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बीरबल के 11 जवाबों में समझिए बजट आपके लिए कैसा, बजट के चुटीले अंदाज...

Bhaskar news | Mar 09, 2017, 03:12 IST

  • जयपुर. इस बार का बजट अकरबर-बीरबल के चुटीले अंदाज में क्योंकि... कहने को तो ये किरदार सैकड़ों साल पुराने हैं मगर प्रासंगिकता आज के बजट से जुड़ी है। आंकड़ों की बाजीगरी और घोषणाओं के स्वप्नजाल को समझना हर किसी के बस की बात नहीं। हर बजट की तरह इस बार भी असर समझते-समझते अगले बजट की तारीख दस्तक देने लगेगी। सो...बजट में आपके लिए क्या है ये समझाने के लिए हमने बुने अकबर-बीरबल के किरदार। अकबर यानी सरकार या सत्ता जो घोषणाएं करती है, वादे करती है। बीरबल यानी हमारे विशेषज्ञ जिन्हें घोषणाओं का भविष्य और वादों की हकीकत समझ में आती है। बजट के हर सेक्टर से जुड़े 16 विशेषज्ञों से बात कर हमने जाना कि बजट की असलियत क्या है। छोटी-बड़ी घोषणाओं को बीरबल बड़े अर्थों में समझा रहे हैं। अकबर के सवालों में सरकार की राज़दारी है तो बीरबल के जवाबों में छुपा है आंकड़ों की असलियत पर व्यंग्य...
    अकबर की बजट पहेली- हमने सबको कुछ न कुछ दिया, लिया कुछ भी नहीं
    बीरबल की हाजिर जवाबी- नमो नमो महाराज जुलाई में जीएसटी भरपाई कर देगा
    बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे। दरबार जुटने लगा। सभी मंत्री-विधायक एक-एक कर सदन में पहुंचे। इस उम्मीद के साथ कि उनके इलाके के लिए भी कोई न कोई इनाम मिलेगा। सूबे की वजीर ए आला वसुंधरा राजे ने पिटारा खोला। चौथे बजट के जरिये सभी के दामन में कुछ न कुछ डालने की कोशिश की। लेकिन किसी को हिस्से में तिनके आए तो किसी के हिस्से में फूल। मुख्यमंत्री का जन्मदिन था-यह मौका था, महिला दिवस था-यह दस्तूर था। लेकिन महिलाओं को कुछ खास नहीं मिला। अगले साल चुनाव को देखते हुए माना जा रहा था युवाओं, कर्मचारियों को बड़ी सौगातें मिलेंगी। लेकिन युवाओं के लिए पुलिस कांस्टेबल की 5 हजार भर्तियों की घोषणा होकर रह गई तो कर्मचारियों के लिए 7वें वेतनमान के लिए पहले से गठित हो चुकी कमेटी की सूचना भर दी गई। विशेषज्ञ इसे मिक्स बजट कह रहे हैं। बता रहे हैं-दिया सबको है, लेकिन थोड़ा-थोड़ा। यह थोड़ा-थोड़ा भी सेक्टरवाइज नहीं, बल्कि इलाकावाइज बांटा गया है। लिया है तो बस सिगरेट से। इस पर 15 प्रतिशत वैट बढ़ाया गया है। इसके अलावा कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया। मौजूदा करों में 200 करोड़ रु. से ज्यादा की छूट दी गई है। घोषणाओं की सूची के लिहाज से भाजपा सरकार के कार्यकाल का यह सबसे बड़ा बजट भी है। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, कृषि, धार्मिक-पर्यटन, और व्यक्तिगत लाभ की पेंशन योजनाओं को लेकर कई ऐलान हुए हैं। रिफाइनरी, मेट्रो सेकंड फेज, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और बीसलपुर जैसी बड़ी परियोजनाओं को लेकर बजट में कुछ नहीं था। विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं, भले ही नए टैक्स नहीं लगाए गए हैं, लेकिन जुलाई में प्रस्तावित जीएसटी के लागू होने के बाद ही सही तस्वीर सामने आएगी।
