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2 करोड़ के फेर में अटका पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:35 IST

राज्यसरकार की ओर से उपयोगिता प्रमाण भेजने में देरी के कारण प्रदेश में पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट शुरू नहीं हो रहा है। इस प्रमाण के बिना दूसरी किस्त अटक गई। केंद्र सरकार ने पहली किस्त का भुगतान तो कर दिया था।

दूसरी किस्त अटकने से नर्सिंग, फार्मेसी की तरह एक ही छत के नीचे पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट शुरू करने की योजना शुरू नहीं हो पाई है। इस कारण मौजूदा हालात में पैरामेडिकल छात्रों की कक्षाएं सिर्फ कागजों में साबित हो रही है। सिर्फ प्रेक्टिकल प्रशिक्षण ही मिल पा रहा है। भवन बनने के बाद प्रारंभ नहीं होने से मरीजों को बेहत्तर इलाज देने के लिए नए कोर्सेज जैसे डायलिसिस टेक्नोलोजी, ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलोजी, डेंटल मेकेनिक हाइजेनिस्ट, एंडोस्कोपी टेक्नोलोजी, इमरजेन्सी मेडिकल केयर का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ट्रांसफार्मरलगा लेकिन कनेक्शन नहीं :भवन मेंट्रांसफार्मर लगा है, लेकिन बिजली कनेक्शन का भी इंतजार है। भवन समाज कंटकों का अड्डा बन गया है।

^भवन का अधिकतर काम हो चुका है। कुछ काम बाकी है। केन्द्र सरकार से डेढ़ करोड़ रुपए मिलने के बाद काम शरूु हो जाएगा। -डॉ.यू.एस.अग्रवाल,प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर

^ मुझे केन्द्र सरकार से दूसरी किश्त का इंतजार है। सेठी कॉलोनी स्थित मनोचिकित्सालय के सामने भवन बन चुका है। इससे एक ही छत के नीचे पैरामेडिकल छात्रों को क्वालिटी एज्यूकेशन मिल सकेगी। -राजेन्द्रराठौड़, चिकित्सा मंत्री

यह था पूरा मामला

स्वास्थ्यएवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने केन्द्रीय प्रवर्तित योजना के अंतर्गत पैरामेडिकल पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए 5 जुलाई 2015 को राज्य सरकार के एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर को एक मुस्त के माध्यम से 12.16 करोड़ अनुमोदित किए थे। केन्द्र सरकार का 85 फीसदी राज्य सरकार का 15 फीसदी हिस्सा है। स्वीकृत राशि में 6.18 करोड़ बुनियादी ढांचे पर 5.43 करोड़ उपकरण और .55 करोड़ संकायों पर व्यय किया जाना था। केन्द्र सरकार ने प्रथम किस्त के रूप में 5 जुलाई 2012 को 5.17 करोड़ रुपए जारी किए। केन्द्र सरकार के नियमानुसार दूसरी किस्त तब जारी होगी, जब प्रथम किस्त का उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर उपलब्ध कराएगी। कैग रिपोर्ट की जांच में पाया गया कि उपकरणों की राशि 5.43 करोड़ में से राशि 2.11 करोड़ उपकरणों की प्राप्ति पर खर्च (मई 2015) में किए और उपयोगिता प्रमाण पत्र 23 मई 2015 को भेजा गया। इसके हिसाब से उपयोगिता प्रमाण पत्र 3 साल देरी से भेजा गया, जिसके कारण दूसरी किस्त 3.32 करोड़ की राशि नहीं मिली।

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Web Title: 2 करोड़ के फेर में अटका पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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