकते हैं। जानिए टॉपर्स और टीचर्स की जुबानी कैसी हो परीक्षाओं की तैयारी और क्या हैं वो खास बातें जिन्हें याह रखकर आप बन सकते हैं इम्तेहान के सिकंदर जानिए इस सेग्मेंट में.....
  • आराम जरूरी है पर पाना होगा अरामतलबी पर काबू
    मैंने कैसे की तैयारीः
    सोनाली : 12वीं (कॉमर्स) में 94.6 फीसदी अंक
    सोनाली ने कॉमर्स में 94.6 फीसदी अंक हासिल किए है। अब दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम कर रही हैं। उनके पिता तरसेम लाल बिजनेस करते हैं। माता सुनीता घरेलू कामकाज देखती हैं।
    परीक्षा की तैयारी के लिए कोई खास काम नहीं किया था, लेकिन नींद पूरी करने के बारे में सोचना बंद कर दिया था। सुबह जल्दी उठ जाती थी और देर रात तक पढ़ती थी। जिस कारण अच्छे नंबर भी आए। सिलेबस को पहले से ही पूरा कर लिया था।
    दोहराया हर सब्जेक्ट : जब तक विषय पर पकड़ मजबूत नहीं हुई तब तक सब्जेक्ट को दोहराती थी। अगर अच्छे नंबर आए हैं तो उसका एक बड़ा कारण यही है। क्लास में जो भी पढ़ाया जाता था उसे ध्यान से पढ़ती थी। सप्ताह के अंतिम दो दिनों में पढ़ा करती थी।
  • किसी शंका को रहने ही नहीं दिया :परीक्षा जब भी आती हैं तो शंकाएं जरूर होती हैं, लेकिन परीक्षा से पहले शंकाओं को दूर करना जरूरी है। उन्होंने भी ऐसा ही किया था। परीक्षा जब आई तो किसी भी शंका को रहने ही नहीं दिया।
    सुबह जल्दी उठ पढ़ती थी : सुबह छह बजे उठ जाती थी। फिर साढ़े छह बजे से लेकर दस बजे तक पढ़ती थी। नाश्ता करने के बाद थोड़ा आराम करके फिर पढ़ने लग जाती थी। यह सिलसिला रात 12 बजे तक चलता था।
    बाहर सिर्फ सूप पीने जाती थी : बाहर का खाना पहले से ही बंद था। कभी-कभार सिर्फ सूप पीने के लिए ही बाहर जाया करती थी। साथ ही हेल्दी फूड खाना भी शुरू किया था।
    आधा घंटे देखती थी टेलीविजन : आधा घंटा रोजाना टेलीविजन देखती थी। महादेव सीरियल काफी अच्छा लगता है। इसलिए सिर्फ यही सीरियल
    देखती थी।
  • टॉपर्स स्पीक

    अवनीत कौर :10वीं में मिला ए-वन सीजीपीए 10
    अवनीत कौर ने शिव ज्योति पब्लिक स्कूल से दसवीं में ए-वन सीजीपीए 10 हासिल किया है। ग्यारहवीं नॉन मेडिकल स्वामी संतदास पब्लिक स्कूल में पढ़ रही हैं। पिता गुरमीत सिंह बिजनेसमैन हैं। माता सिमरनजीत कौर हाउस वाइफ हैं।
    शादी में भी नहीं गई :परीक्षा से पहले बुआ की बेटी की शादी थी। हर सब्जेक्ट की बढ़िया तैयारी भी थी, लेकिन फिर भी शादी में नहीं गई। शादी से ज्यादा अपनी पढ़ाई को महत्व दिया।
    साइंस व मैथ्स को ज्यादा दोहराया :साइंस व मैथ्स में काफी डर लगता था। इसलिए परीक्षा तक पांच बार साइंस को दोहराया था। मैथ्स को तो कई बार दोहराया था। सैंपल पेपर भी हल किए थे।
    डाउट कॉपी बनाकर दूर की शंकाएं :स्कूल के अध्यापकों ने डाउट कॉपी बनाने को कहा था। इसमें अपनी सारी शंकाएं लिख लिया करती थी। फिर अध्यापकों के पास जाकर शंकाएं दूर करती थीं।
