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एक वीरान गांव की दर्दनाक कहानी, घरों पर लटके ताले तो सूना पड़ा स्कूल

ज्योति लवानिया | Mar 21, 2017, 06:51 IST

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40 घरों वाले इस गांव में इक्का-दुक्का परिवार रहते है।

धौलपुर.भैंसेना पंचायत समिति का छोटा सा गांव हथियाखार शहर से मात्र 6 किमी दूरी। पूरे रास्ते सड़क होकर बीहड़ों के बीच पगडंडिया। गांव में एकाध को छोड़कर सब कच्चे पक्के मकानों पर ताले। मवेशी, बच्चों की गूंज। शाम होते ही बीहड़ों में बसा गांव गुम हो जाता है घुप अंधेरे में। क्या है इस वीरान गांव की मजबूरी...
- गांव की ओर भास्कर संवाददाता ने जब रूख किया तो बीहड़ की पगडंडियां से गुजरते वक्त गुजरने वाले कई राहगीर मिले तो उनसे पूछा कि हथियाखार गांव कहां है, जो उनका एक ही जबाव था कि गांव से निकलकर अब लोग शहर में आकर बस गए हैं। कारण पूछा तो वह यह कहने लगे कि आप जिस रास्ते से गुजर रहे हो उस रास्ते की सुधरने की बांट जोहते-जोहते गांव वाले थक गए। कई सरकारें आई और चली गई, लेकिन इस गांव में आज तक रोशनी नहीं पहुंची। बिजली का प्रबंध नहीं होने से यहां से पलायन कर शहर में जाकर रह रहे हैं।
- 40 घरों वाले इस गांव में इक्का-दुक्का परिवार रहते है। स्कूल था, लेकिन बच्चों के नहीं आने से दिसंबर 2016 से वह भी बंद पड़ा है।
- जैसे ही आगे बढ़े तो ऊंचे नीचे टीलों पर बने पक्के मकानों पर ताले लटके हुए थे। आगे बढ़े एक दो व्यक्ति हमें धुंधली सी तस्वीर से देखते ही बोले साब- अाप हमारे गांव की कोई सुध लेने आए हो तो सबसे पहले यहां रोड बिजली की व्यवस्था कर दो। प्रशासन से कहते कहते तो वर्षों बीत गए। अगर जल्द ही कोई प्रबंध नहीं हुए तो पूरा गांव तो खाली हो ही चुका है।
ग्रामीण बोले- किसी नेता अफसर ने आज तक कभी नहीं किया दौरा
- करीब सौ वर्ष पुराने इस गांव में ही शायद कभी कलेक्टर, एसपी या अन्य ने दौरा किया होगा।
- हां, चुनाव के समय विधायक रहे नेताओं ने विकास के नाम पर वोट बंटोरे, लेकिन आज गांव में विकास तो दूर मुख्य समस्या सड़क बिजली के कारण ही पलायन कर गए।
- एकाध परिवार जो गांव में हैं, वह भी वीरानी सी छाए माहौल को छोड़ने यहां से पलायन का मन बना चुके हैं। ग्रामीण कहते हैं कि अभी सुना है धौलपुर में उपचुनाव हैं, इसलिए कोई कोई जरूर वोट मांगने आएगा।
- चंबल किनारे बीहड़ों से घिरे हथियाखार गांव में हरेक परिवार के पास खेती योग्य जमीन है। जिसमें गेहूं, सरसों, चना आदि फसलें वह लेते हैं।
- वहीं पांचवीं तक पढ़ने के लिए स्कूल भी खुला, लेकिन पांचवीं के बाद बिना सड़क के शहर में पढ़ाई के लिए कैसे जाए, यह अड़चन आई। वहीं सिंचाई पढ़ाई के लिए बिजली का होना।
- गांव में मिले एकाध परिवार के सदस्य मुन्ना, भिभूती, रबूआ, लाखन आदि का कहना था कि अगर अभी भी सड़क बिजली की व्यवस्था हो तो लोग शहर से लौटकर गांव में रहने को तैयार हैं। वहीं स्कूल में फिर से चहचहाहट दिखाई दे सकती है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए गर्भवती या बीमार होने पर शहर तक कंधे पर ले जाते हैं
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Web Title: abandoned village Of rajasthan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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