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यहां कपड़ा फाड़ होली खेलने आते हैं विदेशी, ये हैं देश की 10 अनोखी होली

dainikbhaskar.com | Mar 12, 2017, 22:52 IST

  • नई दिल्ली. देश में अलग-अलग तरह से होली मनाई जाती है। पारंपरिक होली से लेकर डीजे के साथ मॉडर्न पार्टीज, भांग और ढेर सारे रंगों के साथ कई तरह से होली लोग मनाते हैं। इन जगहों और यहां मनाई जाने वाली होली के तरीकों के बारे में कम ही जानते होंगे। होली के मौके पर आज हम आपको देश के कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां होली का अपना अलग ही तरीका है। पुष्कर की कपड़ा फाड़ होली...
    - राजस्थान की तीर्थनगरी पुष्कर की होली पिछले कई सालों से चर्चा में रहती है और यहां एक नए अंदाज में सेलिब्रेशन होता है।
    - यहां पर कपड़ा फाड़ होली खेली जाती है, जिसका देशी और विदेशी पर्यटक जमकर होली खेलते हैं।
    ऐसे खेलते हैं होली...
    - वराह घाट चौक पर होने वाले इस आयोजन में होली की उमंग से सराबोर महिलाएं टूरिस्टों के कपड़ें फाड़ देती हैं।
    - जमीन से काफी ऊपर एक रस्सी बंधी होती है, फटे हुए कपड़े इस रस्सी पर फेंके जाते हैं।
    - कपड़ा यदि रस्सी पर लटक गया तो सभी ताली बजाते हैं और यदि कपड़ा लटकने के बजाय नीचे गिर जाता है तो सभी हाय-हाय करते हैं।
    महिलाओं का खासा ध्यान रखा जाता है...
    - आयोजन में महिलाओं का खासा ध्यान रखा जाता है कि उनके साथ कोई छेड़खानी न हो, इसके लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाता है।
    - पहले केवल रंग-गुलाल की होली खेली जाती थी परन्तु बाद में बाहर से घूमने आए सैलानियों ने इसे कपड़ा फाड़ होली बना दिया।
    आगे की स्लाइड्स में देखें भारत में इन तरीकों से भी मनाई जाती है होली...
  • कुर्ता फाड़ होली- बिहार...
    कुर्ता फाड़ होली- बिहार
    - बिहार में होली के एक चलन ने अपना ही रंग जमा लिया है।
    - यह चलन है 'कुर्ता फाड़ होली' का. मजेदार ये है कि होली की यह परंपरा मर्दो तक ही सीमित नहीं है और न ही यह किसी खास वर्ग की परंपरा है।
    - सुबह में कादो (कीचड़) का खेल चला करता था। इसमें कीचड़ के साथ गोबर का मिश्रण बनाया जाता था, जिससे होली खेली जाती थी।
    - सुबह 10 से 11 बजे तक इस होली का चलन था। इसी क्रम में कपड़े शरीर से अलग किए जाते थे, ताकि कीचड़ से पूरा शरीर रंगा हुआ नजर आए।
    - दो समूहों में बंटे लोग एक-दूसरे पर इसे आजमाते थे।
  • होला मोहल्ला होली- पंजाब
    होला मोहल्ला होली- पंजाब
    - पंजाब में होली को 'होला मोहल्ला' कहते हैं जो पवित्र धर्मस्थान श्री आनंदपुर साहिब में होली के अगले दिन मनाया जाता है।
    - यहां पर होली पौरुष के प्रतीक पर्व के रूप में मनाई जाती है। इसीलिए दशम गुरू गोविंदसिंहजी ने होली के लिए पुल्लिंग शब्द होला मोहल्ला का प्रयोग किया।
    - होला मोहल्ला का उत्सव आनंदपुर साहिब में छह दिन तक चलता है।
    - इस अवसर पर, घोड़ों पर सवार निहंग, हाथ में निशान साहब उठाए तलवारों के करतब दिखा कर साहस, पौरुष और उल्लास का प्रदर्शन करते हैं।
  • अंगारों पर से गुजरकर खेलते हैं होली।
    अंगारों पर से गुजरकर खेलते हैं होली...
    - मथुरा के पास फैलान गांव में होली पर इस गांव का एक पंडित अपने शरीर पर एक अंगोछा पहनकर 20-25 फुट घेरे वाली होली की धधकती आग में से निकल कर लोगों को हैरान कर देता है।
    - यह पंडित पूरे एक साल पहले संयमित तरीके से खुद को आग से निकलने के लिए तैयार करता है और ईश्वर की अराधना करता है।
    ये है कारण...