    रात तक बैठकर करती थी पढ़ाई :सुबह की बजाय रात को ज्यादा समय पढ़ती थी। तीन बजे स्कूल से वापस आने के बाद थोड़ा आराम करके ट्यूशन चली जाती थी। फिर सात बजे वापस आती थी। नौ बजे खाना खाने के बाद देर रात तक पढ़ाई करती थी। रात में पढ़ना अच्छा लगता है, क्योंकि शोर-शराबा नहीं रहता।
    हेल्दी फूड खाया : खानपान में कोई बदलाव नहीं किया था। सिर्फ हेल्दी फूड ही खाया था। माता-पिता हमेशा ही बाहरी खाना न खाने के लिए कहते थे। इसलिए बाहरी खाना खाया ही नहीं करती थी।
    म्यूजिक के साथ पढ़ती थी: पढ़ाई करने के समय हल्का म्यूजिक चला लेती थी। इससे बोरियत महसूस नहीं होती और पढ़ाई भी अच्छी होती थी। इसी से दिल बहल जात था। ज्यादा ध्यान पढ़ाई पर ही रहता है।

  • तीन हिस्सों में बांटते थे दिनभर की पढ़ाई की रुटीन
    आयुष कौशल : 12वीं (नॉन मेडिकल) में 91 फीसदी अंक
    आयुष कौशल ने सेठ हुकम चंद एसडी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल से बारहवीं नॉन मेडिकल करके 91 फीसदी अंक हासिल किए है। अब एनआईटी से सिविल इंजीनियरिंग कर रहे हैं। पिता राजेश कौशल आरसीएफ में सीनियर सेक्शन इंजीनियर हैं। माता रमा कौशल हाउस वाइफ हैं।
    टाइम मैनेज करना सीखा था :टाइम को मैनेज करना सीख लिया था। अपनी दिन की पढ़ाई को तीन भागों में बांटता था। लंच से पहले, लंच से बाद और रात को। तीनों भागों में सब्जेक्ट डिवाइड थे और सभी को बराबर समय दिया था।
    लाइट फूड ही खाता था : परीक्षा के दिनों में हैवी फूड खाना बंद कर दिया था। सिर्फ लाइट फूड की खाता था। इससे अच्छी तरह पढ़ाई हो जाती थी।
  • सुरभि सरना : 10वीं में मिला ए-वन सीजीपीए 10
    सुरभि सरना ने सेठ हुकम चंद एसडी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल से दसवीं करके ए-वन सीजीपीए 10 हासिल किया है। अब 11वीं में सुपर मेडिकल लिया है। पिता राजेश कुमार करियाना स्टोर चलाते हैं। माता सरिता सरना हाउस वाइफ हैं।
    विषय समाप्त करके ही उठता था : हमेशा टारगेट बनाकर पढ़ाई करने बैठता था। सोच कर रखता था कि आज इन विषयों को समाप्त करना है। फिर इन्हें समाप्त करके ही उठता था। परीक्षा से पहले चाचा की एंगेजमेंट भी थी, लेकिन उस दिन जो टारगेट लिया था वह पूरा नहीं हो सका।
    फरवरी तक पूरी कर ली थी तैयारी :फरवरी माह तक सारी तैयारी पूरी कर ली थी। फिर एक माह यानी मार्च तक सिर्फ हर सब्जेक्ट को दोहराया ही था। इससे पहले भी टेस्ट के दौरान विषय को दोहराया गया था।
    शंकाओं को दोस्तों संग मिल हल किया :परीक्षा के दौरान कई तरह की शंकाएं थी। फिजिक्स व मैथ्स के न्यूमेरिकल्स तो फंसा ही लेते थे। हमेशा अपने दोस्तों की सहायता लेते थे। फिर टीचरों के पास जाकर उन्हें हल करवाते थे।
    परीक्षाओं में ही दोहराया हर सब्जेक्ट : जब परीक्षा हुई तो हर सब्जेक्ट को दोहराया था। इससे पहले स्कूल में साप्ताहिक और मासिक टेस्ट भी होते थे। इस दौरान भी सब्जेक्ट की दोहराई हो जाती थी।