    राहत- यूडीएच
    100% छूट बकाया यूडी टैक्स पर ब्याज व पैनल्टी राशि में 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक। लीज राशि एक मुश्त जमा कराने पर ब्याज राशि में 100 फीसदी छूट 30 सितंबर तक बढ़ाए जाने
    की घोषणा।
    वन्यजीव- देश में पहली बार प्रोजेक्ट लेपर्ड
    07 करोड़ रु. का प्रावधान प्रोजेक्ट लेपर्ड के लिए। प्रोजेक्ट लेपर्ड शुरू करने वाला पहला राज्य बनेगा राजस्थान।
    7वां वेतनमान जल्द

    राजे ने कहा कि सातवें वेतनमान के लिए गठित कमेटी ने काम करना शुरू कर दिया है। कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद इस बारे में जल्द फैसला लिया जाएगा। माना जा रहा है कि सरकार वित्तीय वर्ष 2017-18 में ही कर्मचारियों के लिए सातवें वेतनमान का लाभ दे देगी। राज्य में करीब 6.5 लाख कर्मचारी हैं।
    5500 कांस्टेबलों की भर्ती

    राजे ने पुलिस महकमे में वर्ष 2017-18 में साढ़े पांच हजार कांस्टेबलों की भर्ती करने की घोषणा की है। अगले वित्तीय वर्ष में 50 करोड़ रु. की लागत से प्रदेश में 3 एडि. एसपी व 10 डिप्टी एसपी ऑफिस और 20 थानों का निर्माण, 12 करोड़ की लागत से 5 एडि.एसपी व 15 डिप्टी एसपी आवास बनेंगे।
    जयपुर : प्लास्टिक इंजीनियरिंग
    केंद्र सरकार के सहयोग से जयपुर में 51.32 करोड़ की लागत से सेंट्रल इंस्टीट्‌यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी की स्थापना होगी। इसकी स्थापना से स्किल्ड टेक्निकल मैनपावर उपलब्ध होगी। राज्य सरकार की ओर से संस्थान के लिए 25.66 करोड़ का सहयोग दिया जाएगा।
    बीरबल के 11 जवाबों में समझिए बजट आपके लिए कैसा...
  • 1. हमने तो आज ही दे दिया विजन 2020
    - वाह जहांपनाह, इससे तो 2018 का विजन भी सुधर ही जाएगा...
    बजट भाषण की शुरुआत ही विजन 2020 के साथ हुई है, यानी बजट में जिस विकास की परिकल्पना दी गई है उसके पूर्ण पालन की गारंटी तो तभी है जब आगामी चुनाव में भी भाजपा सत्ता में लौटे। क्योंकि पिछले वर्षों के बजट का इतिहास बताता है कि पार्टियां अक्सर विरोधी दलों की सरकारों के दौरान हुई घोषणाओं-योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल देती हैं। आज के बजट भाषण में भी सीएम ने जिक्र किया कि उनके पिछले कार्यकाल में शुरू की गई अविका कवच योजना गहलोत सरकार ने बंद कर दी थी जिसे उन्होंने दोबारा शुरू किया है। मौजूदा सरकार ने कांग्रेस शासन में शुरू हुई नि:शुल्क दवा योजना का पहले बजट घटाया और फिर भामाशाह योजना में उसे "मर्ज' कर दिया। बजट में की गई घोषणाएं भी आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए ही की गई लगती हैं। हर वर्ग को लुभाने की कोशिश की गई है। थोड़ा-थोड़ा ही सही, सबको दिया गया है।
  • 2. हम तो गांवों को स्मार्ट बना रहे हैं...फिर इतना हो-हल्ला क्यों?
    - लोग बिजली का रोना रो रहे हैं हुजूर। कहते हैं लैपटॉप-टैबलेट चार्ज कहां से करें...पहले खेती के लिए तो पूरी बिजली मिल जाए...