    ईश्वर की कृपा से आग प्रह्लाद को छू भी नहीं पाई और हिरण्यकश्यप की बहन होलिका जलकर राख हो गई। मथुरा के समीप फैलान गांव के लोग आज भी हर साल इस कथा को जीवित करते हैं।
  • डोल यात्रा' या 'डोल पूर्णिमा' होली- बंगाल में
    'डोल यात्रा' या 'डोल पूर्णिमा' होली- बंगाल में
    - बंगाल में होली को 'डोल यात्रा' या 'डोल पूर्णिमा' कहते हैं। होली के दिन राधा और कृष्ण की प्रतिमाओं को डोली में बैठाकर पूरे शहर में घुमाते हैं और औरतें उसके आगे नृत्य करती हैं।
    - यह भी अपने आप में एक अनूठी होली है। बंगाल में होली को बसंत पर्व भी कहते है।
    - इसकी शुरुआत रवीन्द्र नाथ टैगोर ने शांति निकेतन में की थी। उड़ीसा में भी होली को डोल पूर्णिमा कहते हैं और भगवान जगन्नाथ जी की डोली निकाली जाती है।
  • दुल्हंदी होली- हरियाणा
    दुल्हंदी होली- हरियाणा
    - हरियाणा की होली भी बरसाने की लट्ठमार होली जैसी ही होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां देवर, भाभी को रंगने की कोशिश करता है और बदले में भाभी देवर की लाठियों से पिटाई करती है।
    - यहां होली को 'दुल्हंदी' भी कहते हैं।
  • लट्ठमार होली- मथुरा
    लट्ठमार होली- मथुरा
    - उत्तर प्रदेश का मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव यह पूरा ब्रज का इलाका है, कहते हैं यहीं से होली की शुरुआत हुई और यहां की होली में सबसे ज्‍यादा मस्‍ती देखने को मिलती है।
    - सप्‍ताह भर पहले से ही जश्‍न शुरू हो जाता है और यहां लोग सिर्फ रंगों से ही नहीं बल्कि लड्डुओं व लाठियों से भी होली खेलते हैं।
    - इसे लट्ठमार होली कहते हैं, परंपराओं के मुताबिक, महिलाएं लाठियां बरसाती हैं और पुरुष अपना बचाव करते हैं और यह नजारा इतना दिलचस्‍प होता है कि इसे देखने के लिए देश भर से ही नहीं बल्कि दुनिया भर से हजारों लोग यहां आते हैं।
  • माली होली, गोदाजी की गैर होली और बीकानेर की डोलची होली- राजस्थान
    माली होली, गोदाजी की गैर होली और बीकानेर की डोलची होली- राजस्थान
    - राजस्थान की होली तीन प्रकार की होती है। माली होली- इसमें माली जात के मर्द, औरतों पर पानी डालते हैं और बदले में औरतें मर्दों की लाठियों से पिटाई करती हैं।
    -इसके अलावा गोदाजी की गैर होली और बीकानेर की डोलची होली भी बेहद खूबसूरत होती है।
  • शिमगो होली- गोवा
    शिमगो होली- गोवा
    - गोवा के निवासी होली को कोंकणी में शिमगो या शिमगोत्सव कहते हैं।
    - वे इस अवसर पर वसंत का स्वागत करने के लिए रंग खेलते हैं।
    - गोवा में शिमगोत्सव की सबसे अनूठी बात पंजिम का वह जुलूस है, जो होली के दिन निकाला जाता है।
    - यह जुलूस अपने गंतव्य पर पहुंचकर सांस्कृतिक कार्यक्रम में परिवर्तित हो जाता है।
    - इस कार्यक्रम में नाटक और संगीत होते हैं। हर जाति और धर्म के लोग इस कार्यक्रम में उत्साह के साथ भाग लेते हैं।
  • महिला होली- उत्तराखंड
    महिला होली- उत्तराखंड
    - उत्तराखंड के कुमाउं क्षेत्र में भी धूमधाम से होली मनाई जाती है।
    - स्‍थानीय लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं और समूह में गाना गाते व नृत्‍य करते हुए जश्‍न मनाते हैं।
    - वहीं राह गुजरते लोगों का स्‍वागत करते हैं, इस तरह के समारोह को यहां बैठकी होली या महिला होली के नाम से भी जाना जाता है।
    - जबकि यहां होली बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाती है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: types of holi festival celebration
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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