    शंकाओं पर बनाई थी कॉपी :परीक्षा संबंधी जो भी शंकाएं होती थी उसे कॉपी पर लिख लिया करती थी। जब भी टीचर से मिलने का मौका मिलता तो कॉपी साथ ले जाती थी। इस दौरान शंकाएं भी दूर हो जाती थी।
    पहले ट्यूशन देती थी फिर खुद पढ़ती थी :पहले छठीं व सातवीं के बच्चों को ट्यूशन देती थी। फिर खुद पढ़ने लग जाती थी। वह तब तक दो-तीन घंटे ट्यूशन पढ़ाती थी। फिर खुद पढ़ती थी। जब तक मन करता था पढ़ती थी।
    खानपान में नहीं किया था कोई चेंज :खानपान में कोई चेंज नहीं किया था। अपना ध्यान रखो तो खानपान में कोई बदलाव करने की जरूरत ही नहीं पड़ती है।
    डांस कर व म्यूजिक सुन बहलाती थी दिल : डांस करके व म्यूजिक सुनकर दिल को बहलाती थी। 10 से 15 मिनट बाद फिर पढ़ाई करने लग जाती थी।
  • परीक्षा से पहले अध्यापक से मिल हर शंका कर लें दूर

    आरती : दसवीं में 90 प्रतिशत
    सरकारी गल्र्स सीनियर सैकंडरी स्कूल रेलवे मंडी होशियारपुर में 11वीं की छात्रा आरती ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में 9क् प्रतिशत अंक हासिल किए। इस समय इसी स्कूल में 11 वीं की पढ़ाई कामर्स स्ट्रीम में कर रही है। आरती के पिता किशन कुमार मूल रुप से यूपी से होशियारपुर आकर मेहनत मजदूरी करते हैं वहीं मां सुमेरा देवी गृहणि है।
    पिछले साल के पेपरों से की तैयारी: बोर्ड परीक्षा से पहले पिछले साल के पेपरों की तैयारी की इनसे मुझे काफी मदद मिली। इससे पेपर के पैट्रन की जानकारी मिली साथ ही अच्छे नंबर लेने की शियोरिटी भी मिली।
    बार बार दोहराया हर सब्जैक्ट : हाउस एग्जाम और विकली टैस्ट के कारण हर सब्जैक्ट को बार बार दोहरा दिया था। परीक्षा की तैयारी के लिए रिविजन करना बहुत जरुरी होता है इससे विषय को अच्छी तरह से समझने में मदद मिलती है। परीक्षा के नजदीक आने पर भी वह हर सब्जैक्ट को दोहरा लिया था। इससे पेपर को लेकर सभी शंकाए दूर हो गई थी।
    किसी शंका को नहीं रहने दिया:परीक्षा तक किसी भी शंका को नहीं रहने दिया जितनी भी शंकाए मन में थी सभी को दूर कर लिया। शायद यहीं मेरी सफलता का राज थी।
    टाईम तो कभी देखा ही नही :पढ़ाई करते समय पढ़ाई पर ध्यान
    इतना एकाग्रचित रहता था कि कभी टाईम को देखा ही नहीं हमेशा दिल लगाकर ही पढ़ती थी।

  • इन्द्रजीत कौर : दसवीं में 94.7 प्रतिशत (मैरिट)
    सरकारी सीनियर सैकंडरी स्कूल ढड्डेफतेहसिंह स्कूल में 11 वीं आर्ट्स की छात्रा ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में 94.70 प्रतिशत अंक हासिल कर पंजाब में 21वां रैंक हासिल कर इस इसी स्कूल में 11वीं की पढ़ाई आर्ट्स स्ट्रीम में कर रही है। उनके पिता अवतार सिंह गीगनोवाल में खेतीबाड़ी करते हैं जबकि मां आशारानी गृहणि है।
    जब दिल करता तब पढ़ती थी : पेपर की तैयारी के लिए मैने रूटीन तैयार कर ली थी। रोजाना 5 से लेकर 6 घंटे तक पढ़ती थी इस दौरान मेरा पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई में ही होता था। जिसकी वजह से पंजाब में 21 वें व जिले में चौथे स्थान पर रही थी।