    बजट में आगामी 2 वर्षों में 1 लाख नए कृषि कनेक्शन देने की घोषणा की गई है। जबकि गत तीन वर्षों में राज्य में विद्युत उत्पादन सिर्फ 5086 मेगावाट बढ़ा है। यही नहीं कृषि कनेक्शन भी सिर्फ एक लाख 27 हजार ही जारी हो पाए हैं। थर्मल एनर्जी के पांच में दो प्लांट फिलहाल बंद पड़े हैं। गांवों में आठ घंटे विद्युत आपूर्ति का वादा भी सरकार पूरा नहीं कर पा रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री की 5 हजार से ज्यादा आबादी वाले गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने की घोषणा थोड़ी फीकी पड़ जाती है। गांवों में ई-पुस्तकालय, नॉलेज सेंटर और वाई-फाई नेटवर्क का वादा तभी पूरा हो सकता है जब गांवों को पर्याप्त बिजली भी मिल पाए।
  • 3. खजाने में इतना है कि सबकी तालीम का बंदोबस्त हो जाए?
    - चिंता न करें हुजूर, सब पढ़ेंगे ही नहीं स्किल्ड भी हो जाएंगे... बस फिर नौकरियों का भी इंतजाम करना पड़ेगा
    सी एम ने उच्च शिक्षा के बजट में 11.01% की बढ़ोतरी की है। 8 नए महाविद्यालय खोले जाएंगे 7 महाविद्यालयों का क्रमोन्यन होगा। साथ ही स्नातक और स्नातोकत्तर स्तर पर नए पाठ्यक्रम शुरू होंगे। इतना ही नहीं स्किल डेवलपेमेंट के लिए देश का पहला राजकीय कौशल विश्वविद्यालय भी खोलने की घोषणा हुई है। नीमराणा में जापान-इंडिया मैन्युफैक्चरिंग इंस्टीट्यूट भी खुलेगा। यानी कुल मिलाकर प्रशिक्षित युवाआें की फौज खड़ी करने की पूरी तैयारी है, मगर इसके अनुरूप नौकरियों की घोषणा न तो इस बजट में हुई है और न ही पिछले वर्षों में घोषित हुई नौकरियों का भविष्य पता चल पा रहा है। बजट में सीएम ने 5500 कांस्टेबलों की ही भर्ती की घोषणा की हैं। हां, मनरेगा के तहत जरूर नए काम करवाने की घोषणा हुई है।
  • 4. देख लेना बीरबल, अब तो हमारे यहां पावणों की तादाद बढ़ ही जाएगी
    - बिल्कुल हुजूर, एग्रेसिव मार्केटिंग से सबको लुभा लेंगे... जरा शहर भी साफ हो जाते तो पावणों की सेल्फी में आवारा गाय नहीं होती
    पर्यटन, पुरातत्व, कला व संस्कृति पर इस बार 49.42% बजट बढ़ाया गया है। जरूरी भी था...2016 में राज्य में आने वाले कुल पर्यटकों की संख्या भी 17.31% बढ़ी है। हालांकि इस बजट में से पर्यटन को बढ़ावा देने के एग्रेसिव मार्केटिंग कैंपेन पर 88 करोड़ खर्च करने की घोषणा हुई है तो पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं, सौंदर्यीकरण, संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए महज 36 करोड़। पर्यटन के साथ ही इनसे जुड़े शहरों की सूरत सुधारना भी जरूरी हो जाता है, मगर इसके लिए ठोस योजना बजट में नहीं दिखती। शहरी क्षेत्र के विकास के लिए दो वर्षों के लिए 9500 करोड़ का बजट दिया गया है, मगर इसमें स्वच्छता पर कितना खर्च होगा ये तय नहीं है।
  • 5. हमारे राज में महिलाएं तरक्की कर रही हैं...
    - जी हुजूर, तरक्की तो हो रही है, मगर बलात्कार के मामलों में भी हमारा सूबा तीसरे नंबर पर है
    यूं तो महिला एवं बाल विकास का बजट पिछले साल के मुकाबले 17.06% बढ़ गया है मगर कुल बजट में महिलाओं की हिस्सेदारी की बात करें तो ये लगातार घट रही है। 2014-15 में ये कुल बजट का 1.5% था, 2015-16 में 1.2% और 2016-17 में 1.02%...इस बार जरा सी वृद्धि के साथ ये कुल बजट का 1.04% है। महिलाओं के प्रति अपराधों और हिंसा से तैयारी की बात करें तो एक तरफ कक्षा 6 से 12 तक की बच्चियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जाएगी, वहीं 7 जिलों में महिलाओं को लिंग आधारित भेदभाव और हिंसा के प्रति जागरूक करने के लिए चिराली योजना शुरू की जाएगी। साथ ही जयपुर के अलावा 15 जिलों में महिलाआें के लिए वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर भी खोले जाएंगे। हालांकि इन घोषणाआें के बावजूद ये तथ्य भी अपनी जगह कायम हैं कि बलात्कार के मामलों में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है। अकेले जयपुर में 2015 में 279 रेप केस दर्ज हुए।
  • 6. देखना बीरबल, हम अवाम में सबके घर का सपना पूरा कर देंगे...
