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जितनी बड़ी सेल उतनी मोटी बंधी, इसलिए ट्रांसफर में भी लाखों का लेन-देन

bhaskar news | Apr 18, 2017, 06:26 IST

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जितनी बड़ी सेल उतनी मोटी बंधी, इसलिए ट्रांसफर में भी लाखों का लेन-देन
जयपुर /जोधपुर.एसीबी ने सोमवार को सहकारी भंडार के जीएम मधुसूदन शर्मा और फार्मासिस्ट अशोक सोनी को 5.50 लाख रुपए की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार के भंडार का खुलासा किया है। भंडार की दुकानों पर लगने वाले फार्मासिस्ट पैसा देकर पोस्टिंग लेते हैं, जीएम व जयपुर बैठे उच्च अधिकारी ट्रांसफर की धमकी देकर वसूली करते हैं। जेनेरिक दवाओं के बदले ब्रांडेड दवाएं बेच कर मोटी कमाई करते हैं इसलिए फार्मासिस्ट एक जगह टिके रहना चाहते हैं और उसके लिए बाकायदा जीएम को मंथली पहुंचाते हैं। मंथली भी ऐसी कि जहां सेल ज्यादा वहां की मंथली भी ज्यादा होती है। एसपी अजयपाल लांबा बताते हैं कि गिरफ्तार जीएम ने मंथली का हिस्सा जयपुर तक पहुंचाने की बात कही है, उसे भी वेरिफाई कर सबूत जुटाने की कोशिश जारी है।

इन 3 कारणों से जाने: क्यों लेते हैं मंथली और क्यों देते हैं ट्रांसफर का पैसा?
पहली वजह- स्टॉक एंट्री पूरी नहीं रखते :एसीबी की जांच के मुताबिक अस्पतालों में चलने वाली दुकानों के स्टॉक में गड़बडिय़ां हैं। किसी की भी स्टॉक एंट्री पूरी नहीं होती, सेंट्रल स्टॉक से मिलान नहीं खाती। बाद में मैनेज होती है।

दूसरी वजह- ब्रांडेड दवाएं बेचते हैं : भंडार से मिलने वाली दवाएं जेनेरिक होती है इसलिए जो दवा 20 रुपए की होती है, ब्रांडेड में वही 200 रुपए तक बेचते हैं। सेंट्रल स्टॉक से दवाएं उठाते नहीं, पेंशनर्स व सरकारी कर्मचारियों को ब्रांडेड लेने पर मजबूर करते हैं।

तीसरी वजह- कमाई के लिए ट्रांसफर कराते हैं : एमजीएच, एमडीएम, उम्मेद व सेटेलाइट अस्पतालों की सेल 20 से 50 लाख तक है इसलिए हर दुकान के फार्मासिस्ट की मंथली 2, 5, व 6 लाख रुपए तक तय है। यह सेल ब्रांडेड की बिक्री से है इसलिए कोई यहां से हिलना नहीं चाहता।
जिसने 6 लाख रिश्वत दी उसका क्या? गवाह या आरोपी
एसीबी ने जीएम के दलाल अशोक परिहार के माता का थान स्थित घर की तलाशी ली तो वहां 6 लाख रुपए बरामद हुए। दलाल ने बताया कि यह पैसा 5 दिन पहले फार्मासिस्ट डीपी शर्मा ने दिया था। वह भी अपना ट्रांसफर रुकवाना चाहता था। कानून में रिश्वत देना भी अपराध है इसलिए डीपी शर्मा या तो सरकारी गवाह बनेगा अथवा रिश्वत देने के आरोप में आरोपी बनाया जाएगा।

जयपुर तक जाएगी आंच? जीएम तो ट्रांसफर करता नहीं
एसीबी की पूछताछ में जीएम शर्मा ने बताया कि विभाग में मंथली का सिस्टम नया नहीं है। वह पिछले डेढ़ साल से सभी फार्मासिस्ट से मंथली ले रहा है और उसका बड़ा हिस्सा जयपुर तक भेजता है। चूंकि जयपुर बैठे अफसरों को भी पता है कि किस दुकान की कितनी सेल है और वहां कौन फार्मासिस्ट लगा हुआ है, जैसे ही वह फार्मासिस्ट मंथली देने में आनाकानी करता है, उसका ट्रांसफर कर देते हैं। फार्मासिस्ट भी कमाई के चक्कर में मनचाही पोस्टिंग के लिए पैसा देते हैं। इसलिए इन दिनों मंथली के साथ ट्रांसफर के नाम पर भी पैसा लिया जा रहा है। एसीबी जयपुर के अफसरों की जांच कर रही है, क्योंकि ट्रांसफर करना जीएम के हाथ में नहीं होता, वह तो जयपुर से ही होता है।
जो भी पकड़ में आता है वह खुद को बचाने के लिए इस तरह की बातें करता है। मैं किसी भी मामले में हस्तक्षेप नहीं करता। मेरा इससे कोई लेना देना नहीं है। अगर किसी ने गलती की है तो उसे सजा भी मिलेगी।
अजय सिंह किलक, सहकारिता मंत्री
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Web Title: GM of Cooperative Stores and agent arrested by acb rajasthan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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