    बार बार दोहराया हर सब्जैक्ट: हर सब्जैक्ट को एक बार अच्छी तरह पहले ही पढ़ लिया था। बाद में उसको तीन बार दोहरा लिया था। किसी तरह की शंका
    मन में नहीं रहने दी। जो थोड़ी बहुत समस्या थी उसे टीचर्स के साथ बात करके दूर कर लिया था। परीक्षा के दिनों में ऐसा लग रहा था कि बाकी बचा ही नहीं है। परीक्षा अच्छी तैयारी करने के बाद ही दी थी।
    सेहत का रखा ध्यान : परीक्षा के दौरान कहीं बीमार न पड़ जाउं हमेशा डर सताता रहता था लAेकिन खानपान का ज्यादा ध्यान रखा था। हमेशा वहीं खाया करती थी जो परेशानी न खड़ी करें। इस दौरान पौष्टिक आहार पर पूरा जोर दिया।
    घर का काम कर बहलाती थी दिल : जब पढ़ाई से मन ऊब जाता था तो घर के काम में मां व दादी का हाथ बंटाती थी। घर का काम करने के दौरान भी उसका ध्यान हर सब्जैक्ट पर लगा रहता था।
  • पेपर के दिनों में खिचड़ी, फ्रूट और जूस ही लेती थी
    सुष्मिता चौधरी : 12वीं (मेडिकल) में 91 फीसदी अंक
    सुष्मिता चौधरी ने सेठ हुक्म चंद एसडी पब्लिक सीसे स्कूल संगल सोहल ब्रांच से बारहवीं (मेडिकल) में 91 फीसदी अंक हासिल किए। पीएमटी टेस्ट के बाद अब एमबीबीएस की तैयारी कर रहीं हैं। पिता जरनैल सिंह टीचर है। माता विकलव कुमारी सोशल सिक्योरिटी में हैं।
    10 से 12वीं तक किसी कार्यक्रम में नहीं गई : दसवीं के बाद बारहवीं कक्षा में मेडिकल विषय लिया तो हर कार्यक्रम में हिस्सा लेना ही छोड़ दिया। परीक्षा से पहले व बाद में कई कार्यक्रम आए, लेकिन किसी में भी हिस्सा नहीं लिया। सिर्फ अपनी पढ़ाई की तरफ ही ध्यान दिया। साथ ही टीचर की गाइडेंस में पेपर दिया था।
    कई बार दोहराए सब्जेक्ट : हर सब्जेक्ट को पता नहीं कितनी बार दोहराया। जो विषय हो जाते उन्हें कई बार दोहराती थी। इससे विषय पर पकड़ मजबूत हो गई थी। अगर पेपर अच्छे गए थे तो इसका अहम कारण यह भी था।
    नहीं थी कोई शंका : पेपरों में कोई शंका नहीं थी। अपनी शंकाओं को अध्यापकों और दोस्तों के साथ चर्चा करके दूर कर लिया था। फिर कोई शंका रही ही नहीं।
    सुबह चार बजे उठकर पढ़ती थी : परीक्षा की तैयारी में दिनचर्या खराब हो गई थी। रोजाना सुबह चार बजे उठ जाती थी। छह बजे तक पढ़ने के बाद स्कूल चली जाती थी। ढाई बजे स्कूल से आने के बाद साढ़े चार बजे तक रेस्ट करती थी। फिर पढ़ाई शुरू कर देती थी। रात डिनर के बाद दस बजे सो जाती थी।
    लाइट फूड ही खाती थी : पेपर के दिनों में सिर्फ लाइट फूड खाती थी। इनमें खिचड़ी, फ्रूट और जूस ही लेती थी। माता-पिता खाने-पीने का ज्यादा ध्यान रखते थे।
    टेलीविजन देख बहलाती थी मन :जब पढ़ाई में बोरियत महसूस होने लगती थी तो टेलीविजन देखकर मन को बहलाती थी। इस पर दो घंटे का समय लगाती थी। फिर पढ़ाई करने में जुट जाती थी।
  • सन्नी सिहांग :10वीं में मिला ए-वन सीजीपीए 10