    - बिल्कुल हुजूर, घर तो मिल ही जाएगा, बस शहर के झुग्गियों के बाशिंदे इनमें रहें...किराये पर न चढ़ा दें
    बजट में स्टांप ड्यूटी में सुधार से रियल एस्टेट को जहां राहत की सांस मिलेगी वहीं मुख्यमंत्री जनआवास योजना में भी रियायत मिलेगी। सेल एग्रीमेंट और पावर ऑफ अटॉर्नी पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस घटाने का भी फायदा मिलेगा। हालांकि ये तथ्य भी अपनी जगह है कि अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत मंजूर 14487 मकानों में से अब तक एक भी जमीन पर नहीं है। चिंता की बात ये भी है कि ये योजनाएं जिन झुग्गियों के पुनर्वास को ध्यान में रख चलाई जा रही हैं उनकी संख्या राज्य में अब भी 3.50 लाख से ज्यादा है। इन बस्तियों के बाशिंदे योजनाओं में फ्लैट आवंटित कर किराये पर चढ़ा रहे हैं और जनप्रतिनिधि इन कच्ची बस्तियों के नियमन की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ अफोर्डेबल हाउसिंग के नाम पर बिल्डरों का भी फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है।
  • 7. जंगलों और जानवरों के लिए हम कितना कर रहे हैं, फिर नाराजगी क्यों?
    - नासमझ लोग हैं हुजूर, जंगल-पेड़ का हम करेंगे क्या? ऑक्सीजन तो गाय भी छोड़ती है...
    सीएम ने बजट में गोडावण और तेंदुओं के संरक्षण के लिए योजनाओं की घोषणा करने के साथ ही शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से जयपुर की तर्ज पर पांच शहरों में स्मृति वन बनाने की भी घोषणा की है। हालांकि राज्य में घटते वन क्षेत्र की चिंता को दूर करने के ठोस उपाय अभी नहीं दिखे हैं। राजस्थान में कुल ट्री कवर कुल भूभाग का सिर्फ 2.42% रह गया है। तेंदुओं के लिए भी संरक्षित वन क्षेत्र सिर्फ 25 हैं जिनमें 292 तेंदुए रहते हैं। बाकी 142 तेंदुओं की आबादी 40 असंरक्षित वन क्षेत्रों में रह रही है। तेंदुओं के संरक्षण प्रोजेक्ट लेपर्ड के लिए 7 करोड़ का बजट तो आवंटित कर दिया गया है, मगर ये राशि कैसे खर्च होगी ये स्पष्ट नहीं है।
  • 8. हमने इतनी नौकरियां बांट दीं, अब कितने बेरोजगार बचे?
    - ज्यादा नहीं हैं हुजूर, फिर भी कुछ बच ही जाते हैं...जिन्हें पहले ही दी थी उनकी भी कोर्ट में अटक गई है
    इस बजट में नौकरियों की घोषणा के नाम पर सिर्फ पुलिस विभाग में एक साल के भीतर 5500 कांस्टेबलों की भर्ती की घोषणा की गई है। इसके अलावा 900 पशु चिकित्सा अधिकारी और 4000 पशुधन सहायकों के रिक्त पद भरने की बात तो कही गई, मगर कोई टाइमफ्रेम तय नहीं किया गया है। पिछले बजट में भी सरकार ने 1 लाख नौकरियों का लक्ष्य तो रखा था, मगर इसमें से कितनी धरातल पर उतरीं इसका पता नहीं चल पाया। सरकार के पिछले तीन साल में एक लाख से ज्यादा भर्तियां निकाली गईं लेकिन इसमें से नियुक्ति सिर्फ 8 हजार लोगों को मिल पाईं। 68250 नौकरियां तो एसबीसी आरक्षण और कोर्ट केस के कारण अटक गईं। हालांकि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सिर्फ एक ही परीक्षा, प्रहरी भर्ती परीक्षा में धांधली सामने आई।
  • 9. इतना किया है सबकी सेहत सुधर जाएगी...
    - बेशक हुजूर, ...औरतों-बच्चों को जाने क्या चिंता सताती है कि 46% एनिमिक 36% अंडरवेट हैं
    चिकित्सा का बजट इस बार पिछले साल के मुकाबले 8.21% ज्यादा है। व्यावहारिकता को ध्यान में रखते हुए नए बड़े अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों की घोषणा नहीं की गई है, मगर 9 पीएचसी व सीएचसी के क्रमोन्यन के साथ ही मौजूदा अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। जयपुर में हार्ट ट्रांसप्लांट और कोटा में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा की घोषणा के साथ ही सिलिकोसिस के लिए कोटा और जोधपुर में अलग विंग की भी घोषणा की गई है। हालांकि इन सुविधाओं के बावजूद महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की तस्वीर राज्य में कुछ खास नहीं सुधर रही। एनएफएचएस-4 के मुताबिक राज्य में 46% महिलाएं एनिमिक हैं तो 5 साल से कम के 36% बच्चे अंडरवेट हैं। ऐसे में इन सुविधाओं को सही दिशा देना जरूरी हो जाता है।
  • 10. गरीब सवर्ण छात्राओं को भी हम स्कूटी देंगे...
    - क्या बात है जहांपनाह, बस स्कूटी के साथ पेट्रोल पर भी कोई सब्सिडी दे देते तो अच्छा होता
    सरकार ने आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन तो पहले ही कर दिया था, इस बजट में 2.50 लाख सालाना से कम आय वाले सवर्ण परिवारों के मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए स्कॉलरशिप्स की घोषणा की है। सबसे आकर्षक स्कीम राज्य शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं में 90% अंक लाने वाली कुल 400 छात्राआें को स्कूटी देने की है। इसके अलावा 10वीं और 12वीं में मेरिट के टॉप 100 इस वर्ग के छात्र-छात्राआें को 15-15 हजार रुपये, आईआईटी, आईआईएम के लिए क्वालीफाई करने वाले इस वर्ग के 100 छात्र-छात्राआें को 25-25 हजार, आरएएस में चयन पर इस वर्ग के टॉप 100 को 30-30 हजार और आईएएस में चयन पर टॉप 50 को 50-50 हजार दिए जाएंगे। स्कूटी बांटने की स्कीम तो अच्छी है, मगर ये तय नहीं है कि इनके लिए पेट्रोल कहां से आएगा।
  • 11. हमने इतने ऐलान किए...पूरे तो हो जाएंगे ना?
    - निश्चिंत रहें हुजूर, पहले के अधूरे ऐलान ही किसे याद हैं...
    बजट पर्व यूं तो घोषणाआें का पर्व होता है, मगर इनमें से कितनी घोषणाएं वास्तविकता के धरातल पर उतरती हैं, इसका हिसाब रखना मुश्किल हो जाता है। पिछले बजट की 30 से ज्यादा ऐसी घोषणाएं हैं जो अब तक हकीकत में नहीं बदल पाई हैं। ये वो बड़ी घोषणाएं हैं जो बड़े शहरों से जुड़ी हैं और जनस्मृति में ताजा हैं। इसके अलावा पिछले तीन बजट की कई घोषणाएं ऐसी भी हैं जिनका क्रियान्वयन तो शुरू हुआ, मगर कुछ ही समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इस बजट की घोषणाओं की नियति तय होना और ज्यादा जरूरी इसलिए हो जाता है क्योंकि ये चुनाव से पहले आखिरी पूर्ण बजट है। 2018 के अंत में चुनाव होने हैं अत: अगले साल अंतरिम बजट ही पेश किया जाएगा।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Rajasthan budget in akbar birbal
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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