    सन्नी सिहांग ने दसवीं में ए-वन सीजीपीए 10 हासिल किया है। वह सेठ हुक्म चंद एसडी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल संगल सोहल ब्रांच से गयारहवीं कर रहे हैं। उनके पिता इशवर सिहांग मेकेनिकल इंजीनियर है। माता संतोष हाउस वाइफ है।
    स्कूल में जो पढ़ा उसके सहारे दी परीक्षा : स्कूल में जो भी पढ़ा था, बस उसी के सहारे ही परीक्षा दी थी। न ट्यूशन पढ़ी और न ही कोई ग्रुप ज्वाइन किया था। घर आकर स्कूल में पढ़ा हुआ दोहराया करता था। बस इसी कंसेप्ट को आज भी फॉलो कर रहा हूं।
    दो से तीन बार दोहराया हर सब्जेक्ट : परीक्षा की तैयारी करने के लिए हर सब्जेक्ट को दो से तीन बार दोहराया था। इससे पहले फरवरी तक हर सब्जेक्ट को अच्छी तरह पढ़ लिया था। फिर एक माह हर विषय को सिर्फ दोहराया ही था।
    नहीं रहने दी कोई शंका : परीक्षा तक कोई शंका रहने ही नहीं दी थी। हर शंका को परीक्षा से पहले ही अध्यापकों की मदद से दूर कर लिया था।
    चार से पांच घंटे पढ़ता था रोजाना : रोजाना चार से पांच घंटे ही पढ़ता था। इसमें सिर्फ स्कूल में पढ़ाए हुए को ही दोबारा रिवाइज करता था। कई बार टेस्ट मिल जाते थे तो टेस्ट की तैयारी भी कर लिया करता था। यहीं रूटीन था। बस अपनी रूटीन में फ्रैंड्स से मिलने का समय नहीं निकाल पाता था।
    खानपान में नहीं किया बदलाव :खानपान में कोई बदलाव नहीं किया, क्योंकि पहले से ही बाहर का नहीं खाते थे। बस घर में जो बनता था उसे ही खाया करते थे।
    गीत सुनकर बहलाता था मन : अपना मन टेलीविजन और कंप्यूटर पर गीत सुनकर बहलाया करता था। इसके लिए कोई समय निश्चित नहीं किया था। जब दिल करता था तो सुन लिया करता था।
  • क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
    जो महत्वपूर्ण है उसे जरूर पढ़ें।
    हर सब्जेक्ट को बराबर का समय दें।
    टाइम मैनेजमेंट से पढ़ाई करें।
    ट्यूशन बेस नहीं रहना चाहिए।
    - नीरू नय्यर
    वाइस प्रिंसिपल, शिव ज्योति पब्लिक स्कूल
  • टीचर के संपर्क में रहें। टॉप करने में टीचर का सहयोग जरूरी है।

    शंकाओं को दूर करें।
    हर विषय को समझे, सिर्फ पढ़े न।
    आपस में बैठकर शंकाओं को दूर करें।
    -रमा अरोड़ा, सोशल साइंस अध्यापिका, सेठ हुक्म चंद एसडी स्कूल संगल सोहल ब्रांच
  • तनाव रहित होकर पढ़ें।
    ज्यादा रिवीजन करें।
    पिछले वर्ष के पेपर जरूर देखें इससे पेटर्न पता चलता है। कोई शंका हो तो टीचर से मिलें।
    कुलदीप कौर, प्रिंसिपल, रिटायर्ड जिला शिक्षा अधिकारी होशियारपुर।

  • मुश्किल विषय करने के लिए टीचर से सलाह लें।
    परीक्षा की तैयारी करते समय कुछ रहने मत दें।
    अंतिम दिन तक टीचर से संपर्क बनाए रखें।
    -मंजू अरोड़ा, प्रिंसिपल, सेठ हुकम चंद एसडी पब्लिक सीसे स्कूल संगल सोहल ब्रांच।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: special package on board examinations
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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